महिला आरक्षण बिल 2026Photo: ANI

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल 2026 से जुड़ा संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस समेत कई दलों पर “नारी अधिकारों को रोकने” का आरोप लगाया और इसे देश की आधी आबादी के साथ अन्याय बताया।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि संसद में जो कुछ हुआ, वह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि नारी सम्मान पर सीधा आघात था।


‘आधी आबादी का हक छीना गया’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करके विपक्षी दलों ने देश की आधी आबादी का अधिकार छीन लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपनी “संकीर्ण और परिवारवादी राजनीति” के चलते महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं।

उन्होंने कहा,
“ये परिवारवादी पार्टियां नहीं चाहतीं कि उनके परिवार से बाहर की कोई महिला राजनीति में आगे आए। संसद में जो हुआ, वह नारी के स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर चोट थी।”


संसद की घटना को बताया ‘नारी का अपमान’

प्रधानमंत्री ने संसद में विपक्ष के व्यवहार को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिल के विरोध के दौरान विपक्षी दलों द्वारा मेज थपथपाना केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह नारी के सम्मान के खिलाफ एक प्रतीकात्मक कदम था।

उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगी और आने वाले समय में इसका जवाब जरूर देंगी।


‘21वीं सदी की नारी सब देख रही है’

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने महिलाओं की बढ़ती जागरूकता और राजनीतिक समझ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की नारी हर घटना पर नजर रख रही है और वह यह समझ रही है कि कौन उसके अधिकारों के पक्ष में है और कौन उसके खिलाफ।

“21वीं सदी की नारी को कम आंकना बड़ी भूल है। वह सब देख रही है, समझ रही है और समय आने पर अपना निर्णय भी देगी,” प्रधानमंत्री ने कहा।


महिला आरक्षण को बताया ‘महायज्ञ’

प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण बिल 2026 को 21वीं सदी के भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसे “महायज्ञ” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन महिलाओं को नई उड़ान देने और राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास था।

उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने का एक पवित्र संकल्प था, जिसे विपक्ष ने बाधित किया।


कांग्रेस पर ‘एंटी रिफॉर्म’ होने का आरोप

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए उसे “एंटी रिफॉर्म पार्टी” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास हमेशा सुधारों का विरोध करने का रहा है और इसका खामियाजा देश की कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ा है।

उन्होंने कहा,
“लटकाना, भटकाना और अटकाना—यही कांग्रेस की कार्यशैली रही है। हर बड़े सुधार के रास्ते में कांग्रेस बाधा बनती रही है।”


परिसीमन पर विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रम

प्रधानमंत्री ने विपक्ष द्वारा परिसीमन (Delimitation) को लेकर फैलाए जा रहे डर को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व या भागीदारी में कोई कमी नहीं आएगी।

उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।


‘100% नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही संसद में बिल पास कराने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिला, लेकिन उन्हें देश की महिलाओं का पूरा समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने कहा,
“हमें 66 प्रतिशत वोट भले ही नहीं मिले हों, लेकिन मुझे विश्वास है कि देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।”


आगे भी जारी रहेगा प्रयास

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल 2026 के लिए सरकार का प्रयास रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार हर बाधा को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस मुद्दे पर फिर प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने देश की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और संकल्प जारी रहेगा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।


राजनीतिक असर और आगे की राह

महिला आरक्षण बिल 2026 को लेकर संसद में हुई इस राजनीतिक टकराव का असर आने वाले समय में देश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा बना रहा है, वहीं विपक्ष अपनी रणनीति के तहत इसे अलग नजरिए से पेश कर रहा है।


महिला आरक्षण बिल 2026 पर बनी यह स्थिति केवल एक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की राजनीति और सामाजिक सोच के बीच टकराव का प्रतीक बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।

अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है और क्या महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकार दिलाने की दिशा में कोई नया रास्ता निकल पाता है।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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