ऋषिकेश वन भूमि विवादPhoto: AI

उत्तराखंड के ऋषिकेश में ऋषिकेश वन भूमि विवाद को लेकर जनआक्रोश अपने चरम पर दिखाई दिया। बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों लोगों ने अपने घर और जमीन बचाने के लिए ऐतिहासिक महारैली निकाली। इस रैली में शिवाजी नगर, मीरा नगर, 20 बीघा, बापू ग्राम, मनसा देवी और अमित ग्राम के निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

महारैली आईडीपीएल के खेल मैदान से शुरू होकर ऋषिकेश तहसील परिसर तक पहुंची। इस दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को गलियों से होकर आवाजाही करने के लिए मजबूर होना पड़ा।


20 हजार से ज्यादा लोगों की एकजुटता, सरकार को दिखाया दम

संघर्ष समिति के अनुसार, इस रैली में 20 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। लोगों ने एकजुट होकर सरकार को यह संदेश दिया कि वे अपने घरों और जमीन को उजड़ने नहीं देंगे। ‘ऋषिकेश बचाओ’, ‘घर बचाओ-जमीन बचाओ’ जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।

करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह रैली लगभग 8 किलोमीटर का सफर तय कर तहसील परिसर पहुंची, जहां एसडीएम के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा गया।


क्या हैं प्रमुख मांगें?

महारैली में शामिल लोगों ने सरकार से स्पष्ट रूप से दो प्रमुख मांगें रखीं—

  1. वन भूमि प्रकरण में डिफॉरेस्ट (De-forest) प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा जाए, ताकि वर्षों से बसे लोगों को राहत मिल सके।
  2. क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए, जिससे यहां रहने वाले हजारों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे किसी प्रकार की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।


“आजादी से पहले बसे इलाकों को न उजाड़ा जाए”

स्थानीय निवासियों ने कहा कि ये इलाके आजादी से पहले के बसे हुए हैं, जहां पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं। सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोगों को उजाड़ने की कार्रवाई की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है।

लोगों ने साफ कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार को भी जनता के हित में समाधान निकालना चाहिए। खासकर तब, जब इन इलाकों में राज्य और केंद्र सरकार की करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं पहले ही लागू हो चुकी हैं।


ऋषिकेश वन भूमि विवाद की जड़ क्या है?

ऋषिकेश वन भूमि विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं। दरअसल, ऋषिकेश क्षेत्र में करीब 2,866 एकड़ भूमि को 26 मई 1950 को 99 साल की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को दिया गया था। यह लीज वर्ष 2049 तक वैध है।

लीज की शर्तों के अनुसार, इस भूमि का उपयोग उद्यान विकास, चारा उत्पादन, पशुपालन और अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया जाना था। लेकिन आरोप है कि समय के साथ इस भूमि का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा।


सबलेटिंग और अवैध कब्जे का आरोप

मामले में यह भी सामने आया कि लीज पर दी गई भूमि को कथित रूप से सबलेट किया गया, यानी मूल किरायेदार द्वारा तीसरे पक्ष को किराए पर दे दिया गया। इससे वन भूमि पर अवैध कब्जों का दायरा बढ़ता चला गया।

इन गंभीर तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी की और वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की गहन जांच के निर्देश दिए।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश और कार्रवाई

एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए कि खाली पड़ी वन भूमि का सर्वे कर उसे कब्जे में लिया जाए। इसके तहत वन विभाग द्वारा जमीन की नपाई, चिह्नीकरण और नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

इसी कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों को अचानक बेदखल करना अमानवीय है और सरकार को कोई स्थायी समाधान निकालना चाहिए।


सरकार के सामने बड़ी चुनौती

ऋषिकेश वन भूमि विवाद अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं, तो दूसरी ओर हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है।

यदि सरकार समय रहते कोई संतुलित और संवेदनशील निर्णय नहीं लेती, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य और केंद्र सरकार इस जटिल विवाद पर क्या रुख अपनाती है।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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