जम्मू: अमरनाथ यात्रा 2026 में बाबा बर्फानी के दर्शन की अटूट आस्था के साथ देशभर से उमड़ रहे श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। 57 दिवसीय पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान रविवार तड़के जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 6,700 से अधिक श्रद्धालुओं का एक और जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर के लिए रवाना हुआ। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जबकि श्रद्धालुओं में भी बाबा अमरनाथ के दर्शन को लेकर अपार उत्साह देखने को मिल रहा है।
अधिकारियों के अनुसार रविवार सुबह लगभग तीन बजे से यात्रा के नए जत्थे को रवाना करने की प्रक्रिया शुरू हुई। श्रद्धालुओं को दो अलग-अलग काफिलों में रवाना किया गया, जिनमें महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या शामिल रही। इस बार के जत्थे में 1,310 महिलाएं और 22 बच्चे भी शामिल हैं, जो बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रवाना हुए।
जम्मू से लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
पवित्र यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। रविवार को रवाना हुआ यह चौथा जत्था है। इसके साथ ही जम्मू स्थित आधार शिविर से अब तक 20,220 से अधिक श्रद्धालु कश्मीर घाटी के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जम्मू पहुंच रहे हैं और यात्रा में शामिल होने के लिए पंजीकरण केंद्रों तथा आधार शिविरों पर भीड़ बनी हुई है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2 जुलाई को जम्मू से यात्रा के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद से प्रतिदिन श्रद्धालुओं के जत्थे बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए रवाना हो रहे हैं।
पहले दो दिनों में 26 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
तीन जुलाई से शुरू हुई 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के शुरुआती दो दिनों में ही 26 हजार से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ते उत्साह का संकेत माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि कठिन पहाड़ी रास्तों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद बाबा अमरनाथ के दर्शन का आध्यात्मिक अनुभव उन्हें हर कठिनाई को आसान बना देता है। कई श्रद्धालु इसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुभव बताते हैं।
दो मार्गों से जारी है यात्रा
इस वर्ष भी अमरनाथ यात्रा 2026 दो प्रमुख मार्गों से संचालित की जा रही है। पहला पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग है, जो दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले से होकर गुजरता है। दूसरा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है, जो गांदरबल जिले से होकर सीधे गुफा तक पहुंचता है।
पहलगाम मार्ग अपेक्षाकृत लंबा लेकिन सुगम माना जाता है, जबकि बालटाल मार्ग छोटा होने के बावजूद अधिक चुनौतीपूर्ण है। श्रद्धालु अपनी सुविधा, स्वास्थ्य और समय के अनुसार दोनों मार्गों में से किसी एक का चयन कर रहे हैं।
अलग-अलग काफिलों में रवाना हुए श्रद्धालु
अधिकारियों के अनुसार रविवार को कुल 291 वाहनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को विभिन्न आधार शिविरों तक भेजा गया। इनमें 152 वाहनों में सवार 2,590 श्रद्धालु बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुए, जबकि 139 वाहनों में 4,131 श्रद्धालु पहलगाम आधार शिविर की ओर गए।
पूरे मार्ग पर सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, अर्धसैनिक बल, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन दल और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि यात्रा सुरक्षित और निर्बाध रूप से संचालित हो सके।
प्रशासन ने गैर-पंजीकृत श्रद्धालुओं से की अपील
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 9 जुलाई तक यात्रा के सभी पंजीकरण स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।
इसी कारण प्रशासन ने गैर-पंजीकृत श्रद्धालुओं से फिलहाल यात्रा स्थगित करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बिना पंजीकरण यात्रा पर निकलने से अनावश्यक भीड़ बढ़ सकती है और यात्रा प्रबंधन प्रभावित हो सकता है।
रविवार से नया नियम भी लागू कर दिया गया है, जिसके तहत केवल वैध पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं को ही जम्मू से कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है। जिन श्रद्धालुओं के पास पंजीकरण नहीं है, उन्हें निर्धारित जांच चौकियों पर रोक दिया जाएगा और नए स्लॉट उपलब्ध होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया गया है। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर, ऑक्सीजन सुविधा, आपातकालीन चिकित्सा दल, विश्राम स्थल, भोजन, पेयजल और सफाई व्यवस्था को भी बेहतर बनाया गया है। प्रशासन लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश जारी कर रहा है।
आस्था, अनुशासन और सुरक्षा का संगम
अमरनाथ यात्रा 2026 केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कठिन पर्वतीय मार्ग तय करते हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रा को सफल बनाने के लिए श्रद्धालुओं का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है जितना सुरक्षा और व्यवस्थाओं का मजबूत होना।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजीकरण प्रक्रिया का पालन, स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन और प्रशासन की सलाह मानकर ही यात्रा करना सुरक्षित रहेगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित होगी बल्कि पूरी यात्रा व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी। (PTI- इनपुट)

