हरिद्वार SIR विवाद

हरिद्वार: उत्तराखंड में हरिद्वार SIR विवाद (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सियासी बहस तेज होती जा रही है। हरिद्वार में कांग्रेस के कई विधायक एकजुट होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और SIR प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें रखीं। कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि कुछ मामलों में फर्जी आपत्तियां दर्ज कराकर पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी कड़ी है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से हटना केवल एक व्यक्ति के मतदान अधिकार को प्रभावित नहीं करता, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि फॉर्म-7 से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्ट्रेट पहुंचे कांग्रेस और बसपा विधायक

हरिद्वार SIR विवाद को लेकर हुई इस बैठक में कांग्रेस विधायक ममता राकेश, काजी निजामुद्दीन, फुरकान अहमद, रवि बहादुर और वीरेंद्र जाती शामिल रहे। उनके साथ बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद भी कलेक्ट्रेट पहुंचे।

विधायकों ने एडीएम जितेंद्र कुमार के साथ बैठक कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी शिकायतों और आपत्तियों को सामने रखा। बैठक का प्रमुख मुद्दा फॉर्म-7 के जरिए दर्ज की जा रही आपत्तियां रहीं। विधायकों ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल आपत्ति दर्ज होने के आधार पर न हटाया जाए और प्रत्येक शिकायत की नियमानुसार जांच की जाए।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम से शिकायतें दर्ज किए जाने के मामले सामने आए हैं। उनका दावा है कि ऐसी शिकायतें केवल आम मतदाताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बीएलओ और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े परिवारों के नाम भी शिकायतों में शामिल किए गए हैं।

काजी निजामुद्दीन ने उठाए गंभीर सवाल

मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही परिवार के अलग-अलग लोगों के नाम से शिकायतें दर्ज की गईं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में बीएलओ और पूर्व विधायक के परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर भी शिकायतें सामने आई हैं।

काजी निजामुद्दीन के मुताबिक, ऐसी शिकायतें केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की कई विधानसभा सीटों से इस तरह की शिकायतें मिलने की बात सामने आ रही है। उन्होंने हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा की कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत द्वारा उठाए गए मामलों का भी उल्लेख किया।

उनका आरोप है कि यदि किसी व्यक्ति के नाम पर बिना उसकी जानकारी या गलत आधार पर आपत्ति दर्ज की जाती है, तो इससे मतदाता के सामने अनावश्यक परेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसे में प्रत्येक शिकायत की सत्यता और शिकायतकर्ता की जानकारी की जांच बेहद जरूरी है।

प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा

कांग्रेस विधायकों की शिकायतों पर प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है। एडीएम जितेंद्र कुमार के अनुसार, SIR से जुड़े विषयों पर विधायकों के साथ चर्चा हुई है और फॉर्म-7 से संबंधित कई शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया में शिकायतों की सत्यता की जांच और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा दोनों अहम पहलू हैं।

उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्थाएं और शिकायत निवारण तंत्र भी बनाए गए हैं। विभिन्न जिलों में SIR से संबंधित दिशा-निर्देश, मतदाता सहायता और पुनरीक्षण संबंधी जानकारी प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है।

30 शिकायतों का मामला भी चर्चा में

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग कथित तौर पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कर रहे हैं। विधायक काजी निजामुद्दीन ने दावा किया कि एक व्यक्ति द्वारा करीब 30 शिकायतें दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है।

उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और जांच में आरोप गलत साबित होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

विधायक ने यह भी कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई है। यदि जांच के बाद शिकायतें झूठी पाई जाती हैं तो कांग्रेस कानूनी विकल्पों का सहारा लेने पर भी विचार कर सकती है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फर्जी शिकायत या किसी राजनीतिक दल की ओर से कथित साजिश जैसे आरोपों की वास्तविकता जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्थापित होगी। फिलहाल ये राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

भाजपा पर भी लगाए राजनीतिक आरोप

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित कोशिश के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है। उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े लोगों पर भी फॉर्म-7 के माध्यम से वोट कटवाने की कथित कोशिश में शामिल होने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनावी राजनीति में मतदाता सूची बेहद संवेदनशील विषय है और किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को इसका दुरुपयोग नहीं करने दिया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि जांच में किसी भी पक्ष की ओर से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

पहले भी सामने आया था SIR को लेकर विवाद

हरिद्वार SIR विवाद का यह मामला पहली बार राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बना है। इससे पहले हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने प्रेस वार्ता कर हरिद्वार SIR विवाद और फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

उन्होंने सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों पर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। अनुपमा रावत ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाने की चेतावनी भी दी थी।

ऐसे में अब कांग्रेस के कई विधायकों का एक साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचना इस मुद्दे के राजनीतिक रूप से और ज्यादा गंभीर होने का संकेत माना जा रहा है।

हरिद्वार SIR विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल?

मतदाता सूची का पुनरीक्षण किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की बुनियादी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान यदि गलत आपत्तियां, फर्जी शिकायतें या गलत पहचान के आधार पर नाम हटाने की कोशिश होती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

यही वजह है कि हरिद्वार में कांग्रेस विधायकों ने प्रशासन से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की जांच होगी और कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला होगा और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो शिकायतों के पीछे की मंशा पर भी सवाल उठेंगे।

फिलहाल हरिद्वार SIR विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में मतदाता सूची को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं, यही तय करेगा कि फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायतें महज राजनीतिक आरोप हैं या वास्तव में मतदाता सूची की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई है।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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