देहरादून।
Uttarakhand Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर समूचा उत्तराखंड देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। राजधानी देहरादून से लेकर पर्वतीय अंचलों तक राष्ट्रगान, तिरंगे और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित गरिमामय समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
तिरंगे को सलामी देने के पश्चात मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रदेशवासियों को भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble) की शपथ दिलाई और लोकतंत्र, समानता व न्याय जैसे संवैधानिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने का आह्वान किया।
संविधान की शपथ के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों का संकल्प
मुख्यमंत्री आवास परिसर में आयोजित इस समारोह के दौरान जब मुख्यमंत्री ने संविधान की उद्देशिका का वाचन किया, तो पूरा वातावरण “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह नागरिकों को कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। 77वां गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे पूर्वजों के बलिदान से मिले लोकतंत्र की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय का सपना साकार
ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ओजस्वी और दूरदर्शी नेतृत्व में देश सांस्कृतिक पुनरुत्थान और आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“आज समाज के हर वर्ग—गरीब, किसान, युवा और महिला—के उत्थान के लिए योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र भारत की वैश्विक पहचान बन चुका है।”
विकसित भारत @2047: हर नागरिक की भूमिका जरूरी
सीएम धामी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

मुख्यमंत्री के संबोधन के प्रमुख बिंदु
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान राज्य और राष्ट्र से जुड़े कई अहम बिंदुओं को रेखांकित किया—
कर्तव्यों का ईमानदार निर्वहन
सीएम ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करना ही राष्ट्र के प्रति सच्ची सेवा है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा
राज्य सरकार ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ‘विकसित उत्तराखंड’ की अवधारणा पर तेजी से कार्य कर रही है।
समग्र और संतुलित विकास
शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यटन और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड निरंतर प्रगति कर रहा है।
‘रजत दशक’ की ओर बढ़ता उत्तराखंड
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड अपने गठन के 25वें वर्ष यानी ‘रजत दशक’ की ओर तेजी से अग्रसर है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए “विकल्प रहित संकल्प” के सिद्धांत पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में हो रहे सुधारों से राज्य में निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है।
समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख
गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे ऐतिहासिक कदम का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता, समानता और न्याय की दिशा में एक बड़ा सुधारात्मक कदम है, जो संविधान की मूल भावना को और मजबूत करता है।
इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए विकास का मार्ग इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन के साथ तय किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास ही राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।
युवा शक्ति से बनेगा उत्तराखंड का भविष्य
सीएम का संबोधन विशेष रूप से राज्य की युवा शक्ति के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि युवा ही उत्तराखंड और भारत के भविष्य के कर्णधार हैं और सरकार उन्हें शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष: गणतंत्र दिवस बना संकल्प और प्रेरणा का प्रतीक
Uttarakhand Republic Day 2026 पर देहरादून में आयोजित यह समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंत में सभी प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उत्तराखंड की सुख-समृद्धि और प्रगति की कामना की।
