उत्तराखंड वन विभागFile Photo

देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से चर्चाओं में चल रहे प्रशासनिक फेरबदल को अब जल्द अंतिम रूप मिल सकता है। प्रदेश में वनाग्नि सीजन अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है, लेकिन शासन स्तर पर अधिकारियों के तबादलों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO), कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (CF) और सहायक वन संरक्षक (ACF) स्तर के अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर व्यापक तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। अब सभी की निगाहें 12 जून को प्रस्तावित सिविल सर्विस बोर्ड (CSB) की बैठक पर टिकी हैं, जहां इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

वन विभाग के प्रशासनिक ढांचे में अहम माने जाते हैं DFO

उत्तराखंड वन विभाग की कार्यप्रणाली में डीएफओ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी वन प्रभाग की सुरक्षा, संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से डीएफओ के पास होती है। वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, वनाग्नि नियंत्रण, अवैध कटान की रोकथाम और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य इन्हीं अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित होते हैं।

यही कारण है कि डीएफओ स्तर पर होने वाले तबादले केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होते, बल्कि इनका असर सीधे तौर पर वन प्रबंधन और विभागीय कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। इस बार शासन ने वनाग्नि सीजन के दौरान विभिन्न प्रभागों में अधिकारियों के प्रदर्शन, प्रशासनिक आवश्यकताओं और क्षेत्रीय जरूरतों का मूल्यांकन करने के बाद तबादला प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी अहम बैठक

सूत्रों के मुताबिक, 12 जून को होने वाली सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद वर्धन करेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव वन, प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

बैठक में विभिन्न वन प्रभागों में तैनात अधिकारियों की कार्यप्रणाली, अनुभव और वर्तमान प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि बैठक के बाद तबादलों की सूची को अंतिम मंजूरी मिल सकती है।

कई महत्वपूर्ण वन प्रभागों में बदलाव की संभावना

जानकारी के अनुसार, राज्य के कई महत्वपूर्ण वन प्रभाग इस प्रस्तावित फेरबदल के दायरे में आ सकते हैं। देहरादून, मसूरी, चकराता और टिहरी वन प्रभागों में नए अधिकारियों की तैनाती की संभावना जताई जा रही है।

वहीं कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में भी प्रशासनिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय जानकारों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां देकर प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा सकता है।

शासन का मानना है कि समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करता है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करता है।

तराई क्षेत्र के वन प्रभागों पर भी विशेष नजर

उत्तराखंड के तराई क्षेत्र को वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। तराई पश्चिम, तराई पूर्वी और तराई केंद्रीय वन प्रभाग प्रदेश के उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां वन संरक्षण के साथ-साथ वन राजस्व और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य संचालित होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव हो सकता है। इसके अलावा रामनगर वन प्रभाग और टोंस वन प्रभाग जैसे संवेदनशील और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी नई नियुक्तियों की चर्चा तेज है।

राजाजी टाइगर रिजर्व में भी हो सकता है बड़ा बदलाव

प्रस्तावित प्रशासनिक फेरबदल के बीच सबसे अधिक चर्चा राजाजी टाइगर रिजर्व को लेकर हो रही है। प्रदेश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में शामिल राजाजी टाइगर रिजर्व में निदेशक स्तर पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

यदि ऐसा होता है तो यह उत्तराखंड वन विभाग के हालिया वर्षों के सबसे बड़े प्रशासनिक परिवर्तनों में से एक माना जाएगा। राजाजी टाइगर रिजर्व जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान रखता है। ऐसे में यहां नेतृत्व परिवर्तन का सीधा असर संरक्षण योजनाओं और प्रबंधन रणनीतियों पर पड़ सकता है।

ACF स्तर पर भी जल्द जारी हो सकती है सूची

केवल डीएफओ और सीएफ स्तर ही नहीं, बल्कि सहायक वन संरक्षक (ACF) स्तर के अधिकारियों के तबादलों की तैयारी भी लगभग पूरी बताई जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एसीएफ अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है और जल्द ही आदेश जारी किए जा सकते हैं।

इस कदम से विभाग के मध्य स्तरीय प्रशासनिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर कार्य निष्पादन क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

रेंज अधिकारियों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

उत्तराखंड वन विभाग के भीतर एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव चर्चा में है। वरिष्ठता के आधार पर कुछ अनुभवी रेंज अधिकारियों को प्रभारी उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) की जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया जा रहा है।

हालांकि इस संबंध में फाइल अभी शासन स्तर पर लंबित बताई जा रही है, लेकिन यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो कई अधिकारियों को पहली बार उच्च प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा। इससे विभाग में पदोन्नति और नेतृत्व विकास की प्रक्रिया को भी गति मिल सकती है।

12 जून की बैठक पर टिकी विभाग की नजर

फिलहाल पूरे वन विभाग की नजर 12 जून को होने वाली सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए गए निर्णय न केवल अधिकारियों की जिम्मेदारियों को बदलेंगे, बल्कि प्रदेश के वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी नई दिशा देंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध और संतुलित प्रशासनिक फेरबदल से विभागीय कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रदेश के वन संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। ऐसे में आगामी बैठक उत्तराखंड वन विभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

By Bhaskar

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