उत्तरकाशी/टिहरी: राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 में इस बार पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में वर्षों तक लोगों की सेवा करने वाली उत्तराखंड की स्वास्थ्यकर्मी पूजा परमार राणा को दिया गया है। उत्तरकाशी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में ऑक्जीलियरी नर्स मिडवाइफ (ANM) के पद पर कार्यरत पूजा परमार राणा को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में इस वर्ष का राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 प्रदान किया गया। देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
यह सम्मान उन नर्सिंग कर्मियों को दिया जाता है जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। पूजा परमार राणा को यह उपलब्धि हिमालयी अंचल के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों से लगातार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और कोरोना महामारी के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मिली है।
दुर्गम पहाड़ों में सेवा का बना राष्ट्रीय उदाहरण
उत्तरकाशी के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कठिन रास्ते, खराब मौसम और सीमित संसाधनों के बीच पूजा परमार राणा ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन जिस समर्पण के साथ किया, वह आज राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया है।
कोरोना महामारी के दौरान जब लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे, उस समय पूजा परमार राणा ने यमुना नदी के तटवर्ती और दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक किया। उन्हें उस क्षेत्र की पहली वैक्सीनेटर के रूप में भी जाना गया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में जाकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से कई ऐसे गांवों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हुई, जहां पहले चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए किया सराहनीय कार्य
पूजा परमार राणा ने केवल टीकाकरण अभियान तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी लगातार कार्य किया। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देने, सुरक्षित प्रसव के प्रति जागरूक करने और बच्चों के पोषण व देखभाल को लेकर ग्रामीण समुदाय में जागरूकता फैलाने का काम किया।
इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाकर उन्होंने लोगों को स्वच्छता, पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति भी प्रेरित किया।
पहले भी मिल चुका है राज्य स्तरीय सम्मान
पूजा परमार राणा की उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें पहले राज्य स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ एएनएम’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 उनके समर्पण, सेवा भावना और कार्यकुशलता की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सम्मान केवल पूजा परमार राणा की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं और पर्वतीय क्षेत्रों में कार्य कर रहे हजारों स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी प्रेरणा है।
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर टिहरी में भी हुआ सम्मान समारोह
वहीं, अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर टिहरी जिले में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सीएमओ डॉ. श्याम विजय और सीएमएस डॉ. अमित राय ने नर्सों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
सीएमओ डॉ. श्याम विजय ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होती हैं। वे मरीजों की सेवा और देखभाल में दिन-रात समर्पित रहती हैं। उनका योगदान केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज को स्वस्थ बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि मानवता के प्रति नर्सों का समर्पण समाज के लिए प्रेरणादायक है और उनके योगदान का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, सीएमएस डॉ. अमित राय ने सभी नर्सिंग कर्मियों को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका सबसे अहम होती है और उनके समर्पण से ही मरीजों को बेहतर उपचार और देखभाल मिल पाती है।
उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण
पूजा परमार राणा को मिला राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 का यह सम्मान उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए यह उपलब्धि नई प्रेरणा लेकर आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें समाज सेवा के लिए और अधिक प्रेरित करते हैं।
उत्तरकाशी की इस बेटी ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची सेवा और समर्पण किसी भी चुनौती से बड़ा होता है। दुर्गम पहाड़ों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई पूजा परमार राणा आज पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

