कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। दूसरे चरण के मतदान से पहले सोमवार शाम 5 बजे चुनाव प्रचार का शोर पूरी तरह थम गया। अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिक गई हैं, जहां मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
इस बार का चुनाव न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बंगाल में सत्ता परिवर्तन का सपना साकार करने के लिए आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरी है।
टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर
पश्चिम बंगाल में इस बार मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व में टीएमसी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। वहीं, प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में बीजेपी ने चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे Rajnath Singh और Yogi Adityanath ने भी राज्यभर में ताबड़तोड़ रैलियां और जनसभाएं कीं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन भी चुनावी मैदान में सक्रिय रहा, हालांकि मुख्य लड़ाई टीएमसी और बीजेपी के बीच ही सिमटी नजर आ रही है।
प्रचार में दिखा हाई-वोल्टेज राजनीतिक माहौल
दूसरे चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार अपने चरम पर रहा। राज्य के विभिन्न जिलों में विशाल जनसभाएं, रोड शो और नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं। राजनीतिक दलों ने स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक को चुनावी एजेंडे में शामिल किया।
टीएमसी ने जहां अपनी सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जनता के सामने रखा, वहीं बीजेपी ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का चुनाव पूरी तरह से “हाई-वोल्टेज” रहा, जिसमें सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक हर मंच पर जबरदस्त प्रचार देखने को मिला।
पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान, जनता में उत्साह
चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण में 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है।
उच्च मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि राज्य की जनता राजनीतिक रूप से जागरूक है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। कई संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
29 अप्रैल को दूसरे चरण की परीक्षा
अब दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जिसके लिए चुनाव प्रचार पूरी तरह बंद हो चुका है। इस चरण में कई महत्वपूर्ण सीटों पर मतदान होगा, जिन पर सभी दलों की नजरें टिकी हैं।
चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती, बूथ स्तर पर निगरानी और ईवीएम की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।
4 मई को आएंगे नतीजे, किसके सिर सजेगा ताज?
दोनों चरणों के मतदान के बाद 4 मई को मतगणना की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। यह दिन तय करेगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कौन काबिज होगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है और नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा असर
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजे केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिलेगा। बीजेपी के लिए यह चुनाव पूर्वी भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर है, जबकि टीएमसी के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की बड़ी परीक्षा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का दूसरा चरण राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होने जा रहा है। प्रचार के थमने के साथ अब गेंद पूरी तरह से मतदाताओं के पाले में है।
29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

