खटीमा दमगड़ा तलवार फार्म भूमि विवादFile Photo

खटीमा दमगड़ा तलवार फार्म भूमि विवाद अब एक गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभरता जा रहा है। दमगड़ा तलवार फार्म की लगभग सवा सौ एकड़ भूमि पर खड़ी फसल को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में ट्रैक्टरों से जोत दिए जाने के मामले ने क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब उत्तराखंड की राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।

क्षेत्रीय विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इसे नियमों और संवैधानिक प्रक्रियाओं की खुली अवहेलना करार देते हुए मुख्यमंत्री से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


“खड़ी फसल रौंदना अमानवीय और चिंताजनक” – भुवन कापड़ी

भुवन कापड़ी ने कहा कि खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवाना न केवल किसानों के अधिकारों का हनन है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का भी उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस कार्रवाई के पीछे उच्च न्यायालय का कोई आदेश था, तो प्रशासन उसे सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं रख रहा है।

कापड़ी ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट आदेश के, बिना नंबर प्लेट वाले दर्जनों ट्रैक्टरों को सवा सौ एकड़ में खड़ी फसल पर चलवाया गया, जो पूरी तरह से संदेहास्पद है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र के किसानों और आम लोगों में भय का माहौल बन गया है।


हाईकोर्ट आदेश पर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

खटीमा दमगड़ा तलवार फार्म भूमि विवाद को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन किस आदेश के तहत यह कार्रवाई कर रहा था। भुवन कापड़ी ने कहा कि अगर वास्तव में उच्च न्यायालय का कोई आदेश मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के तहत भूमि अधिग्रहण या कब्जा लेने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसमें नोटिस, मुआवजा और पारदर्शिता अनिवार्य है। लेकिन यहां न तो किसानों को संतोषजनक जानकारी दी गई और न ही कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई।


सीएम के गृह क्षेत्र के पास घटना, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

इस पूरे मामले ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया है क्योंकि यह घटना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह क्षेत्र से महज लगभग 500 मीटर की दूरी पर हुई है। भुवन कापड़ी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के गांव के इतने पास इस तरह की कार्रवाई हो सकती है, तो राज्य के दूरस्थ इलाकों में किसानों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं। इससे प्रदेश के किसानों में यह भरोसा कायम होगा कि सरकार उनके अधिकारों के साथ खड़ी है।


स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के साथ व्यवहार पर नाराजगी

भुवन कापड़ी ने यह भी कहा कि जिन परिवारों की फसल नष्ट की गई है, उनमें कई ऐसे परिवार शामिल हैं जिन्होंने दशकों पहले तराई क्षेत्र को बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय है और यह प्रशासनिक अहंकार को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत से इस भूमि को उपजाऊ बनाया, आज उन्हीं की खड़ी फसल को रौंद दिया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।


प्रशासन पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप

विधायक कापड़ी ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद अब स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि न तो प्रशासन सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर रहा है और न ही किसानों को कोई भरोसा दिया जा रहा है।

खटीमा दमगड़ा तलवार फार्म भूमि विवाद अब केवल जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, किसानों के अधिकार और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है।


राजनीतिक और सामाजिक असर बढ़ने के संकेत

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा तेजी से सामाजिक और राजनीतिक समर्थन हासिल कर रहा है। किसानों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है, वहीं विपक्ष इस मामले को सरकार की किसान-विरोधी नीति के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया, तो यह विवाद और गहराने की संभावना है।


खटीमा दमगड़ा तलवार फार्म भूमि विवाद खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने की घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भुवन कापड़ी द्वारा उठाए गए सवालों ने इस मुद्दे को राज्यव्यापी बहस का विषय बना दिया है। अब निगाहें मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

By Bhaskar

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