हरिद्वार/ Haridwar Dowry Harassment: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से दहेज उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर समाज में दहेज जैसी कुप्रथा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कनखल थाना क्षेत्र की रहने वाली एक विवाहिता ने अपने पति, सास और ससुर पर शादी के कुछ ही महीनों बाद 35 लाख रुपये नकद और एक लग्जरी कार की मांग करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि मांग पूरी न होने पर उसके साथ लगातार मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकियां दी गईं। इतना ही नहीं, कथित तौर पर उसे घर से निकालते हुए तब तक वापस न आने की बात कही गई, जब तक वह दहेज की मांग पूरी न कर दे।
Haridwar Dowry Harassment पीड़िता की शिकायत पर कनखल थाना पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शादी में सामर्थ्य से बढ़कर किया खर्च, फिर भी नहीं थमी दहेज की मांग
पीड़िता निशी गर्ग, निवासी ब्रह्म विहार, कनखल ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनका विवाह नवंबर 2025 में ब्रह्म विहार निवासी शुभम बिंदल से हुआ था। परिवार ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार शादी में लाखों रुपये खर्च किए। सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और अन्य घरेलू सामान भी दहेज के रूप में दिए गए।
महिला का आरोप है कि विवाह के शुरुआती कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे पति, सास और ससुर का व्यवहार बदलने लगा। इसके बाद कथित तौर पर 35 लाख रुपये नकद और एक लग्जरी कार की मांग की जाने लगी।
पीड़िता का कहना है कि जब उसने और उसके परिवार ने इतनी बड़ी मांग पूरी करने में असमर्थता जताई, तब उसके साथ दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया।
’35 लाख और कार लाओ’, नहीं तो घर में जगह नहीं
शिकायत के अनुसार, ससुराल पक्ष लगातार विवाहिता पर अपने मायके से पैसे और कार लाने का दबाव बनाता रहा। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे बार-बार अपमानित किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि उसके माता-पिता ने शादी के लिए कर्ज तक लिया था। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुईं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे 35 लाख रुपये और एक लग्जरी कार की व्यवस्था कर सकें।
पीड़िता का कहना है कि जब उसने मांग पूरी करने में असमर्थता जताई तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे यह कहकर प्रताड़ित किया गया कि वह दहेज लेकर ही वापस लौटे।
मारपीट कर घर से निकाला, जान से मारने की धमकी का भी आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि 3 अप्रैल को ससुराल पक्ष ने उसके साथ मारपीट की और दोबारा दहेज की मांग दोहराई। इसके बाद उसे कथित रूप से घर से बाहर निकाल दिया गया।
इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 20 मई को कनखल स्थित गंगा घाट पर पति ने दोबारा उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़िता का कहना है कि लगातार हो रही प्रताड़ना के बाद उसके पास पुलिस की शरण लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
Haridwar Dowry Harassment मामले में कनखल थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर पति शुभम बिंदल, सास सुमन बिंदल और ससुर यशपाल बिंदल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
कनखल थाना के वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SSI) अनुज सिंह ने बताया कि महिला की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े साक्ष्य, बयान और अन्य दस्तावेज जुटा रही है।
दहेज प्रथा आज भी समाज के लिए बड़ी चुनौती
Haridwar Dowry Harassment मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता की ओर भी इशारा करता है, जहां शिक्षा, आधुनिकता और कानूनी सख्ती के बावजूद दहेज की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।
देश में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दहेज उत्पीड़न एवं महिलाओं के साथ क्रूरता के मामलों में कठोर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और मानसिकता में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।
हर शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी
दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है ताकि यदि आरोप सही हों तो पीड़िता को न्याय मिल सके और यदि किसी पक्ष के खिलाफ गलत आरोप लगाए गए हों तो सच्चाई भी सामने आ सके।
इस मामले में भी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो पाएंगी।
एक सामाजिक संदेश
Haridwar Dowry Harassment का यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई आज भी अनेक परिवारों की खुशियों को तबाह कर रही है। विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को आर्थिक लेन-देन का माध्यम बनाने की सोच न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
जरूरत इस बात की है कि समाज सामूहिक रूप से दहेज प्रथा का विरोध करे और बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और समान अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़े। साथ ही, ऐसे मामलों में कानून पर भरोसा रखते हुए निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाए।

