देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव तैयारियों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने अपने तेजतर्रार नेताओं में शुमार आशुतोष नेगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते छह महीने के लिए निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही उनकी प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है।
आशुतोष नेगी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि नेगी आगामी विधानसभा चुनाव में रायपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। चुनावी मैदान में उतरने की उनकी तैयारियों के बीच पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाना उनके राजनीतिक भविष्य और चुनावी रणनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड क्रांति दल ने आशुतोष नेगी के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की है। इससे पहले पार्टी ने उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद और अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था। अब करीब दो महीने बाद पार्टी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता ही समाप्त कर दी है।
पहले पद से हटाया, अब पार्टी से किया निष्कासित
आशुतोष नेगी के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत करीब दो महीने पहले हुई थी। उस समय उत्तराखंड क्रांति दल ने उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया था। पार्टी के केंद्रीय महामंत्री और केंद्रीय कार्यालय प्रभारी देव चंद उत्तराखंडी की ओर से जारी पत्र में कहा गया था कि केंद्रीय अध्यक्ष के निर्देश और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णय के तहत नेगी को तत्काल प्रभाव से केंद्रीय उपाध्यक्ष समेत अन्य दायित्वों से मुक्त किया जाता है।
उस समय पार्टी की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हुई थीं। हालांकि, इसके बाद भी आशुतोष नेगी की राजनीतिक सक्रियता बनी रही। अब पार्टी ने उनके खिलाफ और कठोर कदम उठाते हुए छह महीने के निष्कासन का फैसला किया है।
पार्टी की ओर से कार्रवाई की वजह पार्टी विरोधी गतिविधियां बताई गई हैं। हालांकि, इन गतिविधियों से संबंधित विस्तृत आरोपों या घटनाओं का पूरा ब्योरा सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी बाकी है।
अध्यक्ष ने पहले दी थी नसीहत
निष्कासन की कार्रवाई से पहले उत्तराखंड क्रांति दल अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने आशुतोष नेगी को पार्टी लाइन के अनुरूप काम करने की नसीहत दी थी। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने को कहा गया था।
पार्टी नेतृत्व की इस सलाह के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया तो अंततः UKD ने उन्हें छह महीने के लिए पार्टी से बाहर करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उनकी प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई।
यह घटनाक्रम बताता है कि चुनाव से पहले UKD अपने संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई का असर पार्टी की चुनावी तैयारियों और स्थानीय स्तर पर उसके समीकरणों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
रायपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे नेगी
आशुतोष नेगी उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय और मुखर चेहरों में गिने जाते रहे हैं। वह अक्सर विभिन्न जन मुद्दों को लेकर सड़क पर आंदोलन और प्रदर्शन करते नजर आते रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली को अपेक्षाकृत आक्रामक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर मुखर माना जाता है।
यही वजह है कि रायपुर विधानसभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा थी। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड क्रांति दल से उनका निष्कासन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आशुतोष नेगी आगे क्या राजनीतिक रास्ता चुनते हैं। क्या वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेंगे, किसी अन्य राजनीतिक दल का रुख करेंगे या अपने स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां जारी रखेंगे—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आ सकते हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में UKD का अलग इतिहास
उत्तराखंड क्रांति दल यानी UKD का इतिहास उत्तराखंड राज्य आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है। पार्टी की स्थापना 25 जुलाई 1979 को हुई थी। अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन में UKD ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पार्टी का मूल राजनीतिक एजेंडा उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, राज्य के निवासियों के अधिकारों की रक्षा और स्थानीय संस्कृति एवं पहचान को मजबूत करने पर केंद्रित रहा है।
अलग राज्य बनने के बाद शुरुआती दौर में UKD को उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में देखा गया। विधानसभा चुनावों में पार्टी ने कुछ सीटों पर सफलता भी हासिल की। लेकिन समय के साथ संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व के बीच मतभेद और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जुड़े विवादों के कारण पार्टी का प्रभाव सीमित होता चला गया।
आज UKD उत्तराखंड की राजनीति में वह प्रभाव नहीं रखती जो राज्य आंदोलन के दौर और राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में दिखाई देता था। इसके बावजूद पार्टी की अपनी क्षेत्रीय पहचान और उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा राजनीतिक आधार बना हुआ है।
2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है यह कार्रवाई?
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसे समय में किसी प्रमुख स्थानीय नेता का पार्टी से बाहर होना निश्चित रूप से राजनीतिक चर्चा को जन्म देता है।
आशुतोष नेगी निष्कासन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह रायपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। यदि वह चुनाव मैदान में उतरते हैं तो UKD के लिए उनके खिलाफ किसी दूसरे चेहरे को तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, यदि नेगी किसी अन्य राजनीतिक विकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं तो रायपुर सीट पर मुकाबले के समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटनाक्रम का 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इतना जरूर है कि चुनाव से पहले UKD के भीतर यह कार्रवाई पार्टी संगठन और नेतृत्व की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
नेगी की अगली रणनीति पर नजर
पार्टी से निष्कासन के बाद अब सभी की निगाहें आशुतोष नेगी की अगली राजनीतिक चाल पर होंगी। उत्तराखंड की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब किसी क्षेत्रीय नेता ने पार्टी से अलग होने के बाद स्वतंत्र राजनीतिक मंच या किसी दूसरे दल के साथ अपना रास्ता बनाया है।
नेगी की सड़क पर सक्रिय राजनीति और जन मुद्दों पर मुखर छवि को देखते हुए उनके अगले कदम का स्थानीय राजनीति पर असर पड़ सकता है। खासकर रायपुर विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थकों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है।
फिलहाल उत्तराखंड क्रांति दल ने अपने फैसले से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह संगठनात्मक अनुशासन के मामले में सख्ती दिखाने के मूड में है। दूसरी ओर, आशुतोष नेगी के लिए यह निष्कासन एक नई राजनीतिक चुनौती के साथ-साथ अपने लिए अलग रास्ता तलाशने का अवसर भी बन सकता है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में अभी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में UKD और आशुतोष नेगी के बीच पैदा हुआ यह राजनीतिक टकराव आने वाले महीनों में किस दिशा में जाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
