अंकिता भंडारी हत्याकांड CBI जांच

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड CBI जांच ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच (शाखा-2) ने दिल्ली में एक अज्ञात वीआईपी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही सीबीआई की टीम सोमवार को जांच के सिलसिले में देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है, जहां वह मामले से जुड़े अहम सबूतों को खंगालने और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है।

हालांकि इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी पुलकित आर्या समेत तीनों दोषियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को दोबारा सुर्खियों में ला दिया है। यही कारण है कि अब सीबीआई जांच को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में खासा ध्यान केंद्रित हो गया है।


वीआईपी विवाद: जिसकी परछाईं अब तक बरकरार

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बाद से ही यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इस वीआईपी विवाद को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए और सरकार पर दबाव बढ़ता गया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

इस विवाद को और हवा तब मिली, जब पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने अपने और सुरेश राठौर के बीच हुई कथित फोन बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा की, जिसमें अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख होने का दावा किया गया। इस कथित ऑडियो के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया और वीआईपी की पहचान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया।


CBI जांच की संस्तुति और केस दर्ज

लगातार बढ़ते दबाव और जनभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी को इस मामले में CBI जांच की संस्तुति दी थी। इसके बाद अब CBI की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, अंकिता भंडारी हत्याकांड CBI जांच के तहत एजेंसी अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेनदेन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), वायरल ऑडियो-वीडियो क्लिप्स, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी सबूतों की गहन समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा और इसमें कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।


पहले ही हो चुकी है SIT जांच और सजा

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड सामने आने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया था। SIT की जांच के बाद वनंतरा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या, सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता और कर्मचारी सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया।

अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बावजूद पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों का कहना रहा कि जांच अधूरी है और वीआईपी एंगल को जानबूझकर दबाया गया। यही वजह है कि CBI जांच की मांग लगातार उठती रही।


क्या है पूरा मामला: सितंबर 2022 की वो रात

पौड़ी जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को किसी बात को लेकर रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्या और उसके दो साथियों—सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—के साथ अंकिता का विवाद हो गया।

जांच में सामने आया कि यह विवाद इतना बढ़ गया कि तीनों ने मिलकर अंकिता की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को ऋषिकेश के पास चीला नहर में फेंक दिया गया। बाद में पुलिस जांच के दौरान अंकिता का शव इसी नहर से बरामद किया गया, जिसके बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया।


प्रदेशव्यापी विरोध और जनदबाव

अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। सड़कों पर उतरे लोगों ने न केवल दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया कि मामले से जुड़े सभी प्रभावशाली लोगों को बेनकाब किया जाए।

पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने CBI जांच की सिफारिश की थी, जिसे पीड़ित परिवार और संगठनों ने न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया।


अब सबकी निगाहें CBI पर

अब जब अज्ञात वीआईपी के खिलाफ CBI ने केस दर्ज कर लिया है, तो यह साफ है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड CBI जांच केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गहराई से तथ्यों को सामने लाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में इस जांच से कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


अंकिता भंडारी हत्याकांड CBI जांच केवल एक जघन्य अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह सत्ता, प्रभाव और न्याय के टकराव का प्रतीक बन चुका है। CBI की ताजा कार्रवाई से यह उम्मीद जगी है कि अब इस मामले से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी और सच सामने आएगा। पूरे देश की निगाहें अब CBI की जांच पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा है।

By Bhaskar

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