उत्तराखंड हाईकोर्टFile Photo

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने के संवैधानिक अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के एक प्रेमी जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश देते हुए साफ किया कि यदि दो वयस्क अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, तो उन्हें किसी भी प्रकार के सामाजिक या पारिवारिक दबाव, उत्पीड़न या भय के साये में नहीं रखा जा सकता।

यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता प्रेमी जोड़े के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज में प्रेम संबंधों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक मजबूत संवैधानिक संदेश भी देता है।


एकलपीठ ने की मामले की सुनवाई

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ द्वारा की गई। यह याचिका हरिद्वार जिले के पथरी थाना क्षेत्र से संबंधित है, जिसमें एक युवक और युवती ने अपने जीवन और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई थीं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है, और इसमें अपनी पसंद से संबंध बनाने तथा विवाह करने का अधिकार भी शामिल है।


क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हरिद्वार जिले के रहने वाले युवक और युवती ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि वे दोनों एक ही धर्म से संबंध रखते हैं और आपसी सहमति से प्रेम संबंध में हैं। दोनों बालिग हैं और जल्द ही विवाह करना चाहते हैं।

हालांकि, युवती के परिजन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परिवार की नाराजगी इस हद तक बढ़ चुकी है कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और जान से मारने की धमकियां तक मिल रही हैं।


जान से मारने की धमकियों का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि परिजन न केवल उनके रिश्ते का विरोध कर रहे हैं, बल्कि उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अवैध हस्तक्षेप भी कर रहे हैं। दोनों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें डर है कि यदि समय रहते सुरक्षा नहीं मिली, तो कोई गंभीर अप्रिय घटना घट सकती है।

सुनवाई के दौरान युवक और युवती दोनों व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनकी पहचान की पुष्टि की और उनसे बातचीत कर यह सुनिश्चित किया कि वे किसी भी दबाव, डर या जबरदस्ती में नहीं हैं।


कोर्ट ने माना—दोनों हैं बालिग, फैसला स्वेच्छा से लिया

न्यायालय ने पाया कि दोनों याचिकाकर्ता पूरी तरह बालिग हैं और उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के, अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रहने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में समाज या परिवार की असहमति किसी भी तरह से कानून से ऊपर नहीं हो सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि असहमति के नाम पर हिंसा, धमकी या उत्पीड़न को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि लता सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से विवाह या संबंध बनाने के लिए स्वतंत्र हैं और इसमें हस्तक्षेप करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में राज्य का कर्तव्य बनता है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।


पुलिस को दिए सख्त निर्देश

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के पथरी थानाध्यक्ष को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि—

  • याचिकाकर्ताओं को तत्काल आवश्यक और उपयुक्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए
  • विरोध कर रहे परिजनों को थाने बुलाकर कानून के दायरे में रहने की सख्त हिदायत दी जाए
  • किसी भी तरह की धमकी, दबाव या हिंसा की स्थिति में तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा में कोई चूक पाई जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी।


समाज के लिए क्या संदेश देता है यह फैसला?

यह फैसला उन तमाम मामलों में मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां प्रेम संबंधों को लेकर सामाजिक या पारिवारिक विरोध के चलते युवाओं को खतरे का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि—

  • प्रेम करना अपराध नहीं है
  • बालिगों की सहमति सर्वोपरि है
  • संविधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है

यह निर्णय राज्य और समाज दोनों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि कानून भावनाओं, परंपराओं या दबाव से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है।


निष्कर्ष

उत्तराखंड हाईकोर्ट प्रेमी जोड़ा सुरक्षा से जुड़ा यह फैसला न केवल याचिकाकर्ताओं को राहत देता है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो अपनी पसंद के जीवनसाथी के साथ सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीना चाहते हैं। न्यायालय का यह रुख संविधानिक मूल्यों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की मजबूती को दर्शाता है।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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