कोलकाता/मुजफ्फरनगर: पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में CBI ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे राजकुमार उर्फ राज सिंह को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया है।
CBI ने यह कार्रवाई स्थानीय पुलिस के सहयोग से की। जांच एजेंसी का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी इस पूरे हत्याकांड में अहम भूमिका निभा सकता है और उसे मुख्य शूटर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, हत्या के पीछे की असली वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
मुजफ्फरनगर से गिरफ्तारी, आरोपी पर मुख्य शूटर होने का शक
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी का वास्तविक नाम राजकुमार है, लेकिन उसे राज सिंह के नाम से भी जाना जाता है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में मुख्य शूटर की भूमिका में शामिल हो सकता है।
CBI ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि उससे पूछताछ के दौरान हत्या की साजिश, शामिल अन्य लोगों और हमले के पीछे के मकसद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
गिरफ्तार आरोपी को मंगलवार को कोलकाता स्थित विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है।
अब तक 4 गिरफ्तारियां, जांच का दायरा बढ़ा
इस हाई-प्रोफाइल मामले में इससे पहले बंगाल पुलिस तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी। बाद में मामले की जांच CBI को सौंपे जाने के बाद गिरफ्तार आरोपियों को CBI की हिरासत में लिया गया।
बताया गया है कि पहले गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी 23 मई तक CBI कस्टडी में हैं। अब राजकुमार की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह हत्या किसी व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक प्रतिशोध या किसी अन्य संगठित साजिश का हिस्सा थी।
चुनाव नतीजों के दो दिन बाद हुई थी हत्या
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने उस समय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी, क्योंकि यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के महज दो दिन बाद हुई थी।
जानकारी के अनुसार, 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे और 6 मई की रात को चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम स्थित अपने घर लौट रहे थे। वे एक राजनीतिक कार्यक्रम से वापस आ रहे थे, तभी रास्ते में उन पर हमला कर दिया गया।
सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई वारदात?
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि चंद्रनाथ रथ की गाड़ी का पीछा काफी देर से किया जा रहा था। इसी दौरान एक चारपहिया वाहन से उनकी कार की टक्कर हुई, जिससे वाहन की गति धीमी हो गई या रुक गई।
इसके तुरंत बाद दो मोटरसाइकिलों पर सवार हमलावरों में से एक आरोपी उनकी कार के पास पहुंचा और बेहद करीब से फायरिंग शुरू कर दी।
जांच के अनुसार, हमलावर ने करीब 10 राउंड गोलियां चलाईं। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि चंद्रनाथ रथ की मौके पर ही मौत हो गई।
यह हमला बेहद सुनियोजित माना जा रहा है, क्योंकि आरोपियों ने पीछा करने, वाहन रोकने और फायरिंग करने की पूरी रणनीति अपनाई थी।
ड्राइवर गंभीर रूप से घायल, हालत में सुधार
हमले में केवल चंद्रनाथ रथ ही नहीं, बल्कि उनके ड्राइवर बुद्धदेव बेरा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गोलीबारी के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
हालांकि, ताजा जानकारी के अनुसार उनकी स्वास्थ्य स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। जांच एजेंसियां ड्राइवर के बयान को भी मामले की अहम कड़ी मान रही हैं, क्योंकि वह हमले के दौरान मौके पर मौजूद थे।
हत्या के पीछे राजनीतिक एंगल या निजी दुश्मनी?
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब तक सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि हत्या के पीछे का असली मकसद क्या था। जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस मामले में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के एंगल की भी जांच हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक रूप से किसी भी मकसद की पुष्टि नहीं हुई है।
CBI की जांच अब इस दिशा में केंद्रित है कि हत्या केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए की गई थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
CBI जांच से बढ़ीं बड़ी खुलासों की उम्मीद
राजकुमार की गिरफ्तारी को चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब तक की सबसे अहम कार्रवाई माना जा रहा है। यदि आरोपी वास्तव में मुख्य शूटर है, तो उससे पूछताछ के बाद हत्या की साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका पर बड़ा खुलासा हो सकता है।
आने वाले दिनों में CBI की जांच और अदालत में पेश होने वाले तथ्यों पर इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
