लोक गायिका रिंकू राणाPhoto Source: Rinku Rana Social Media

खटीमा: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र की लोक गायिका रिंकू राणा का गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। रिंकू राणा थारू जनजाति की संस्कृति और लोकगीतों को नई पहचान दिलाने वाली उभरती लोक गायिका थी। यह हादसा नानकमत्ता क्षेत्र में उस समय हुआ जब वह होली मनाकर अपने मायके से वापस लौट रही थीं।

जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में उनकी भतीजी भी घायल हुई है, जिसका उपचार जारी है।

लोक गायिका रिंकू राणा की अचानक मौत से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे थारू जनजाति समाज और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।


होली मनाकर लौटते समय हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार नानकमत्ता के नौगजा क्षेत्र की निवासी रिंकू राणा होली का त्योहार मनाने अपने मायके बिचपुरी नानकमत्ता गई हुई थीं।

गुरुवार को वह अपनी भतीजी के साथ स्कूटी से घर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में ईंटों से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद लोक गायिका रिंकू राणा को मृत घोषित कर दिया


भतीजी का इलाज जारी

हादसे में घायल हुई उनकी भतीजी को गंभीर चोटें आई हैं और उसका उपचार अस्पताल में चल रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।


पोस्टमार्टम के लिए खटीमा उपजिला अस्पताल लाया गया शव

दुर्घटना के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए लोक गायिका रिंकू राणा के शव को खटीमा उपजिला अस्पताल लाया। यहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर-ट्रॉली के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।


थारू जनजाति की पहली लोक गायिकाओं में थी पहचान

रिंकू राणा को थारू जनजाति समाज की उभरती हुई लोक गायिका के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपने गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से थारू संस्कृति को मंचों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम किया था।

वह खटीमा के प्रसिद्ध लोक कलाकार बंटी राणा के सांस्कृतिक दल से जुड़ी हुई थीं और कई राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी थीं।

सांस्कृतिक दल में उनकी पहचान केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं बल्कि दल की प्रमुख कलाकारों में से एक के रूप में थी।


राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में देती थीं प्रस्तुति

रिंकू राणा थारू समाज के पारंपरिक लोकगीतों को आधुनिक मंचों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही थीं।

वह कई सरकारी और सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेकर थारू जनजाति की लोक परंपराओं को बढ़ावा देती थीं। उनके गीत और प्रस्तुतियां सीमांत क्षेत्र के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थीं।

सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि रिंकू राणा के निधन से थारू लोक संस्कृति को बड़ा नुकसान हुआ है।


परिवार में पति और नौ साल का बेटा

36 वर्षीय रिंकू राणा अपने पीछे एक छोटा परिवार छोड़ गई हैं।

उनके परिवार में

  • पति महेश सिंह
  • 9 वर्षीय बेटा निशांत सिंह

शामिल हैं।

उनकी ससुराल नानकमत्ता के पूरनगढ़ नौगला क्षेत्र में है। अचानक हुए इस हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।


कलाकारों और समाज में शोक

लोक गायिका रिंकू राणा के निधन की खबर फैलते ही थारू जनजाति समाज और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

उनके साथ काम करने वाले कलाकारों ने कहा कि वह बेहद प्रतिभाशाली और मेहनती कलाकार थीं, जो अपनी संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।

सांस्कृतिक दल के साथियों ने कहा कि रिंकू राणा की कमी को भर पाना बेहद मुश्किल होगा।


मुख्यमंत्री धामी और विधायक भुवन कापड़ी ने जताया शोक

लोक गायिका रिंकू राणा के आकस्मिक निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।

वहीं खटीमा विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा कि रिंकू राणा थारू समाज की संस्कृति को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही थीं।

नेताओं ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।


थारू संस्कृति को मंच देने वाली आवाज हुई खामोश

लोक गायिका रिंकू राणा उन कलाकारों में शामिल थीं जो सीमांत क्षेत्रों की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे थे

उनकी आवाज और प्रस्तुतियां थारू समाज की पहचान बनती जा रही थीं। लेकिन एक सड़क हादसे ने इस प्रतिभाशाली कलाकार की जिंदगी को अचानक खत्म कर दिया।

उनकी असमय मौत ने यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि सड़क सुरक्षा और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

By Bhaskar

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