देहरादून। उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती 2026 के साथ ही सरकार ने महिला एवं बाल विकास सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेशभर के 438 आंगनबाड़ी वर्कर और 2,773 आंगनबाड़ी सहायिकाओं के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कुपोषण से लड़ाई, पोषाहार वितरण की निगरानी, आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए।

विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में आयोजित इस समीक्षा बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं, आंगनबाड़ी सेवाओं और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को बच्चों और माताओं के लिए प्रभावी पोषण एवं देखभाल का मजबूत केंद्र बनाना है।
बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती 2026 को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि लंबे समय से रिक्त पड़े पदों के कारण प्रभावित हो रही सेवाओं को गति मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी औपचारिकताओं को तय समय सीमा में पूरा किया जाए।
हर महीने होगा बच्चों का वजन, कुपोषण की होगी सटीक पहचान
मंत्री रेखा आर्या ने आंगनबाड़ी सेवाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत प्रत्येक बच्चे का हर महीने अनिवार्य रूप से वजन किया जाए। उनका कहना था कि नियमित वजन से कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान संभव होगी, जिससे उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की पोषण योजनाओं का लाभ देकर स्वस्थ श्रेणी में लाया जा सकेगा।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हीला-हवाली स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी निगरानी में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पोषाहार वितरण में पारदर्शिता पर सरकार का विशेष जोर
बैठक में फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के माध्यम से वितरित किए जा रहे टेक होम राशन (THR) की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक वितरण का डेटा एफआरएस ट्रेकर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सभी जिलों का डेटा समय पर और सही तरीके से अपलोड होगा तो राज्य का रिकॉर्ड बेहतर रहेगा और केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट एवं सहायता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी इस व्यवस्था को गंभीरता से लागू कराए।
चुनावी ड्यूटी के बावजूद आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति अनिवार्य
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री रेखा आर्या ने इस बात पर भी चिंता जताई कि भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में ड्यूटी लगाए जाने के कारण कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां नियमित रूप से केंद्रों में उपस्थित नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिलों को तत्काल पत्र जारी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक आंगनबाड़ी वर्कर कार्य दिवस में कम से कम एक घंटे की अनिवार्य उपस्थिति अपने केंद्र पर दर्ज कराए और विभागीय कार्यों को भी समान रूप से पूरा करे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बच्चों और माताओं से जुड़े विभागीय कार्यों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
एक महीने में बनेंगे सभी बच्चों के आधार और आभा आईडी
बैठक में प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों के आधार कार्ड और आभा आईडी अगले एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से तैयार कराए जाएं। मंत्री ने कहा कि डिजिटल पहचान बनने से बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जा सकेगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा किया जाए।
रिक्तियां भरने से मजबूत होगी जमीनी व्यवस्था
मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में हजारों रिक्त पदों के कारण कई आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती 2026 में 438 आंगनबाड़ी वर्कर और 2,773 सहायिकाओं की भर्ती पूरी होने के बाद केंद्रों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इससे पोषण कार्यक्रमों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और प्रारंभिक बाल शिक्षा जैसी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सकेगा।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी व्यवस्था केवल एक सरकारी सेवा नहीं, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं—के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसलिए इस व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
पात्र लाभार्थियों तक हर हाल में पहुंचे योजनाओं का लाभ
बैठक के अंत में मंत्री रेखा आर्या ने शासन और जिला स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी भेदभाव और देरी के पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या योजनाओं के क्रियान्वयन में हीला-हवाली पाई गई तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। इसके लिए जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन सबसे जरूरी है।
राज्य सरकार के इस फैसले से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि उत्तराखंड में आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने, कुपोषण कम करने और महिला एवं बाल विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेज गति से काम किया जा रहा है। आने वाले समय में उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती 2026 के जरिए हजारों युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों और महिलाओं को भी बेहतर सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
