असम: 9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चुनाव प्रचार थमने से ठीक पहले कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बार विवाद का केंद्र बने हैं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनका परिवार, खासतौर पर उनकी पत्नी से जुड़ा कथित पासपोर्ट मामला।
कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। इस आरोप ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
कांग्रेस का आरोप: “तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशी निवेश”
असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले असम कांग्रेस के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास भारत के अलावा अन्य देशों के पासपोर्ट भी हैं, जिनमें मिस्र (इजिप्ट) का पासपोर्ट भी शामिल बताया गया है, जो अभी तक एक्सपायर नहीं हुआ है।
कांग्रेस का कहना है कि अगर यह सच है तो यह भारतीय कानून का गंभीर उल्लंघन है, क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या इन दस्तावेजों का इस्तेमाल केवाईसी या अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में किया गया है?
इसके साथ ही कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के परिवार ने अमेरिका में कंपनी खोलकर निवेश किया है और विदेशों में संपत्तियां बनाई हैं। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का मामला बन सकता है।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार: “फर्जी दस्तावेज और पाकिस्तान लिंक”
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज फोटोशॉप किए गए हैं और इनका कोई वास्तविक आधार नहीं है।
सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के पीछे एक “पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क” का हाथ है। उनका दावा है कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान के मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर असम चुनाव को लेकर असामान्य गतिविधियां देखी गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस मामले की जांच करेंगी।
पत्नी ने दर्ज कराई एफआईआर, कानूनी कार्रवाई शुरू
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री की पत्नी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। सीएम सरमा ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 और 468 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस तरह के फर्जी आरोप लगाए जाते हैं, तो नए कानून (BNS) के तहत और भी सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
बीजेपी का जवाब: “हास्यास्पद और आधारहीन आरोप”
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों को “हास्यास्पद” और “तथ्यहीन” बताया। उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेजों को कांग्रेस दिखा रही है, उनमें स्पष्ट रूप से तकनीकी त्रुटियां हैं, जिससे यह साबित होता है कि आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
गौरव गोगोई का पलटवार: “सच सामने लाएंगे”
वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री के परिवार की संपत्तियों और विदेशी कारोबार से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाएगी।
गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री के परिवार के पास दुबई में संपत्ति और गोल्ड कार्ड है? उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इन सभी मामलों की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चुनावी असर: क्या बदलेगा समीकरण?
असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले इस तरह के गंभीर आरोपों का सामने आना चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है। जहां कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी इसे साजिश बताकर सहानुभूति बटोरने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर शहरी और जागरूक मतदाताओं पर अधिक पड़ सकता है, जहां पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे अहम होते हैं।
असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पासपोर्ट विवाद ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। एक ओर कांग्रेस गंभीर आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री और बीजेपी इसे पूरी तरह फर्जी और साजिश करार दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और मतदाता इस विवाद को किस नजरिए से देखते हैं।
👉 फिलहाल इतना तय है कि असम विधानसभा चुनाव 2026 अब सिर्फ विकास और नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यक्तिगत आरोपों और जवाबी हमलों का केंद्र बन चुका है।

