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Uttarakhand: री-नीट की तैयारी कर रही रिया थापा की मौत पर उबाल: पेपर लीक के खिलाफ देहरादून में कांग्रेस का कैंडल मार्च

Photo: Jyoti Rautela FB

देहरादून: रिया थापा मौत मामला में एक बार फिर से देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों के बीच उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर युवाओं के भविष्य को लेकर उठी चिंता का केंद्र बन गई। 23 वर्षीय छात्रा रिया थापा की मौत के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने रिया की मौत को केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के टूटते भरोसे का प्रतीक बताते हुए देहरादून में कैंडल मार्च और मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

रिया थापा मौत मामला

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूजा विहार स्थित रिया थापा के निवास से कैंडल मार्च की शुरुआत की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, छात्र-छात्राएं, अभिभावक, रिश्तेदार और कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। मार्च शुरू होने से पहले सभी ने रिया थापा को श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। पूरे कार्यक्रम में भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जहां लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर न्याय और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग उठाई।

कांग्रेस नेताओं का कहना था कि देश के लाखों युवा वर्षों तक कठिन मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ियों और कथित भ्रष्टाचार की घटनाओं ने युवाओं का विश्वास हिला दिया है। उनका आरोप है कि जब मेहनत और प्रतिभा के बजाय अव्यवस्था और अनियमितताएं सुर्खियां बनती हैं तो सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को होता है, जिन्होंने अपने सपनों के लिए वर्षों तक संघर्ष किया होता है।

कांग्रेस नेता वैभव वालिया ने कहा कि रिया थापा की असमय मृत्यु केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और प्रशासनिक लापरवाही ने लाखों छात्रों के भविष्य को असमंजस में डाल दिया है। उनका कहना था कि वर्षों की मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर होता जा रहा है और सरकार युवाओं का विश्वास बहाल करने में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें मेहनत का सम्मान हो और किसी भी परीक्षा का परिणाम पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर तय हो। यदि परीक्षा प्रणाली पर ही सवाल खड़े होने लगें तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था का नहीं बल्कि पूरे समाज के भविष्य का संकट बन जाता है।

इधर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में देहरादून में एक अलग मशाल जुलूस भी निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं, अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों ने भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मशालें लेकर युवाओं के भविष्य की सुरक्षा, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

ज्योति रौतेला ने कहा कि इस जनआंदोलन में युवाओं की भागीदारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब छात्र अपने भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज अब केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग का प्रतीक बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल रिया थापा को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना है जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर की गारंटी हो। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ईमानदारी और विश्वसनीयता बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है ताकि लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

रिया थापा की कहानी कई युवाओं की उस संघर्ष यात्रा की याद दिलाती है, जिसमें सफलता पाने के लिए वर्षों तक लगातार मेहनत की जाती है। जानकारी के अनुसार, देहरादून निवासी 23 वर्षीय रिया ने 12वीं की परीक्षा में 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की और री-नीट परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थीं। परिवार और परिचितों के अनुसार उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था। हालांकि बीते दिनों उनका शव फंदे से लटका मिला, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

रिया थापा मौत मामला एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की अनिश्चितता और परीक्षा प्रणाली में विश्वास के संकट को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेपर लीक रोकना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी लगातार महसूस की जा रही है।

फिलहाल रिया थापा मौत मामला को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। एक ओर कांग्रेस इसे युवाओं के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा बना रही है, वहीं यह घटना उन लाखों छात्रों और अभिभावकों के मन में भी कई सवाल छोड़ गई है, जो वर्षों की मेहनत के बाद निष्पक्ष अवसर की उम्मीद रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार और संबंधित संस्थाएं कौन से ठोस कदम उठाती हैं।

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