उत्तराखंड SIR अभियानPhoto: Bugyal News

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध बनाने के लिए चलाया जा रहा उत्तराखंड SIR अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। राज्यभर में घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित करने और उसे डिजिटल माध्यम से दर्ज करने का कार्य जारी है, लेकिन कई जिलों में अभियान की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने से निर्वाचन विभाग की चिंता बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कम प्रगति वाले जिलों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है।

राज्य में 8 जून से प्रारंभ हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को प्रत्येक मतदाता तक पहुंचकर गणना फॉर्म वितरित करने और प्राप्त जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि अभियान शुरू होने के पांच दिन बाद भी कई बड़े जिले निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं, जिससे समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

पांच दिनों में 51.84 प्रतिशत मतदाताओं तक पहुंचा अभियान

निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में कुल 79 लाख 60 हजार 762 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 12 जून की शाम 4 बजे तक 41 लाख 26 हजार 739 मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। यह कुल मतदाताओं का 51.84 प्रतिशत है।

निर्वाचन विभाग ने 18 जून तक सभी मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में शेष बचे लगभग 48 प्रतिशत मतदाताओं तक अगले कुछ दिनों में पहुंचना विभाग के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

देहरादून की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक

राजधानी जिला देहरादून की प्रगति राज्य के औसत से काफी कम दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक केवल 39.18 प्रतिशत मतदाताओं तक ही गणना फॉर्म पहुंच पाए हैं। यह राज्य के सभी प्रमुख जिलों में सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है।

देहरादून के अलावा उधमसिंह नगर, नैनीताल, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे जिले भी 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार नहीं कर सके हैं। इन जिलों में मतदाताओं की बड़ी संख्या और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अभियान की गति प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में इन जिलों में अभियान की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है।

पिथौरागढ़ और चंपावत बने मिसाल

जहां कुछ जिले लक्ष्य से पीछे हैं, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों के कुछ जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिथौरागढ़ राज्य में सबसे आगे चल रहा है, जहां 81.52 प्रतिशत मतदाताओं तक गणना फॉर्म पहुंचाया जा चुका है। इसके बाद चंपावत में 72.75 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल में 67.65 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

इन जिलों की उपलब्धि को निर्वाचन विभाग एक मॉडल के रूप में देख रहा है और अन्य जिलों को भी इसी प्रकार कार्य गति बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

जिलावार प्रगति ने बढ़ाई असमानता की तस्वीर

जिलों के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के भीतर अभियान की प्रगति में काफी अंतर दिखाई दे रहा है। हरिद्वार में 51.97 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 59.81 प्रतिशत, उत्तरकाशी में 58.49 प्रतिशत और पौड़ी गढ़वाल में 56.57 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

दूसरी ओर नैनीताल में 49.85 प्रतिशत, उधमसिंह नगर में 44.69 प्रतिशत, चमोली में 43.97 प्रतिशत तथा रुद्रप्रयाग में 47.07 प्रतिशत मतदाताओं तक ही गणना फॉर्म पहुंच पाए हैं। यह अंतर बताता है कि कुछ क्षेत्रों में प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियां अपेक्षाकृत अधिक हैं।

डिजिटलाइजेशन और रिपोर्टिंग पर भी विशेष जोर

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि अभियान के दौरान केवल गणना फॉर्म वितरित करना ही नहीं बल्कि उन्हें वापस प्राप्त कर डिजिटल रूप से दर्ज करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सभी बीएलओ को बीएलओ एप के माध्यम से प्रतिदिन अपनी प्रगति रिपोर्ट दर्ज करनी होती है।

उन्होंने कहा कि अभियान की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब प्रत्येक मतदाता की जानकारी सही तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड में अपडेट हो जाए। इसलिए फील्ड स्तर पर कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है।

कम प्रगति वाले जिलों की हो रही विशेष मॉनिटरिंग

निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों में प्रगति अपेक्षा से कम है, वहां लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। देहरादून, उधमसिंह नगर और अन्य पिछड़ रहे जिलों में अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

विभाग ने उन क्षेत्रों की भी पहचान की है जहां इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या सामने आ रही है। ऐसे क्षेत्रों में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त मैनपावर तैनात की जा रही है ताकि बीएलओ को डिजिटल डेटा अपलोड करने में कठिनाई न हो।

मैदानी जिलों में अधिक आबादी बनी चुनौती

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार मैदानी जिलों में मतदाताओं की संख्या पर्वतीय जिलों की तुलना में कहीं अधिक है। एक-एक बीएलओ को हजारों मतदाताओं तक पहुंचना पड़ रहा है, जिसके कारण कार्य की गति प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि आबादी का घनत्व अधिक होने से घर-घर संपर्क स्थापित करने में अधिक समय लग रहा है। यही कारण है कि देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे जिलों में अपेक्षाकृत धीमी प्रगति देखने को मिल रही है। हालांकि विभाग को विश्वास है कि अतिरिक्त निगरानी और संसाधनों की मदद से लक्ष्य समय पर हासिल कर लिया जाएगा।

समयसीमा से पहले लक्ष्य हासिल करने पर फोकस

निर्वाचन विभाग का पूरा जोर अब आगामी दिनों में अभियान की रफ्तार बढ़ाने पर है। 18 जून तक शत-प्रतिशत गणना फॉर्म वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, बीएलओ और तकनीकी टीमों को समन्वित तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य में आगामी चुनावी प्रक्रियाओं को देखते हुए उत्तराखंड SIR अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान चुनाव आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि उत्तराखंड निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने लक्ष्य को कितनी प्रभावी तरीके से हासिल कर पाता है।

By Bhaskar

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