नई दिल्ली/गुवाहाटी: Pawan Khera vs Himanta Biswa Sarma असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में जब महज 48 घंटे का समय शेष है, तब देश की राजधानी में एक बड़ी पुलिसिया कार्रवाई ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मंगलवार सुबह असम पुलिस की एक टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा के निजामुद्दीन ईस्ट स्थित आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर (FIR) के सिलसिले में की गई है।
खाली हाथ लौटी पुलिस, हैदराबाद में हैं खेड़ा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब पुलिस की टीम खेड़ा के आवास पर पहुँची, तब कांग्रेस नेता वहां मौजूद नहीं थे। पार्टी सूत्रों ने पुष्टि की है कि पवन खेड़ा वर्तमान में सांगठनिक कार्यों के सिलसिले में हैदराबाद में हैं। हालांकि, पुलिस ने उनके आवास पर मौजूद कर्मियों से पूछताछ की और मामले से संबंधित जांच पड़ताल की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब असम में चुनावी शोर अपने चरम पर है और दो दिन बाद, यानी 9 अप्रैल को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है।
विवाद की जड़: तीन पासपोर्ट और 52,000 करोड़ का आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते रविवार को हुई, जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कथित तौर पर तीन अलग-अलग पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप जड़ा कि सरमा परिवार के अमेरिका में लगभग 52,000 करोड़ रुपये के व्यावसायिक हित जुड़े हुए हैं।
इन आरोपों के तुरंत बाद, सोमवार को रिनिकी भुइयां सरमा ने इन दावों को निराधार और मानहानिकारक बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर असम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की।
मुख्यमंत्री का पलटवार: ‘पवन पेड़ा बन जाएगा’
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में सरमा ने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान खेड़ा के नाम पर तंज कसते हुए कहा, “पवन खेड़ा, पवन पेड़ा बन जाएगा।” उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में कांग्रेस नेता के प्रति सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जिन दस्तावेजों के आधार पर उनके परिवार का संबंध दुबई के अपार्टमेंट्स से जोड़ रही है, वे दरअसल ‘Scribd’ जैसे डॉक्यूमेंट-शेयरिंग प्लेटफॉर्म से चोरी किए गए फर्जी कागजात हैं। सरमा ने घोषणा की है कि वे इस मामले में खेड़ा के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
चुनावी माहौल में ‘निजी हमलों’ की राजनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान से ठीक दो दिन पहले इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप का दौर मतदाताओं के मूड को प्रभावित कर सकता है। हिमंत बिस्वा सरमा, जो राज्य में भाजपा की सत्ता बरकरार रखने और अपने दूसरे कार्यकाल के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, ने इस मुद्दे को ‘असम की अस्मिता’ और ‘महिला के सम्मान’ से जोड़ दिया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस इसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करार दे रही है। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का कहना है कि जब भी भाजपा किसी चुनाव में घिरती नजर आती है, वह केंद्रीय या राज्य पुलिस का सहारा लेकर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास करती है।
डाटा सुरक्षा और दस्तावेजों की वैधता पर सवाल
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उनके परिवार की गोपनीयता का उल्लंघन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि जो प्रॉपर्टी दस्तावेज दिखाए जा रहे हैं, वे अवैध रूप से हासिल किए गए हैं और उनमें कोई सच्चाई नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह केवल चुनाव से पहले उनकी छवि धूमिल करने की एक सुनियोजित साजिश है।
महत्वपूर्ण तिथियां और राजनीतिक समीकरण
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए सियासी जंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है:
- मतदान की तिथि: 9 अप्रैल
- परिणाम की तिथि: 4 मई
भाजपा जहां अपने विकास कार्यों और ‘डबल इंजन’ सरकार के भरोसे मैदान में है, वहीं कांग्रेस भ्रष्टाचार और निजी संपत्ति के इन नए खुलासों को हथियार बनाकर सत्ता विरोधी लहर पैदा करने की कोशिश कर रही है।
पवन खेड़ा के घर हुई इस छापेमारी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दो दिनों में असम की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने वाली है। Pawan Khera vs Himanta Biswa Sarma की यह कानूनी लड़ाई अब सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका फैसला 4 मई को मतपेटियों से निकलने वाले परिणामों में भी झलकेगा। क्या कांग्रेस के ये आरोप भाजपा के किले में सेंध लगा पाएंगे, या मुख्यमंत्री का पलटवार उन्हें फिर से सत्ता की कुर्सी तक ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
