देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 14 अप्रैल को प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे से पहले राज्य में आपदा राहत को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिछले साल मॉनसून आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की राशि अभी तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है।
पीएम मोदी करेंगे एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन और जनसभा को संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरे को चुनावी और विकासात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, दौरे से पहले राहत पैकेज की स्थिति ने सरकार के सामने असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपदा के बाद पीएम ने किया था 1200 करोड़ का ऐलान
अगस्त 2025 में उत्तराखंड के धराली, हर्षिल समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण व्यापक तबाही हुई थी। 11 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य का दौरा कर आपदा की समीक्षा की थी और तत्काल राहत के रूप में 1200 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी।
इस आपदा में उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उधम सिंह नगर और देहरादून जैसे जिलों में भारी नुकसान हुआ था। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने नुकसान का आकलन करते हुए केंद्र सरकार को 5702.15 करोड़ रुपये का मेमोरेंडम भेजा था।
PDNA रिपोर्ट में 15 हजार करोड़ से अधिक नुकसान का दावा
राहत पैकेज जारी करवाने के लिए राज्य सरकार ने पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (PDNA) कराया। अक्टूबर में गठित टीमों ने सभी प्रभावित जिलों का सर्वे किया और रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी।
इस रिपोर्ट के अनुसार:
- प्रत्यक्ष नुकसान: 3,792.38 करोड़ रुपये
- अप्रत्यक्ष नुकसान: 312.19 करोड़ रुपये
- पुनर्वास और पुनर्निर्माण की आवश्यकता: 10,998.95 करोड़ रुपये
कुल मिलाकर राज्य को 15,103.52 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसके बावजूद अब तक प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1200 करोड़ रुपये की राशि राज्य को प्राप्त नहीं हो पाई है।
सिर्फ 113.90 करोड़ की आंशिक सहायता मिली
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत 113.90 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है, लेकिन यह राशि घोषित पैकेज के मुकाबले काफी कम मानी जा रही है।
सरकार का दावा – अंतिम चरण में है प्रक्रिया
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मुख्य सचिव की भारत सरकार के साथ बैठक हुई है और जल्द ही राज्य को धनराशि मिलने की उम्मीद है।
उनका कहना है कि प्रशासनिक औपचारिकताओं के चलते देरी हुई है, लेकिन अब प्रक्रिया तेज हो गई है।
कांग्रेस का हमला – ‘डबल इंजन सरकार असंवेदनशील’
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद राहत राशि का अब तक न मिलना बेहद गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के दावे के बावजूद आपदा प्रभावित लोगों को समय पर मदद नहीं मिल रही, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
बीजेपी का पलटवार – कांग्रेस कर रही राजनीति
वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है। प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर हालात का जायजा ले चुके हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ राहत राशि जारी हो चुकी है और बाकी प्रक्रिया में है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों के बीच बढ़ी उम्मीदें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में राहत पैकेज को लेकर असंतोष और सवाल दोनों मौजूद हैं। एक ओर सरकार प्रक्रिया पूरी होने का भरोसा दिला रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने में जुटा है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पीएम के दौरे से पहले या उसके तुरंत बाद उत्तराखंड को घोषित राहत राशि मिल पाएगी या नहीं।

