Adi Kailash Snowfall 2026

Adi Kailash Snowfall 2026: सीमांत जिला पिथौरागढ़ एक बार फिर कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी की चपेट में है। पिछले दिनों हुई व्यापक बर्फबारी के कारण धारचूला से आदि कैलाश को जोड़ने वाली सड़क पर ढाई फुट से अधिक बर्फ जम गई है। इसके चलते चीन सीमा से सटे जिले के अंतिम गांव कुटी से आगे आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। शीतकाल में पहले से ही दुर्गम माने जाने वाले इन उच्च हिमालयी इलाकों में हालिया बर्फबारी ने हालात और कठिन कर दिए हैं।


आदि कैलाश मार्ग पर आवागमन ठप, कुटी से आगे बढ़ना असंभव

भारी बर्फ के कारण आदि कैलाश को जाने वाला मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के अनुसार कुटी गांव से आगे सड़क पर दो फुट से अधिक बर्फ जमा है, जिससे वाहन तो दूर, पैदल आवाजाही भी संभव नहीं है। इस वजह से सीमांत क्षेत्र में शीतकाल के दौरान संपर्क स्वतः कट जाता है।

चार दिन पूर्व हुई बर्फबारी से उच्च हिमालयी क्षेत्र के माइग्रेशन वाले गांव पूरी तरह बर्फ से लकदक हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन मौसम की मार के आगे फिलहाल राहत कार्य सीमित हैं।


व्यास घाटी के सात गांवों में भारी बर्फ, कुटी सबसे अधिक प्रभावित

पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी के बूंदी, गर्त्यांग, गुंजी, नपलच्यू, रांगकांग, नाबी और कुटी—इन सात गांवों में बर्फबारी का असर सबसे अधिक देखा गया है। इनमें कुटी गांव में बर्फ की मात्रा सबसे ज्यादा दर्ज की गई है।
सीमांत धारचूला की दारमा घाटी में स्थित कुटी गांव 12,303 फुट की ऊंचाई पर बसा है। 26 जनवरी को गांव पहुंचे ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल के अनुसार, गांव में करीब डेढ़ फुट बर्फ जमा है, जबकि कुटी से आगे आदि कैलाश सड़क पर दो फुट से अधिक बर्फ होने के कारण आवागमन पूरी तरह बंद है।

घाटी के दांतू, दुग्तू सहित अन्य गांवों में भी लगातार बर्फबारी जारी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।


पंचाचूली शिखरों के दर्शन कर लौटे पर्यटक

बर्फबारी के बीच भी कुछ पर्यटकों ने साहस दिखाया और पंचाचूली शिखर के दर्शन कर लौटे। स्थानीय होम स्टे संचालक संजय जंग और गुड्डू जंग के अनुसार, मंगलवार को हुई बर्फबारी के बावजूद सड़क खुले रहने से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश के अलावा पिथौरागढ़ और रुद्रपुर से 40 से अधिक पर्यटक पंचाचूली के दर्शन के लिए पहुंचे।

पर्यटकों में पिथौरागढ़ के अमन जोशी, आशीष कुमार, दिल्ली के आनंद, धर्मशाला के अक्षय कुमार और यूपी के विवेक शामिल रहे। सभी ने बर्फबारी के बीच दारमा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की और अनुभव को अविस्मरणीय बताया।


सड़क बनने से शीतकाल में भी बनी आवाजाही

कुछ वर्ष पहले तक दारमा और व्यास घाटियां सड़क से नहीं जुड़ी थीं। तब यहां के ग्रामीण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक अपने पशुओं के साथ निचली घाटियों की ओर पलायन कर जाते थे।
हालांकि, सड़क पहुंचने के बाद स्थिति बदली है। अब शीतकाल में भी सीमित स्तर पर आवागमन जारी रहता है। कई ग्रामीणों ने होम स्टे शुरू किए हैं, जिससे सर्दियों में भी पर्यटक पहुंचने लगे हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक बर्फबारी होने पर मार्ग के कई नालों पर अस्थायी ग्लेशियर बन जाते हैं, जिससे वाहन और पैदल दोनों मार्ग बंद हो जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण ऐसे अस्थायी ग्लेशियर कम बने हैं, जिससे आवाजाही संभव हो पाई है।


होम स्टे संचालक खुश, शीतकालीन पर्यटन से उम्मीदें

होम स्टे संचालक संजय जंग का कहना है कि सड़क खुली रहने से सर्दियों में भी पर्यटकों की आवाजाही बनी है। भविष्य में शीतकालीन पर्यटन के बढ़ने की पूरी संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

हालांकि, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान रात का तापमान माइनस डिग्री तक चला जाता है। तेज ठंडी हवाओं और बर्फबारी के बीच यात्रियों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था करना आसान नहीं होता, फिर भी स्थानीय लोग पूरी मेहनत से व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।


मुनस्यारी में फिर बर्फबारी, स्कूलों में अवकाश

मंगलवार देर शाम मुनस्यारी क्षेत्र में एक बार फिर बर्फबारी हुई, जिससे कई मार्ग बंद हो गए और कुछ स्थानों पर वाहन फंसने की सूचना है। मौसम विभाग द्वारा हाई अलर्ट जारी किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने बुधवार को जिले में कक्षा 12वीं तक सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।


By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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