जोजिला टनलPhoto: ANI

जोजिला/श्रीनगर: भारत के रणनीतिक और बुनियादी ढांचा विकास के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बन रही बहुप्रतीक्षित जोजिला टनल ने अपने निर्माण के सबसे चुनौतीपूर्ण चरण को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा सुरंग का अंतिम ब्लास्ट यानी ‘ब्रेकथ्रू’ किए जाने के साथ ही इस मेगा परियोजना की खुदाई का कार्य लगभग पूरा हो गया है।

इस उपलब्धि को केवल एक इंजीनियरिंग सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाई कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सुरंग के पूरी तरह तैयार होने के बाद लद्दाख पहली बार पूरे वर्ष देश के बाकी हिस्सों से सड़क मार्ग के जरिए निर्बाध रूप से जुड़ा रहेगा।

हिमालय की कठिन चुनौतियों के बीच तैयार हुई इंजीनियरिंग की मिसाल

हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कर रही है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

हिमालयी क्षेत्र में निर्माण कार्य हमेशा से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। भारी बर्फबारी, हिमस्खलन, भूस्खलन और अत्यधिक ठंड जैसे कारकों के बीच इस परियोजना को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। इसके बावजूद इंजीनियरों और श्रमिकों ने लगातार काम जारी रखा और आज यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।

क्यों खास है जोजिला टनल?

जोजिला टनल समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है। इसकी कुल लंबाई 30 किलोमीटर से अधिक है, जिससे यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब रोड टनलों में शामिल हो गई है।

यह सुरंग श्रीनगर-करगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर क्षेत्र को द्रास, करगिल और लेह से जोड़ेगी। वर्तमान में जोजिला दर्रा सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का सड़क संपर्क प्रभावित होता है।

सुरंग बनने के बाद यह समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी और लोगों को पूरे वर्ष सुरक्षित एवं तेज सड़क संपर्क उपलब्ध होगा।

सीमा सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित होगी परियोजना

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल नागरिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

लद्दाख क्षेत्र भारत की दो संवेदनशील सीमाओं—पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LOC) और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)—के करीब स्थित है। ऐसे में सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद सामग्री की तेज आवाजाही बेहद आवश्यक होती है।

जोजिला टनल के संचालन में आने के बाद सेना किसी भी मौसम में सीमाई क्षेत्रों तक तेजी से पहुंच सकेगी। युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में भारी सैन्य उपकरणों और रसद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

गलवान संघर्ष के बाद बढ़ी थी जरूरत

विशेषज्ञ बताते हैं कि वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए सैन्य तनाव और गलवान घाटी की घटना के बाद सीमाई क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता और अधिक महसूस की गई थी।

उस दौरान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित सड़क संपर्क के कारण सेना और सैन्य संसाधनों की त्वरित तैनाती एक बड़ी चुनौती बन गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सीमाई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।

जोजिला टनल उसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जो भविष्य में भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करेगी।

अत्याधुनिक तकनीक से हुआ निर्माण

MEIL के अधिकारियों के अनुसार सुरंग का निर्माण ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ (NATM) तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है। यह तकनीक विशेष रूप से पर्वतीय और भौगोलिक रूप से जटिल क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

हिमालय की कमजोर चट्टानी संरचना और लगातार बदलती भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए इस तकनीक का चयन किया गया। इससे सुरंग की मजबूती, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा रही है।

माइनस 25 डिग्री तापमान में भी नहीं रुका काम

परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सर्दियों के दौरान इस क्षेत्र का तापमान कई बार माइनस 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच जाता है। ऐसी परिस्थितियों में भी इंजीनियरों और श्रमिकों ने दिन-रात काम जारी रखा।

MEIL के जनरल मैनेजर हरपाल सिंह के अनुसार, इस परियोजना को साकार करने में स्थानीय कश्मीरी युवाओं और श्रमिकों की अहम भूमिका रही है। परियोजना से जुड़े लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारी कश्मीर क्षेत्र से हैं, जिन्होंने कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उल्लेखनीय योगदान दिया।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

जोजिला टनल के पूरा होने का लाभ केवल सेना या परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे लद्दाख और कश्मीर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान में सर्दियों के महीनों में सड़क मार्ग बंद होने के कारण पर्यटन और व्यापार गतिविधियां प्रभावित होती हैं। सुरंग बनने के बाद पूरे वर्ष पर्यटक आसानी से लद्दाख पहुंच सकेंगे। इससे होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

स्थानीय लोगों को भी स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

6,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजना

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, जोजिला टनल परियोजना की अनुमानित लागत 6,809.69 करोड़ रुपये है। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।

केंद्र सरकार का मानना है कि यह सुरंग केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकीकरण, सीमाई विकास और सामरिक मजबूती का प्रतीक है।

नए भारत की इंजीनियरिंग ताकत का प्रतीक

जोजिला टनल का ब्रेकथ्रू पूरा होना भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह परियोजना दर्शाती है कि देश अब दुनिया की सबसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी विश्वस्तरीय निर्माण कार्य करने में सक्षम है।

आने वाले समय में जब यह सुरंग पूरी तरह चालू होगी, तब यह केवल श्रीनगर और लद्दाख के बीच दूरी कम नहीं करेगी, बल्कि सीमाई सुरक्षा, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकीकरण को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम करेगी।

By Bhaskar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *