उत्तराखंड में रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में राज्य सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में पूर्ण हो चुकी और प्रगतिरत रेल परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई, जिसमें यात्रियों की सुविधा, रेल सुरक्षा, क्षमता वृद्धि और भविष्य की जरूरतों को केंद्र में रखा गया। यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है, जब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए रेल कनेक्टिविटी न केवल विकास का माध्यम है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक बदलाव की मजबूत आधारशिला भी है।

गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुरादाबाद मंडल की डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट संकेत मिला कि राज्य सरकार और भारतीय रेलवे के बीच बेहतर समन्वय से उत्तराखंड का रेल मानचित्र तेजी से बदल रहा है।


रुड़की–देवबंद रेल लाइन: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई मजबूती

उत्तराखंड में रेल नेटवर्क के विकास की उपलब्धियों में रुड़की–देवबंद नई रेलवे लाइन एक अहम मील का पत्थर साबित हुई है। 27.45 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का सफलतापूर्वक कमीशनिंग कर दिया गया है। इस रेल लाइन के अंतर्गत बनहेड़ा खास और झबरेड़ा में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया गया है, जिससे स्थानीय आबादी को सीधी रेल सुविधा मिली है। यह लाइन न केवल उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को भी गति देगी।


रेल गति में वृद्धि: 110 से 160 किमी प्रति घंटा की दिशा में कदम

डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य के प्रमुख रेल मार्गों पर गति वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं। लक्सर–हरिद्वार रेल खंड को 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक उन्नत किया गया है, जबकि सहारनपुर–हरिद्वार खंड को भी 110 किमी प्रति घंटा करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही 130 किमी प्रति घंटा की गति के लिए डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है और दीर्घकालिक रूप से 160 किमी प्रति घंटा की गति के लिए मार्गों की पहचान की गई है। यह पहल उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


रेल सुरक्षा और यातायात सुधार: ROB, RUB और LHS से मिली राहत

राज्य में रेल सुरक्षा और यातायात सुधार के लिए आरओबी (रेल ओवर ब्रिज), आरयूबी (रेल अंडर ब्रिज) और एलएचएस (लेवल क्रॉसिंग सब-वे) परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। लक्सर, लंढौरा–धनौरा, रुड़की, चोड़ीआला और ऐथल जैसे व्यस्त स्थानों पर इन कार्यों के पूर्ण होने से न केवल दुर्घटनाओं की आशंका घटी है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से भी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने शेष लंबित कार्यों के लिए राज्य और रेलवे के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।


उत्तराखंड में यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में अमृत भारत स्टेशन योजना एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इसके तहत हर्रावाला, रुड़की और कोटद्वार रेलवे स्टेशनों का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। इन स्टेशनों पर नए स्टेशन भवन, एसी प्रतीक्षालय, फूड कोर्ट, दिव्यांगजन-अनुकूल ढांचा, प्लेटफार्म ऊंचाई का मानकीकरण, आधुनिक प्लेटफार्म शेड, चौड़े फुट ओवर ब्रिज और सुव्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह से नया स्वरूप देगा।


हरिद्वार–देहरादून रेल खंड: क्षमता वृद्धि पर विशेष फोकस

हरिद्वार–देहरादून रेल खंड उत्तराखंड के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रेल मार्गों में से एक है। मुख्यमंत्री ने इस खंड की क्षमता वृद्धि योजना की समीक्षा करते हुए बताया कि हर्रावाला में 24-कोच ट्रेनों के हैंडलिंग की सुविधा विकसित की जा रही है। इसमें लूप लाइन विस्तार और गति वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य शामिल हैं। खास बात यह है कि इस परियोजना के अंतर्गत वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से वन्यजीव न्यूनीकरण योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।


ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना: पहाड़ों में विकास की नई सुरंग

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उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश–कर्णप्रयाग नई रेलवे लाइन परियोजना राज्य के लिए गेम-चेंजर मानी जा रही है। 125.20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 12 स्टेशन, 35 पुल और 17 सुरंगें शामिल हैं। डीआरएम के अनुसार, प्रमुख सुरंगों का कार्य लगभग 94 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। यह परियोजना चारधाम क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


माल परिवहन को बढ़ावा: नए फ्रेट टर्मिनल और एलएमवी सुविधाएं

राज्य में औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए माल परिवहन ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है। पत्री में एकीकृत माल टर्मिनल सुविधा का विकास किया जा रहा है, वहीं पत्री और ज्वालापुर स्टेशनों को एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) लोडिंग के लिए उन्नत किया जा रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और स्थानीय उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।


लंबित मामलों पर मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इकबालपुर आरओबी, धनौरा आरओबी और लक्सर एलएचएस जैसे लंबित मामलों की समीक्षा की। इकबालपुर में पीडब्ल्यूडी के पास अप्रोच भूमि, धनौरा में रक्षा भूमि और लक्सर में उच्च जलस्तर से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।


टनकपुर स्टेशन और अर्द्धकुंभ की तैयारियां

मुख्यमंत्री ने टनकपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और आगामी अर्द्धकुंभ को लेकर विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया।


निष्कर्ष: उत्तराखंड के विकास की रफ्तार बढ़ाता रेल नेटवर्क

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में रेल अवसंरचना विकास राज्य के समग्र विकास का मजबूत आधार बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार और रेलवे के बीच समन्वय से न केवल परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। चाहे वह ऋषिकेश–कर्णप्रयाग जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना हो, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशनों का कायाकल्प हो या हरिद्वार–देहरादून खंड की क्षमता वृद्धि—हर पहल उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को विकास की नई पटरी पर ले जाने का संकेत देती है।

By Bhaskar

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