गुजरात UCC बिलFile Photo

गांधीनगर: विधानसभा ने लंबी और तीखी बहस के बाद गुजरात UCC बिल विधेयक को मंजूरी दे दी है। करीब सात घंटे तक चली चर्चा के बाद यह बिल ध्वनि मत से पारित किया गया, जिससे राज्य में व्यक्तिगत कानूनों को एक समान ढांचे में लाने का रास्ता साफ हो गया है।

इस विधेयक के पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। इससे पहले फरवरी 2024 में उत्तराखंड इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य बना था।


क्या है गुजरात UCC बिल?

गुजरात UCC बिल का उद्देश्य धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।

मुख्यमंत्री Bhupendra Patel ने विधानसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि यह कानून राज्य के नागरिकों को समान न्याय दिलाने और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा, हालांकि अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ पारंपरिक समूहों को इससे बाहर रखा गया है, जिनके अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं।


बिल के प्रमुख प्रावधान

इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकते हैं:

1. शादी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

अब राज्य में विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।

  • समय पर रजिस्ट्रेशन न कराने पर 10,000 रुपये तक जुर्माना
  • या 3 महीने तक की सजा का प्रावधान

2. लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण

लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी रूप से मान्यता देते हुए उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देना है।

3. जबरन शादी पर सख्त सजा

यदि कोई शादी दबाव, धोखाधड़ी या जबरन कराई जाती है, तो दोषी को 7 साल तक की सजा हो सकती है।

4. बहुविवाह पर रोक

इस बिल के तहत बहुविवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है और इसके उल्लंघन पर भी 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।

5. समान उत्तराधिकार अधिकार

बेटियों और बेटों को समान संपत्ति अधिकार देने का प्रावधान किया गया है, जो लैंगिक समानता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


राज्य के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू

इस कानून की एक खास बात यह है कि यह केवल राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि राज्य से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू होगा।

“गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026” के तहत यह प्रावधान इसे व्यापक और प्रभावी बनाता है, जिससे राज्य की कानूनी व्यवस्था का दायरा बढ़ जाता है।


बीजेपी ने बताया ऐतिहासिक सुधार

सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने इस विधेयक को सामाजिक सुधार और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह कानून नागरिकों की आकांक्षाओं और समान न्याय की अपेक्षाओं को पूरा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल किसी की स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं, बल्कि सभी को समान अधिकार देने के लिए है।


विपक्ष का कड़ा विरोध

वहीं, विपक्षी दलों ने इस बिल का जोरदार विरोध किया। Indian National Congress (कांग्रेस) के वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में यह बिल पेश किया है। उन्होंने मांग की कि इसे विधानसभा की स्थायी समिति को भेजा जाए।

कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने कहा कि यह विधेयक संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

इसी तरह, विधायक इमरान खेड़ावाला ने इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप बताया और कहा कि निकाह और उत्तराधिकार से जुड़े नियम धार्मिक आदेशों पर आधारित हैं, जिनमें बदलाव स्वीकार्य नहीं है।


आम आदमी पार्टी ने भी जताई आपत्ति

Aam Aadmi Party (AAP) ने भी इस विधेयक पर आपत्ति जताते हुए इसे व्यापक चर्चा के लिए समिति के पास भेजने की मांग की थी, जिसे सदन ने खारिज कर दिया।


देश में UCC पर बढ़ती बहस

गुजरात में UCC बिल के पारित होने के बाद देशभर में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है, जहां एक पक्ष इसे समानता और न्याय का माध्यम मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के रूप में देखता है।


गुजरात विधानसभा से UCC बिल का पारित होना राज्य की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

जहां सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बता रहा है।

अब इस कानून के लागू होने और इसके प्रभाव को लेकर पूरे देश की नजरें गुजरात पर टिकी हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि गुजरात UCC बिल सामाजिक संतुलन और न्याय के बीच किस तरह का प्रभाव डालता है।

By Bhaskar

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