देहरादून/ उत्तराखंड खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी खेलों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा में समायोजित करने की प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर खेल विभाग में नियुक्ति देने की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि उनकी प्रतिभा का उपयोग राज्य की खेल व्यवस्था को मजबूत करने में भी हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा सुरक्षित भविष्य देना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा मिले। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों का सम्मान समय पर होना चाहिए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय खेल नीति 2025 को आधार बनाते हुए उत्तराखंड की नई खेल नीति तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुरूप खेलों के क्षेत्र में आधुनिक सोच, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन को नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी प्रदर्शन कर सकें।

मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, गोलापार (हल्द्वानी) को लेकर भी अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने आगामी माह से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र प्रारंभ करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा। इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में उत्तराखंड को खेल शिक्षा और खेल अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने राज्यभर में खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने एक ब्लॉक-एक मिनी स्टेडियम योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन स्टेडियमों का कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक खेल सुविधाएं पहुंचेंगी तो वहां की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय मंच तक अपना स्थान बना सकेंगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खेलों का विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि हर ब्लॉक और हर जिले तक पहुंचे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने लेगेसी प्लान पर तेजी से कार्य करने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान विकसित किए गए खेल बुनियादी ढांचे का बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए। देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, गोलापार स्टेडियम, रुद्रपुर वेलोड्रोम, टिहरी झील, हरिद्वार और पिथौरागढ़ के खेल परिसरों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का अधिकतम उपयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित खेल परिसंपत्तियां केवल आयोजन तक सीमित न रहें, बल्कि आने वाले वर्षों तक खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हों।
मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले 39वें राष्ट्रीय खेलों को लेकर भी अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेल विधाओं में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं और खेल संघों के सहयोग से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान एवं चयन प्रक्रिया तेज की जाए। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो उत्तराखंड आगामी राष्ट्रीय खेलों में पहले से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि खेलभूमि के रूप में भी राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इसके लिए सरकार लगातार खेल अवसंरचना, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के कल्याण पर निवेश कर रही है।
बैठक में एक जिला-एक स्पोर्ट्स (ODOS) योजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में निर्धारित खेल के अनुरूप कोचिंग, प्रतिभा खोज और प्रतिस्पर्धी माहौल विकसित किया जाए। साथ ही प्रत्येक जिला खेल छात्रावास को संबंधित खेल की स्पोर्ट्स नर्सरी के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उनका कहना था कि यदि जिले स्तर पर प्रतिभाओं को सही दिशा मिलेगी तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की भागीदारी और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी तक गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि युवा केवल राज्य का भविष्य ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की पहचान भी हैं। ऐसे में खेल योजनाओं को खिलाड़ियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि उसका लाभ सीधे खिलाड़ियों तक पहुंचे।
बैठक के दौरान विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गईं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 29 पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में समायोजित किया जा चुका है। वहीं एक ब्लॉक-एक मिनी स्टेडियम योजना के तहत अब तक 48 मिनी स्टेडियम तैयार किए जा चुके हैं, जबकि 10 अन्य स्टेडियमों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। शेष परियोजनाओं के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी जारी है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि लोहाघाट में भारत के पहले महिला आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। संस्थान के संचालन के लिए 16 पद सृजित किए जा चुके हैं और प्रवेश प्रक्रिया भी प्रगति पर है। इसके अलावा उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय, गोलापार में सभागार, केंद्रीय पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र, कैफेटेरिया, अनुसंधान केंद्र, शूटिंग रेंज, सेमिनार हॉल, बैडमिंटन हॉल, फुटबॉल मैदान, हॉकी मैदान और आठ लेन एथलेटिक्स ट्रैक सहित कुल 39 आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन योजनाओं को निर्धारित समय में धरातल पर उतारने में सफल रहती है तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। उत्तराखंड खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और विश्वस्तरीय खेल शिक्षा संस्थान उपलब्ध होने से राज्य की नई खेल संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या, प्रमुख सचिव ए.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक दीप्ति सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
