किच्छा खान फार्म विवादFile Photo

नैनीताल: उत्तराखंड के US नगर जिले में चर्चित किच्छा खान फार्म विवाद अब न्यायपालिका की निगरानी में पहुंच गया है। संपत्ति के स्वामित्व, कथित कब्जे और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठे विवाद के बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित पक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों और न्यायिक आदेशों का सम्मान भी प्रशासन की समान जिम्मेदारी है।

किच्छा खान फार्म विवाद मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई, जहां कोर्ट ने उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता पक्ष को समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही राज्य सरकार और अन्य विपक्षी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हाईकोर्ट ने सुरक्षा को दी प्राथमिकता

इस मामले में सबसे अहम पहलू यह रहा कि अदालत ने संपत्ति विवाद से पहले मानव सुरक्षा को प्राथमिकता दी। याचिका में दावा किया गया था कि फार्म परिसर में मौजूद महिलाओं, बच्चों और बेजुबान पशुओं की सुरक्षा खतरे में है। अदालत ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को तत्काल आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

यह आदेश इस बात का संकेत है कि किसी भी संपत्ति विवाद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

एसडीएम और एसएचओ कोर्ट में हुए पेश

पूर्व आदेश के अनुपालन में किच्छा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) गौरव पांडे और थाना प्रभारी (एसएचओ) रवि कुमार व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि फार्म पर तनावपूर्ण स्थिति और संभावित विवाद को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 164 के तहत कार्रवाई की गई थी, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने कोर्ट को यह भी बताया कि जब उन्हें हाईकोर्ट तथा सिविल कोर्ट के आदेशों की जानकारी और प्रति प्राप्त हुई, तब तत्काल धारा 164 के तहत की गई कार्रवाई रोक दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष को संपत्ति पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई और सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई।

अधिकारियों का कहना था कि प्रारंभिक स्तर पर उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि संपत्ति का वास्तविक और वैध स्वामी कौन है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावे प्रस्तुत कर रहे थे। ऐसे में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए।

हाईकोर्ट की टिप्पणी— प्रशासन को बरतनी होगी अतिरिक्त सतर्कता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन को यह भी याद दिलाया कि वर्तमान समय में किसी भी संवेदनशील मामले को अत्यधिक सावधानी से संभालने की आवश्यकता है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सोशल मीडिया के दौर में छोटी-सी घटना भी व्यापक विवाद का रूप ले सकती है। इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ न्यायिक आदेशों के पालन और संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अदालत की यह टिप्पणी भविष्य में प्रशासनिक निर्णयों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि कानून लागू करते समय पारदर्शिता और संतुलन दोनों आवश्यक हैं।

क्या है पूरा किच्छा खान फार्म विवाद?

किच्छा खान फार्म विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सिकंदर आलम खान ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि किच्छा के पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म पर जबरन कब्जा किया गया।

याचिका के अनुसार यह फार्म उनकी बुआ कुलसुम खान का था। दावा किया गया कि वर्ष 2024 में कुलसुम खान ने अपनी पंजीकृत वसीयत के माध्यम से यह संपत्ति सायरा वाड्रा और अपने चचेरे भाई सिकंदर आलम खान के नाम कर दी थी। बाद में 18 दिसंबर 2025 को कुलसुम खान का निधन हो गया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि कुलसुम खान के निधन के बाद संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और दूसरे पक्ष ने फार्म पर अपना अधिकार जताते हुए कब्जा करने का प्रयास किया।

प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दूसरे पक्ष के लोग कई व्यक्तियों के साथ फार्म परिसर में पहुंचे और प्रशासन की मौजूदगी अथवा कथित मिलीभगत के बीच कब्जा कर लिया गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय परिसर में मौजूद पुरुषों को बाहर कर दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और वहां मौजूद पशुओं को परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इन आरोपों ने पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

हालांकि, प्रशासन ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना थी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तत्काल निर्णय लिया गया था।

सिविल कोर्ट के स्टे ऑर्डर का भी उल्लेख

याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान का दावा है कि उन्हें 11 जून 2026 को सक्षम सिविल कोर्ट से इस संपत्ति को लेकर स्टे ऑर्डर प्राप्त हो चुका था। उनका कहना है कि प्रशासन को इस आदेश की जानकारी भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया गया।

दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष यह रहा कि प्रारंभिक कार्रवाई के समय उन्हें स्टे आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी। बाद में जैसे ही न्यायालय के आदेश प्राप्त हुए, प्रशासन ने अपनी कार्रवाई में आवश्यक संशोधन करते हुए याचिकाकर्ता पक्ष को सुरक्षा उपलब्ध कराई।

संपत्ति विवाद से बढ़कर बन गया संवेदनशील कानूनी मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल संपत्ति के स्वामित्व का मामला नहीं रह गया है। इसमें उत्तराधिकार, वसीयत, न्यायालय के आदेशों के अनुपालन, प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक अधिकारों जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलू जुड़े हुए हैं।

अब हाईकोर्ट की निगरानी में यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति पर वैधानिक अधिकार किस पक्ष का है और क्या किसी स्तर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हुई है या नहीं।

आगे की सुनवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल किच्छा खान फार्म विवाद में हाईकोर्ट ने किसी पक्ष के स्वामित्व पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है, बल्कि सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार एवं अन्य पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।

आने वाले सप्ताहों में अदालत के समक्ष सभी पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद ही यह तय होगा कि संपत्ति पर वैधानिक अधिकार किसका है और प्रशासन की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी या नहीं।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हाईकोर्ट ने यह संदेश दिया है कि किसी भी संवेदनशील संपत्ति विवाद में न्यायिक आदेशों का सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासनिक निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यही कारण है कि इस मामले पर अब पूरे उत्तराखंड की नजरें टिकी हुई हैं।

By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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