देहरादून मोबिलिटी प्लान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार बढ़ते यातायात दबाव, पार्किंग संकट और शहरी विस्तार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। कार्यालय, शिक्षण संस्थान, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में आम लोगों को रोज़ाना जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और लंबी यात्रा अवधि जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। इन चुनौतियों के स्थायी समाधान की दिशा में जिला प्रशासन ने अब अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुखी रणनीति अपनाने के संकेत दिए हैं।
इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में नहीं बल्कि जिला स्तर पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ देहरादून मोबिलिटी प्लान की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना था। बैठक में सड़क सुधार, प्रमुख चौराहों के पुनर्विकास, पार्किंग क्षमता बढ़ाने, लंबित परियोजनाओं की प्रगति और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।
माइक्रो लेवल प्लान से होगा ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर के प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र का माइक्रो लेवल अध्ययन किया जाए और उसी आधार पर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि यातायात व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक और क्षेत्र-विशिष्ट योजना तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि शहर के प्रमुख चौराहों, जंक्शनों और व्यस्त मार्गों का तकनीकी मूल्यांकन कर वहां आवश्यक चौड़ीकरण, संकेतक व्यवस्था, ट्रैफिक फ्लो सुधार और अन्य आधारभूत कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए।
विभागीय समन्वय से मिलेगी योजनाओं को गति
जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी शहरी परियोजना की सफलता केवल निर्माण कार्यों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, एमडीडीए, पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को साझा रणनीति के तहत कार्य करने के निर्देश दिए ताकि योजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतर सकें।
बैठक में अधिकारियों ने आढ़त बाजार क्षेत्र की यातायात व्यवस्था, जंक्शन इम्प्रूवमेंट परियोजनाओं, पार्किंग उपयोगिता, इंदिरा मार्केट पुनर्विकास, मंडी शिफ्टिंग, परेड ग्राउंड पार्किंग तथा रामराय पार्किंग सहित कई प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति प्रस्तुत की।
आढ़त बाजार और प्रमुख जंक्शनों पर रहेगा विशेष फोकस
देहरादून का आढ़त बाजार लंबे समय से ट्रैफिक दबाव का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां भारी वाहनों की आवाजाही, व्यापारिक गतिविधियों और सीमित सड़क चौड़ाई के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में यातायात सुधार के लिए सभी आवश्यक कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएं। साथ ही लोक निर्माण विभाग को शहर के प्रमुख चौराहों के सुधारीकरण और सौंदर्यीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि यातायात का प्रवाह अधिक सुचारु बनाया जा सके।
इंदिरा मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
बैठक में इंदिरा मार्केट मल्टीलेवल कार पार्किंग परियोजना की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि यहां लगभग 1,050 वाहनों की क्षमता वाली आधुनिक पार्किंग विकसित की जा रही है, जो शहर के पार्किंग संकट को काफी हद तक कम कर सकती है।
हालांकि निर्माण कार्य की धीमी गति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एमडीडीए के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यदायी संस्था के साथ तत्काल बैठक कर देरी के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल पार्किंग का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए, ताकि लोग निर्धारित पार्किंग का उपयोग करें और सड़कों पर अनावश्यक वाहन खड़े होने से जाम की समस्या कम हो।
क्लीन एयर प्रोग्राम से जुड़ेगा ट्रैफिक सुधार
बैठक में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत भी यातायात सुधार पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक यातायात और नगर निगम को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण, बेहतर पार्किंग व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और ट्रैफिक प्रबंधन को एकीकृत करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यातायात का प्रवाह बेहतर होता है और अनावश्यक जाम कम होता है तो वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने पर जोर
बैठक के दौरान मंडी शिफ्टिंग, आढ़त बाजार सड़क सुधार, परेड ग्राउंड पार्किंग, रामराय पार्किंग और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित कार्यों में तेजी लाई जाए और प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि देहरादून जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रत्येक विभाग को जवाबदेही और समयबद्धता के साथ कार्य करना होगा।
नागरिकों को मिलेगी राहत, शहर बनेगा अधिक व्यवस्थित
जिला प्रशासन का मानना है कि यदि प्रस्तावित देहरादून मोबिलिटी प्लान निर्धारित समयसीमा में प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में देहरादून की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क, आधुनिक पार्किंग, वैज्ञानिक ट्रैफिक प्रबंधन, सुव्यवस्थित चौराहे और विभागीय समन्वय न केवल जाम की समस्या कम करेंगे, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन भी उपलब्ध कराएंगे।
बैठक में पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, एमडीडीए, नगर निगम तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून मोबिलिटी प्लान की यह पहल केवल ट्रैफिक सुधार की योजना नहीं, बल्कि एक ऐसे शहर की नींव रखने की दिशा में कदम है, जहां विकास, पर्यावरण और जनसुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
