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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन: अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर लाल चौक में झड़पें, 5 पुलिसकर्मी समेत 12 घायल

कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन

Photo: PTI

कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन: जम्मू-कश्मीर में सोमवार को अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के विरोध में निकले प्रदर्शनों ने कई जगहों पर हिंसक रूप ले लिया। श्रीनगर समेत घाटी के विभिन्न इलाकों में हुए टकरावों में पांच पुलिसकर्मियों सहित कुल 12 लोग घायल हो गए। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

पुलिस ने साफ शब्दों में कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित है, लेकिन दंगा और पत्थरबाजी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं।


लाल चौक की ओर मार्च रोकने पर भड़की झड़प

सोमवार को हालात उस समय बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारी शहर के केंद्र लाल चौक की ओर मार्च करने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने किसी बड़े जमावड़े की अनुमति नहीं दी थी और बैरिकेडिंग कर भीड़ को आगे बढ़ने से रोका।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोकने पर कुछ समूहों ने सुरक्षा बलों पर भारी पत्थरबाजी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का लाठीचार्ज किया। झड़पों के दौरान पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि कई प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं।


प्रशासन की सख्त चेतावनी

पुलिस प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि वे नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

बयान में कहा गया, “मध्य पूर्व में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए हम लोगों की भावनाओं को समझते हैं। लेकिन दंगा, पत्थरबाजी और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालना अस्वीकार्य है। गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल उकसाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा से आम नागरिकों, व्यापारियों, छात्रों और दिहाड़ी मजदूरों को भारी परेशानी होती है।


रविवार को शांतिपूर्ण रहे थे प्रदर्शन

रविवार को घाटी के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन वे अधिकांशतः शांतिपूर्ण रहे। पुलिस ने कुछ जगहों पर मार्च निकालने और लाल चौक पर इकट्ठा होने की अनुमति दी थी।

हालांकि शाम तक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाबंदियां लगाई जाने लगीं। सोमवार को किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, फिर भी छोटे-छोटे समूह विभिन्न इलाकों से निकलकर मुख्य स्थानों की ओर बढ़े, जिससे टकराव की स्थिति बनी।


इंटरनेट बंद, स्कूल-कॉलेज दो दिन के लिए स्थगित

प्रदर्शनों के केंद्र रहे लाल चौक इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दी गई हैं। कश्मीर के सभी स्कूल और कॉलेज दो दिनों के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।

घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है।


कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन में नारेबाजी और व्यापक शोक

कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान ‘अल्लाह-ओ-अकबर’ और ‘खामेनेई रहबर’ जैसे नारे सुनाई दिए। कई जगहों पर लोगों ने अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया और इसे वैश्विक मुस्लिम समुदाय के लिए बड़ी क्षति बताया।

घाटी में व्यापक शोक और आक्रोश का माहौल देखने को मिला। हालांकि प्रशासन का कहना है कि भावनाओं के उबाल के बावजूद कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।


कानून-व्यवस्था पर फोकस, आगे की रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का असर स्थानीय माहौल पर तेजी से पड़ता है। प्रशासन फिलहाल हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की बात कह रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर पत्थरबाजी और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।


आम जनजीवन पर असर

कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन का असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है। कई बाजार बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। इंटरनेट सेवाएं बंद होने से व्यापार और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा है।

व्यापारिक संगठनों ने शांति की अपील करते हुए कहा है कि लगातार अशांति से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।


फिलहाल घाटी में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हालात सामान्य करने में जुटी हैं।

स्पष्ट है कि कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि संवेदनशील मुद्दों पर हालात कितनी तेजी से बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन की चुनौती दोहरी है—एक ओर लोगों की भावनाओं का सम्मान करना और दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखना।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और क्या प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम शांति बहाल करने में कारगर साबित होते हैं।

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