उत्तराखंड उच्च शिक्षाउच्च शिक्षा मंत्री मंत्री धन सिंह रावत

देहरादून। उत्तराखंड उच्च शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीकी रूप से सशक्त और समयबद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों के सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से डीजी लॉकर पर अपलोड किए जाएं, ताकि छात्र-छात्राओं को अंकपत्र और उपाधियां डिजिटल माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो सकें।

यह निर्देश सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए, जिसमें राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिव और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और समयबद्ध कार्ययोजना तय की गई।

डीजी लॉकर से जुड़ेगा पूरा शैक्षणिक डाटा

उत्तराखंड उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2026 तक राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को अपने छात्रों का शैक्षणिक डाटा डीजी लॉकर पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पिछले वर्षों का लेगेसी डाटा भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से डीजी लॉकर से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों के लिए न केवल सुविधाजनक होगी, बल्कि प्रमाण पत्र सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनेगी।

सरकार ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए सख्त व्यवस्था भी की है। सभी विश्वविद्यालयों को डीजी लॉकर से संबंधित कार्यों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट शासन और मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

रिक्त पदों पर नाराजगी, 10 फरवरी तक विज्ञापन अनिवार्य

बैठक के दौरान उत्तराखंड उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर पदों को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

मंत्री ने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि सभी विश्वविद्यालय 10 फरवरी 2026 तक अपने-अपने संस्थानों में रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती विज्ञापन जारी करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उनका कहना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक और कर्मचारी होना अनिवार्य है।

एनईपी के अनुरूप सत्र संचालन पर जोर

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक सेमेस्टर में न्यूनतम 90 दिन कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
इसके साथ ही परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जाएं, ताकि छात्रों का शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित न हो।

उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा प्रणाली में सुधार या बदलाव करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। सरकार का उद्देश्य छात्रों को एक सुव्यवस्थित, परिणामोन्मुख और आधुनिक शिक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना है।

उद्योगों से एमओयू, अनिवार्य होगा औद्योगिक प्रशिक्षण

छात्रों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों को उद्योगों के साथ एमओयू करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक और औद्योगिक अनुभव भी उतना ही जरूरी है।

इसके तहत विद्यार्थियों को अनिवार्य औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। विश्वविद्यालयों को इस संबंध में की गई प्रगति की मासिक रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी। इससे रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों की प्लेसमेंट संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा

उत्तराखंड उच्च शिक्षा मंत्री ने खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शिक्षा का अहम हिस्सा बताते हुए नियमित प्रतियोगिताओं के आयोजन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस वर्ष अंतर-विश्वविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा।
इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और अनुशासन का विकास होगा।

बायोमेट्रिक उपस्थिति और डिजिटल लाइब्रेरी

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत सभी शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य किया जाएगा।
इसके अलावा सभी शिक्षण संस्थानों को स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि छात्रों को डिजिटल अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध हो सके।

सरकार की प्राथमिकता: पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

अंत में उत्तराखंड उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार के इन सख्त और दूरदर्शी फैसलों से साफ है कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, जवाबदेही और गुणवत्ता के नए मानकों पर स्थापित करने की ठोस कोशिश की जा रही है।

By Bhaskar

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