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नर्सिंग भर्ती पर फिर उठे सवाल: 269वें दिन भी आंदोलन जारी, 32 लाख की धोखाधड़ी मामले से गरमाया विवाद

उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया

देहरादून: उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। देहरादून के एकता विहार में नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन 269वें दिन भी जारी रहा। मंच और बेरोजगार संघ ने नर्सिंग लिखित परीक्षा की निष्पक्षता, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और शासन स्तर पर लिए गए निर्णयों को लेकर सवाल उठाए हैं। इसी दौरान मंच की ओर से करीब 32 लाख रुपये के कथित लेन-देन से जुड़े मामले को भी सामने रखा गया है।

हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी को लेकर पुलिस में दर्ज मुकदमा फिलहाल व्यक्तिगत स्तर पर नौकरी दिलाने के कथित झांसे से संबंधित बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे इस प्रकरण का सीधा संबंध नर्सिंग भर्ती परीक्षा, प्रश्नपत्र लीक या किसी संगठित भर्ती घोटाले से स्थापित हो सके।

यही वजह है कि नर्सिंग भर्ती विवाद में एक ओर आंदोलनकारी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को व्यक्तिगत धोखाधड़ी का प्रकरण मानकर जांच आगे बढ़ा रही है।

269वें दिन भी जारी रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन

देहरादून के एकता विहार में नर्सिंग अभ्यर्थियों और बेरोजगारों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में वर्षवार भर्ती समेत भर्ती प्रक्रिया को लेकर विभिन्न मांगें शामिल हैं।

मंच का कहना है कि अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं। शासन स्तर से उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन भी दिया गया था। इसी क्रम में संबंधित पत्र पर शासन के जवाब का इंतजार किया जा रहा था।

मंच का दावा है कि जब शासन स्तर पर जवाब आना अभी बाकी था, तो 25 जुलाई को नर्सिंग लिखित परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी क्यों की गई, यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में सरकार और संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी अभ्यर्थियों के बीच विश्वास कायम करना है। यदि किसी प्रक्रिया को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हों, तो परीक्षा से पहले सभी आशंकाओं को दूर करना जरूरी है।

नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर मंच ने उठाए सवाल

नर्सिंग एकता मंच ने लिखित परीक्षा और पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंच का कहना है कि उसके पास कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन से संबंधित कुछ दस्तावेज तथा ट्रांजेक्शन के साक्ष्य मौजूद हैं।

हालांकि मंच ने यह भी कहा है कि वह बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रहा है। उसके मुताबिक सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की वास्तविकता की पुष्टि स्वतंत्र जांच के माध्यम से ही होनी चाहिए।

मंच की मांग है कि 25 जुलाई को आयोजित लिखित परीक्षा समेत पूरी नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक परीक्षा परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाए।

यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो मंच ने भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

32 लाख रुपये की धोखाधड़ी का अलग पुलिस मामला

इसी बीच 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का एक मामला पुलिस रिकॉर्ड में सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 को एक महिला ने देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायतकर्ता निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत बताई गई है। पुलिस में दी गई शिकायत के अनुसार महिला की मुलाकात चारू चंद्र जोशी नामक व्यक्ति से शादी डॉट कॉम के माध्यम से हुई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने खुद को स्वास्थ्य विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर बताया और अपने उच्चाधिकारियों से संपर्क होने का दावा किया। आरोप के मुताबिक महिला को शादी करने तथा स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर अलग-अलग तारीखों में उससे करीब 32 लाख रुपये लिए गए। बाद में जब नौकरी और अन्य आश्वासन पूरे नहीं हुए तो महिला ने पुलिस से शिकायत की।

शिकायत के आधार पर नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा अपराध संख्या 331/26 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अभियोग दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं होते। मामले की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

पुलिस जांच में अभी तक भर्ती परीक्षा से कनेक्शन नहीं

इस मामले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस की जांच से सामने आई है। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान पीड़िता और आरोपी के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों तथा आरोपी द्वारा किए गए कथित संपर्कों की जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर व्यक्तिगत स्तर पर धोखाधड़ी का दिखाई देता है।

पुलिस के मुताबिक अभी तक ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे आरोपी का किसी परीक्षा एजेंसी अथवा नर्सिंग चयन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के साथ संबंध स्थापित हो। इसी तरह प्रश्नपत्र लीक या किसी संगठित भर्ती गड़बड़ी में आरोपी की भूमिका का भी फिलहाल कोई प्रमाण पुलिस को नहीं मिला है।

इसलिए 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले को सीधे नर्सिंग भर्ती परीक्षा में अनियमितता का प्रमाण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। पुलिस की जांच जारी है और आगे सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

नैनीताल में भी दर्ज हैं धोखाधड़ी से जुड़े मामले

विवेचना के दौरान पुलिस को आरोपी के खिलाफ नैनीताल जिले में दर्ज कुछ पुराने मामलों की जानकारी भी मिली है। पुलिस के अनुसार चारू चंद्र जोशी के खिलाफ नौकरी दिलाने का कथित झांसा देकर धोखाधड़ी करने और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े मामले दर्ज हैं।

पुलिस के मुताबिक नैनीताल जनपद में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के तीन मामले और दुष्कर्म से संबंधित एक मामला दर्ज होने की जानकारी विवेचना के दौरान सामने आई है।

हालांकि, इन पुराने मामलों की मौजूदगी को भी वर्तमान नर्सिंग भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रत्येक मामले की अपनी अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया होती है।

एसपी सिटी ने भर्ती परीक्षा से जोड़ने पर किया स्पष्ट

देहरादून के एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान प्रकरण व्यक्तिगत धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध जांच के आधार पर इसे सीधे किसी भर्ती परीक्षा की शुचिता से जोड़ना उचित नहीं है।

पुलिस फिलहाल वित्तीय लेन-देन और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की जांच कर रही है। बैंक खातों, लेन-देन और आरोपी के कथित संपर्कों की पड़ताल के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

पुलिस के इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया विवाद और 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला फिलहाल दो अलग-अलग पहलुओं में जांचा जा रहा है।

अभ्यर्थियों की चिंता का केंद्र पारदर्शिता

दूसरी ओर, नर्सिंग अभ्यर्थियों की चिंता केवल एक व्यक्ति या एक शिकायत तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और समान अवसर की मांग कर रहे हैं।

सरकारी भर्ती में शामिल होने वाले हजारों युवाओं के लिए परीक्षा केवल एक प्रतियोगिता नहीं होती, बल्कि उनके करियर और वर्षों की तैयारी से जुड़ी उम्मीद होती है। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर कोई भी सवाल अभ्यर्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से बेचैनी पैदा करता है।

यही कारण है कि नर्सिंग एकता मंच लगातार मांग कर रहा है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सभी सवालों का जवाब दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच के माध्यम से दिया जाए।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो जांच से स्थिति और साफ होगी और योग्य उम्मीदवारों का भरोसा भी मजबूत होगा। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

जांच से ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर आंदोलन जारी है और 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला पुलिस जांच के अधीन है। एक तरफ अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि अभी तक व्यक्तिगत धोखाधड़ी से आगे परीक्षा में गड़बड़ी का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है।

ऐसे में इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी निष्पक्ष जांच होगी। जांच में यदि मंच द्वारा बताए जा रहे दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन किसी व्यापक अनियमितता की ओर संकेत करते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के लिए उसकी गहराई से पड़ताल करना जरूरी होगा। वहीं यदि जांच में भर्ती प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं मिलता है, तो उन अभ्यर्थियों की आशंकाओं को भी तथ्यों के आधार पर दूर किया जा सकेगा।

फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। सरकार और संबंधित विभाग के सामने चुनौती केवल भर्ती पूरी करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है जिस पर हर अभ्यर्थी को भरोसा हो। क्योंकि किसी भी सरकारी भर्ती की असली सफलता सिर्फ नियुक्तियों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता से तय होती है।

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