देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल कर सरकार ने प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। वार्षिक स्थानांतरण सत्र-2026 के तहत विद्यालयी शिक्षा विभाग में व्यापक स्तर पर अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार माध्यमिक शिक्षा, प्रारंभिक शिक्षा और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नए अधिकारियों की तैनाती की गई है।
सरकार का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपने से विभागीय कार्यों में तेजी आएगी, प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा और विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। शिक्षा विभाग में हुआ यह फेरबदल आगामी शैक्षणिक योजनाओं, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यालयों की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को मिला नया नेतृत्व
उत्तराखंड शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार विनोद प्रसाद सेमल्टी को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। विभागीय स्तर पर उन्हें एक अनुभवी अधिकारी माना जाता है और शिक्षा प्रशासन में उनका लंबा अनुभव रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों, परीक्षा व्यवस्था, विद्यालयों की निगरानी तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। साथ ही विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रारंभिक शिक्षा और समग्र शिक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी केएस रावत को
शासन ने केएस रावत को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ प्रभारी निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा उन्हें अपर परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा का दायित्व भी दिया गया है।
समग्र शिक्षा अभियान राज्य में विद्यालयी शिक्षा के विकास का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, शिक्षकों के प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, समावेशी शिक्षा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर कार्य किया जाता है। ऐसे में दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां एक ही अधिकारी को सौंपे जाने से विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ गई है।
विद्यालयी शिक्षा परिषद को मिला नया प्रभारी सचिव
शासन ने विनोद कुमार ढौंडियाल को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर का प्रभारी सचिव नियुक्त किया है। विद्यालयी शिक्षा परिषद राज्य में बोर्ड परीक्षाओं के संचालन, परीक्षा परिणाम, पाठ्यक्रम से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए सचिव के कार्यभार संभालने के बाद परिषद की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिक व्यवस्थित होगी तथा परीक्षा प्रबंधन को लेकर भी नई कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।
जिला स्तर पर भी बदली गई जिम्मेदारियां
शिक्षा विभाग के इस प्रशासनिक फेरबदल का प्रभाव केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
गोविन्द राम जायसवाल को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) के साथ-साथ प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। राजधानी जिले में शिक्षा व्यवस्था के प्रभावी संचालन की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी।
इसी प्रकार रणजीत सिंह नेगी को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), नैनीताल नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल तथा लोक सेवा अधिकरण, नैनीताल में नोडल अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
राज्य सरकार लगातार विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। डिजिटल शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियां, विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों का क्षमता विकास और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई तैनाती को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर बेहतर नेतृत्व मिलने से योजनाओं की निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही की व्यवस्था और मजबूत होने की संभावना है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जताई उम्मीद
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने से शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों में और अधिक गति आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पदों पर नियुक्ति करना नहीं, बल्कि ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जिससे विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बन सके।
मंत्री के अनुसार इन नियुक्तियों से विभागीय समन्वय मजबूत होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारी अपने अनुभव और क्षमता के बल पर शिक्षा विभाग की योजनाओं को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएंगे।
नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहेगा फोकस
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल लर्निंग, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यालयों के आधारभूत ढांचे में सुधार और सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति इन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों का विश्वास मजबूत करने और विद्यार्थियों को आधुनिक एवं प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक बदलाव कर रही है। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

