श्रीनगर/कश्मीर लाल चौक सील: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर घाटी में उभरे विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। श्रीनगर के सिटी सेंटर लाल चौक को टिन की चादरों और कंटीले तारों से पूरी तरह सील कर दिया गया है। घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, जबकि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है।
यह कश्मीर लाल चौक सील कदम संभावित भीड़ जुटने और बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में भारी तैनाती की गई है।
टिन की चादरों और कंटीले तारों से घिरा लाल चौक
अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर के ऐतिहासिक घंटाघर स्थित लाल चौक के चारों ओर टिन की चादरें लगाकर और कंटीले तार बिछाकर क्षेत्र को बंद कर दिया गया है। यह कदम प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोकने और किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए उठाया गया है।
शहर के प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को संवेदनशील इलाकों में गश्त के लिए लगाया गया है।
घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन
कश्मीर में लगभग 15 लाख की शिया आबादी है। ऐसे में खामेनेई की मौत के विरोध में श्रीनगर के लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
प्रदर्शनकारियों को छाती पीटकर मातम मनाते और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ नारेबाजी करते देखा गया। प्रशासन का कहना है कि अब तक अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन एहतियातन पाबंदियां लगाई गई हैं ताकि हालात बिगड़ने न पाएं।
एक दिवसीय बंद का आह्वान
विरोध प्रदर्शनों के बीच मीरवाइज उमर फारूक की अगुवाई वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने एक दिवसीय बंद का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए सार्वजनिक परिवहन और बाजारों की निगरानी बढ़ा दी है।
अधिकारियों का कहना है कि बंद के आह्वान और संभावित भीड़ को देखते हुए कश्मीर लाल चौक सील करने का निर्णय लिया गया, ताकि किसी भी तरह की अराजक स्थिति से बचा जा सके।
स्कूल-कॉलेज दो दिन बंद, परीक्षाएं स्थगित
प्रदर्शनों और सुरक्षा कारणों से घाटी के सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है। परीक्षाएं भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। शैक्षणिक संस्थानों को 3 मार्च तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
इंटरनेट सेवाएं सीमित, निगरानी तेज
प्रशासन ने एहतियातन इंटरनेट सेवाओं को भी सीमित कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखी जा रही है ताकि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों के प्रसार को रोका जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली गलत सूचनाएं स्थिति को भड़का सकती हैं। इसलिए साइबर मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
सुरक्षा अधिकारियों की लगातार निगरानी
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लाल चौक और शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी शरारती या देशविरोधी तत्व को हालात का फायदा उठाने नहीं दिया जाएगा।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तेजी से दिख सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
हालांकि अब तक हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन एहतियाती कदमों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों से साफ है कि प्रशासन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद उभरे भावनात्मक माहौल ने कश्मीर घाटी को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला खड़ा किया है। कश्मीर लाल चौक सील करने और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने जैसे कदम प्रशासन की सतर्कता को दर्शाते हैं।
आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह प्रदर्शन की प्रकृति और प्रशासन की रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और घाटी में शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

