मुख्यमंत्री ममता बनर्जीPhoto: PTI

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश करार देते हुए AIMIM, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF), कांग्रेस और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

शुक्रवार को दक्षिण दिनाजपुर जिले के हरिरामपुर में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मालदा के मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक घेरकर रखने की घटना लोकतंत्र पर हमला है और इसके पीछे राजनीतिक ताकतें सक्रिय हैं।


CID की कार्रवाई: मुख्य आरोपी गिरफ्तार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि इस मामले में राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अनुसार, आरोपी घटना के बाद भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एजेंसियों की सतर्कता से उसे दबोच लिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी हिंसक साजिश की योजना पहले से तैयार की गई थी और इसमें कई राजनीतिक तत्व शामिल थे।


AIMIM और ISF पर सीधा हमला

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल बंगाल में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कथित आरोपी को AIMIM से जोड़कर बंगाल में लाया, ताकि चुनावी माहौल को प्रभावित किया जा सके। साथ ही ISF पर भी इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि AIMIM ने पहले बिहार विधानसभा चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण कर बीजेपी को फायदा पहुंचाया था और अब बंगाल में भी वही रणनीति अपनाई जा रही है।


कांग्रेस और बीजेपी पर ‘उकसाने’ का आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस और बीजेपी को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दोनों दलों ने इस घटना को भड़काने में भूमिका निभाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राज्य में कानून-व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाहरी तत्वों को बंगाल में लाकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।


मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

रैली के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में असंतोष है।

उन्होंने पूछा कि जब 2024 के लोकसभा चुनाव उसी मतदाता सूची के आधार पर कराए गए थे, तो अब विधानसभा चुनाव के लिए नई सूची की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर मतदाता सूची में घुसपैठियों के नाम थे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हीं वोटों से चुनाव जीत चुके हैं—ऐसे में उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए।


CRPF और धन के इस्तेमाल पर गंभीर आरोप

ममता बनर्जी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान CRPF के वाहनों का इस्तेमाल पैसे के लेन-देन के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनके पास इन गतिविधियों से जुड़े सबूत मौजूद हैं और उचित समय आने पर वे इसका खुलासा करेंगी।

हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक केंद्र या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


अमित शाह और बीजेपी पर तंज

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक रहने की योजना पर भी तंज कसा।

उन्होंने कहा कि अमित शाह चाहे 365 दिन बंगाल में रहें, इससे चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की नामांकन रैली के दौरान अपने कालीघाट स्थित आवास के पास बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा हंगामा किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी से शिष्टाचार की उम्मीद करना बेकार है।


राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनाव

बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है।

इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) को समर्थन देने से राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।

कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की सभी सीटों पर टीएमसी और बीजेपी दोनों को चुनौती देने का ऐलान किया है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।


‘मालदा घेराव मामला’ बना चुनावी मुद्दा

मालदा घेराव मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्रीय विषय बन चुका है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों ने जहां विपक्ष को घेरा है, वहीं विपक्षी दल भी पलटवार की तैयारी में हैं। ऐसे में आगामी चुनावों में यह मुद्दा किस तरह असर डालता है, यह देखने वाली बात होगी।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और चुनावी नतीजों पर टिकी हैं।

By Bhaskar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *