नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को हुए दिल्ली प्रदर्शन हिंसा मामले में के बाद दिल्ली पुलिस ने व्यापक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं और शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में दंगा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, पुलिसकर्मियों पर हमला, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना, निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) का उल्लंघन और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं।
पुलिस के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक हिंसक हो गए, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में लगे पुलिस बल को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। घटना में वरिष्ठ अधिकारियों सहित 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस ने अब तक लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच जारी है।
अलग-अलग घटनाओं पर दर्ज हुईं कई एफआईआर
दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम का कानूनी विश्लेषण करने के बाद अलग-अलग शिकायतों और घटनाओं के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। प्रत्येक मामले की जांच उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
एफआईआर में दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने और हिंसा फैलाने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़े हालात
पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली क्षेत्र में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह निर्धारित सुरक्षा व्यवस्थाओं को पार करने का प्रयास करता दिखाई दिया। पुलिस ने दावा किया कि कई बार समझाने और चेतावनी देने के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तथा लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया गया।
स्थिति उस समय अधिक तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए और कई स्थानों पर हिंसक झड़पें देखने को मिलीं।
पथराव और बैरिकेड तोड़ने के आरोप
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। कई स्थानों पर पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई तथा सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। घटनास्थल से मिले वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की पहचान की जा रही है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल
इस हिंसक घटनाक्रम में 118 से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। घायलों में दिल्ली पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक घायल अधिकारियों में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा कई महिला पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं।
घायल पुलिसकर्मियों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराया गया है, जबकि कुछ का मेडिकल परीक्षण (MLC) अभी भी जारी है।
करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना
पुलिस ने यह भी स्वीकार किया है कि प्रदर्शन के दौरान हुई धक्का-मुक्की और झड़पों में लगभग 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं। सभी घायलों की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है।
कानून-व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े प्रदर्शनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों—दोनों की जिम्मेदारी होती है कि स्थिति को नियंत्रण में रखा जाए, ताकि किसी भी पक्ष को अनावश्यक नुकसान न उठाना पड़े।
सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान
हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है। पुलिस के अनुसार, लगभग 15 से 20 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा अन्य सरकारी संपत्तियों में भी तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
नुकसान का आकलन संबंधित विभागों द्वारा किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर उनसे कानूनी प्रक्रिया के तहत क्षतिपूर्ति भी कराई जा सकती है।
70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, जांच जारी
दिल्ली प्रदर्शन हिंसा घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ की जा रही है और उनकी भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि हिंसा, दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य संबंधित अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अन्य लागू कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की भी होगी जांच
दिल्ली प्रदर्शन हिंसा में जांच एजेंसियां घटनास्थल पर मौजूद सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, पुलिस बॉडी कैमरा वीडियो, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसारित क्लिप्स का विश्लेषण कर रही हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित होगी और किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही की जाएगी।
दिल्ली पुलिस का बयान
दिल्ली प्रदर्शन हिंसा मामले में पुलिस ने कहा है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सरकारी कर्मचारियों पर हमला किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पुलिस ने यह भी कहा कि जिन लोगों की भूमिका हिंसक गतिविधियों में सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूरे घटनाक्रम की जांच निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
