New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से गिरफ्तार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लोन ने राजधानी के कई संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों के साथ-साथ प्रमुख धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में सामने आया है कि लोन ने कालकाजी मंदिर, लोटस टेम्पल और छतरपुर मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के अलावा कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र की भी वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। इन सभी जगहों की जानकारी और वीडियो फुटेज पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं को भेजी गई थी, जिससे संभावित आतंकी हमलों की योजना बनाई जा सके।
ISI और TRF मॉडल पर नए आतंकी संगठन की साजिश
पूछताछ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की तर्ज पर एक नया आतंकी संगठन खड़ा करने की योजना बना रही थी। TRF पहले भी कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें पिछले साल पहलगाम में हुआ हमला भी शामिल है।
लोन का काम इस नए नेटवर्क के लिए जमीन तैयार करना और भारत के भीतर लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराना था। इसके लिए उसने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवाओं की भर्ती करने की भी कोशिश की।
पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से सीधा संपर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन सीधे पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स के संपर्क में था। इनमें आसिफ डार और सुमामा बाबर प्रमुख हैं, जो भारत में आतंकी गतिविधियों को निर्देशित कर रहे थे।
आसिफ डार, जो मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के सोपोर का निवासी है, फिलहाल पाकिस्तान में बैठकर टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था। वह @YD_17 नामक हैंडल का इस्तेमाल कर आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता था।
लोन अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार एन्क्रिप्टेड चैट आईडी बदलता रहता था, लेकिन अंततः एक मोबाइल नंबर के जरिए एजेंसियों को उसके नेटवर्क तक पहुंचने में सफलता मिली।
आतंकी प्रशिक्षण और हथियारों की जानकारी
पूछताछ में यह भी सामने आया कि शब्बीर लोन ने लश्कर-ए-तैयबा के कई प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए थे। उसने ‘दौरा-ए-आम’ नामक 21 दिन का बेसिक ट्रेनिंग कोर्स किया, जिसमें उसे छोटे हथियारों और ग्रेनेड के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।
इसके बाद उसने ‘दौरा-ए-खास’ नामक तीन महीने का एडवांस ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा किया, जिसमें AK-सीरीज राइफल, रॉकेट लॉन्चर, IED और लाइट मशीन गन (LMG) चलाने की ट्रेनिंग शामिल थी।
इसके अलावा, मुजफ्फराबाद स्थित कैंप में ‘दौरा-ए-सूफा’ के तहत उसे वैचारिक रूप से कट्टर बनाने और नए सदस्यों की भर्ती करने का प्रशिक्षण दिया गया।
बांग्लादेश में लॉन्चिंग बेस और नई पहचान
जांच एजेंसियों के अनुसार, ISI के निर्देश पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन को बांग्लादेश भेजा गया था, जहां उसने भारत के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के लिए एक नया बेस तैयार किया।
मार्च 2025 में वह अपने परिवार के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर सैदपुर (बांग्लादेश) पहुंचा और वहां एक ‘लॉन्चिंग बेस’ स्थापित किया। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने एक स्थानीय बांग्लादेशी महिला से शादी भी की, ताकि उस पर किसी को शक न हो।
भारत में भर्ती नेटवर्क तैयार करने की कोशिश
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन ने भारत के भीतर आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए युवाओं की भर्ती का काम भी शुरू कर दिया था। उसने जम्मू-कश्मीर के बाहर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवाओं को जोड़ने की कोशिश की, जिससे आतंकी गतिविधियों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैलाया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क अगर समय रहते पकड़ा न जाता, तो देश के कई हिस्सों में बड़े हमलों को अंजाम दिया जा सकता था।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, जांच जारी
शब्बीर लोन की गिरफ्तारी के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था।
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन का मामला यह दिखाता है कि आतंकवादी संगठन किस तरह नए-नए तरीकों से भारत में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से एक बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया, लेकिन यह घटना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
आने वाले समय में ऐसी साजिशों को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता, तकनीकी निगरानी और खुफिया समन्वय की जरूरत होगी।

