देहरादून/नई दिल्ली। Central Election Commission: देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े और दूरगामी बदलाव की दिशा में केंद्रीय चुनाव आयोग एक अहम पहल करने जा रहा है। 24 फरवरी को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय चुनाव आयोग की एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें करीब 25 वर्षों बाद सभी राज्यों के राज्य निर्वाचन आयोग भी औपचारिक रूप से शामिल होंगे।
इस बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), राज्य निर्वाचन आयुक्त, साथ ही चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। बैठक की अध्यक्षता देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे।
1999 के बाद पहली बार एक मंच पर सभी निर्वाचन संस्थाएं
Central Election Commission और राज्यों के निर्वाचन आयोगों के बीच इस स्तर की बैठक इससे पहले वर्ष 1999 में हुई थी। उसके बाद पहली बार ऐसा अवसर आ रहा है जब लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने वाले केंद्रीय चुनाव आयोग तथा नगर निकाय और पंचायत चुनाव कराने वाले राज्य निर्वाचन आयोग एक साझा मंच पर चुनावी सुधारों पर चर्चा करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बैठक देश की चुनावी प्रक्रिया को एकरूप, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
बैठक के दो प्रमुख एजेंडे
केंद्रीय चुनाव आयोग की इस बैठक में मुख्य रूप से दो बड़े और रणनीतिक मुद्दों पर फोकस किया जाएगा—
1. कॉमन वोटर रोल (Common Voter Roll)
बैठक का सबसे अहम मुद्दा कॉमन वोटर रोल को लेकर है। वर्तमान व्यवस्था में—
- लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए अलग मतदाता सूची
- नगर निकाय और पंचायत चुनावों के लिए अलग मतदाता सूची
तैयार की जाती है, जिससे न केवल प्रशासनिक बोझ बढ़ता है बल्कि मतदाता नाम जुड़ने-कटने, डुप्लीकेसी और विसंगतियों की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
कॉमन वोटर रोल लागू होने की स्थिति में—
- एक ही एकीकृत मतदाता सूची से सभी चुनाव संपन्न कराए जा सकेंगे
- मतदाता भ्रम की स्थिति से बचेंगे
- संसाधनों, समय और लागत की बचत होगी
- चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी
हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर राज्यों की सहमति बेहद जरूरी होगी, जिस पर इस बैठक में गहन मंथन किया जाएगा।
2. EVM शेयरिंग पर विचार
बैठक का दूसरा बड़ा एजेंडा EVM Sharing को लेकर है। वर्तमान में—
- Central Election Commission की EVM का उपयोग केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों में
- जबकि नगर निकाय और पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर या अलग EVM का इस्तेमाल
किया जाता है।
अब प्रस्ताव है कि राज्यों में उपलब्ध EVM का उपयोग—
- लोकसभा
- विधानसभा
- नगर निकाय
- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
सभी में किया जा सके। इससे—
- EVM की विश्वसनीयता और उपयोगिता बढ़ेगी
- चुनाव प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी
- बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिक सुधार संभव होगा
हालांकि, इस पर अंतिम फैसला राज्यों की सहमति, तकनीकी व्यवहार्यता और कानूनी प्रावधानों के आधार पर लिया जाएगा।
ECI Net डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी होगा प्रेजेंटेशन
बैठक के दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग हाल ही में लॉन्च किए गए ECI Net डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विस्तृत जानकारी देगा।
ECI Net प्लेटफॉर्म के जरिए—
- मतदाता प्रबंधन
- चुनावी डेटा का रियल-टाइम विश्लेषण
- EVM और VVPAT से जुड़ी जानकारी
- चुनावी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण
किया जा सकेगा। आयोग इस प्लेटफॉर्म को राज्यों के साथ साझा कर उनके सुझाव भी लेगा, ताकि भविष्य में इसे और प्रभावी बनाया जा सके।
त्रिस्तरीय पंचायत और निकाय चुनावों में EVM का रास्ता साफ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बैठक में सहमति बनती है तो—
- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
- नगर निकाय चुनाव
भी भविष्य में EVM के जरिए कराए जाने का रास्ता खुल सकता है। यह कदम चुनावी इतिहास में एक बड़ा सुधार माना जाएगा।
उत्तराखंड समेत राज्यों ने शुरू की तैयारी
Central Election Commission की ओर से भेजा गया आधिकारिक पत्र 6 फरवरी को उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हो चुका है। इसके बाद से—
- उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय उत्तराखंड
ने बैठक में भागीदारी के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
चुनावी सुधारों की दिशा में अहम पहल
कुल मिलाकर, 24 फरवरी को Central Election Commission की होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की चुनावी प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। केंद्रीय चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि—
- केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बने
- चुनावी प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित हों
- मतदाता का भरोसा और मजबूत हो
अब सभी की नजरें इस ऐतिहासिक बैठक पर टिकी हैं, जहां लिए गए फैसले आने वाले वर्षों में भारत की चुनावी व्यवस्था की दिशा और दशा तय कर सकते हैं।

