दिल्ली/ देहरादून: उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क को आधुनिक, तेज़ और यात्रियों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। नई दिल्ली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच हुई विस्तृत बैठक में राज्य की रेल परियोजनाओं, नई ट्रेनों, स्टेशन आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी विस्तार को लेकर कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इस बैठक ने केवल रेल सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद नहीं जगाई, बल्कि यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की धार्मिक, पर्यटन और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे अवसंरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड केवल एक पर्वतीय राज्य नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, आध्यात्मिकता और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में बढ़ती यात्री संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क व रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन की बढ़ती मांग के अनुरूप रेल नेटवर्क की जरूरत
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय रेल मंत्री को बताया कि उत्तराखंड हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत करता है। चारधाम यात्रा, हरिद्वार, ऋषिकेश, बाबा नीम करौली धाम (कैंची धाम), जागेश्वर धाम और अन्य धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा आगामी महाकुंभ-2027 को देखते हुए भी राज्य में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क समय रहते मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में यात्रियों पर दबाव और अधिक बढ़ेगा। इसलिए आधुनिक और तेज़ रेल सेवाओं का विस्तार केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि विकास की आवश्यकता भी है।
मुंबई-देहरादून वंदे भारत की मांग को मिला नया बल
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मुंबई-देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेन शुरू करने का रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई में बड़ी संख्या में उत्तराखंड मूल के लोग रहते हैं, जिनका अपने गृह राज्य से लगातार आवागमन बना रहता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई से हरिद्वार और रामनगर के लिए उपलब्ध रेल सेवाएं यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं। त्योहारों, छुट्टियों और चारधाम यात्रा सीजन के दौरान टिकटों की भारी कमी देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि मुंबई-हरिद्वार, मुंबई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाई जाए और मुंबई से सीधे देहरादून तक वंदे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा शुरू की जाए। उनका मानना है कि इससे न केवल प्रवासी उत्तराखंडवासियों को राहत मिलेगी बल्कि पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति मिलेगी।
देहरादून-कोटा ट्रेन को मुंबई तक बढ़ाने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री धामी ने बैठक में एक और महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि वर्तमान देहरादून-कोटा रेल सेवा को सूरत, वड़ोदरा और मुंबई तक विस्तारित किया जाए। इसके साथ ही हरिद्वार-मुंबई और रामनगर-मुंबई रेल सेवाओं को नियमित अथवा सप्ताह में कम से कम तीन दिन संचालित करने का भी आग्रह किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो उत्तराखंड और पश्चिम भारत के बीच रेल संपर्क पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो जाएगा।
ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर को लेकर भी हुई महत्वपूर्ण चर्चा
मुख्यमंत्री ने बैठक में ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध भी किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) और रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) के सहयोग से ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की व्यापक मास्टर प्लानिंग तैयार की जा रही है।
उन्होंने रेल मंत्री से अनुरोध किया कि इस परियोजना को गति देने के लिए RLDA को आवश्यक औपचारिक निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में ऋषिकेश का नियोजित और आधुनिक विकास सुनिश्चित हो सके।
महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को गति देने की मांग
बैठक में मुख्यमंत्री ने किच्छा-सितारगंज-खटीमा नई रेल लाइन परियोजना की पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन करने का आग्रह किया। साथ ही सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय किसानों की चिंताओं का समाधान करने पर भी बल दिया।
उन्होंने बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के कार्यों में तेजी लाकर शीघ्र रेल संचालन शुरू करने की भी मांग की। यह परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराने वाली सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में मानी जाती है।
बनबसा स्टेशन को मिली बड़ी राहत
मुख्यमंत्री धामी ने टनकपुर से संचालित त्रिवेणी एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस और दौराई एक्सप्रेस का अल्प ठहराव बनबसा रेलवे स्टेशन पर सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
उन्होंने बताया कि बनबसा भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण व्यापारिक और सामरिक क्षेत्र है, जहां भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की यूनिट भी स्थित है। इसके अलावा यहां से बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और पर्यटक भी यात्रा करते हैं।
मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव पर केंद्रीय रेल मंत्री ने सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसे क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी बनी सहमति
बैठक में मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण के अंतर्गत रायवाला से देहरादून तक लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया।
इसके अलावा हरिद्वार, हर्रावाला, देहरादून, खटीमा, लक्सर, रुड़की, टनकपुर और बनबसा रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण और विस्तार का भी प्रस्ताव रखा गया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति जताते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।
ग्रामीणों और पर्यटन हित में रेलवे फाटक खोलने की मांग
मुख्यमंत्री ने खटीमा-मझोला पीलीभीत रेलवे फाटक संख्या-18C को जनहित में पुनः खोलने का अनुरोध भी किया। उन्होंने कहा कि फाटक बंद होने से ग्रामीणों, किसानों और पर्यटकों को लंबा चक्कर लगाकर यात्रा करनी पड़ती है।
इस मार्ग पर स्थित कोकोडायल पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए रेलवे फाटक का संचालन दोबारा शुरू करना आवश्यक है। इस प्रस्ताव पर भी रेल मंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाया।
रेलवे बनेगा विकसित उत्तराखंड की नई ताकत
बैठक केवल परियोजनाओं की सूची तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन विस्तार और क्षेत्रीय संतुलित विकास का मजबूत आधार बनने जा रहा है।
यदि बैठक में रखे गए अधिकांश प्रस्ताव समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरते हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के लाखों यात्रियों, प्रवासी नागरिकों, व्यापारियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर रेलवे नेटवर्क राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा, जिससे रोजगार, निवेश और पर्यटन को नई उड़ान मिलने की पूरी संभावना है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा प्रस्तावों पर सकारात्मक आश्वासन ने यह उम्मीद भी मजबूत कर दी है कि उत्तराखंड की रेल परियोजनाएं अब तेज़ी से आगे बढ़ सकती हैं।
