Assam Elections 2026Photo: ANI

Assam Elections 2026 के नजदीक आते ही राज्य की राजनीति में बयानबाजी का स्तर लगातार तीखा होता जा रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच चुकी है।

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनका “बाल बांका” करने के लिए कांग्रेस नेताओं को नया जन्म लेना पड़ेगा।


हिमंत का पलटवार: “सात जन्म बाद भी कुछ नहीं कर पाएंगे”

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें राहुल ने उन्हें जेल भेजने की बात कही थी।

सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को लोग “पप्पू” कहते हैं और Gaurav Gogoi को “छोटा पप्पू” बताया जाता है।

उन्होंने कहा,
मुझे गिरफ्तार करने के लिए इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और राहुल गांधी को नया जन्म लेना पड़ेगा। इस जन्म में तो यह संभव नहीं है। सात जन्म के बाद ही वे मेरा बाल बांका कर पाएंगे।”

यह बयान असम की राजनीति में एक बड़े विवाद का कारण बन गया है और चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।


राहुल गांधी के आरोप: “देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री”

दरअसल, यह पूरा विवाद राहुल गांधी के हालिया असम दौरे से शुरू हुआ, जहां उन्होंने गुवाहाटी समेत कई जगहों पर जनसभाएं कीं।

राहुल गांधी ने अपने भाषणों में हिमंत बिस्व सरमा को “देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री” करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मिलकर असम में “लैंड एटीएम” चला रहे हैं।

राहुल का दावा था कि राज्य में लोगों की जमीन छीनकर बड़े कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर हिमंत बिस्व सरमा को जेल जाना पड़ेगा और कोई भी उन्हें बचा नहीं पाएगा।


“खुद जमानत पर हैं, दूसरों को जेल भेजने की बात करते हैं”

राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए हिमंत बिस्व सरमा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद कई मामलों में जमानत पर बाहर हैं, फिर भी दूसरों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं

सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता अब इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लेती।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वे पहले कांग्रेस का हिस्सा थे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इस वजह से कांग्रेस उन्हें “धोखेबाज” मानती है, लेकिन जनता उनके काम के आधार पर फैसला करेगी।


चुनावी रणनीति: दोनों दलों की अलग-अलग प्राथमिकताएं

असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

एक तरफ कांग्रेस, राहुल गांधी के नेतृत्व में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा, हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में सरकार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए आक्रामक प्रचार कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में विकास के मुद्दों के साथ-साथ व्यक्तिगत हमले और आरोप-प्रत्यारोप भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।


पुराना टकराव, नया चुनावी दौर

हिमंत बिस्व सरमा और राहुल गांधी के बीच यह टकराव नया नहीं है। 2024-2025 के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी बयानबाजी हो चुकी है।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। उस समय भी गिरफ्तारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर निशाना साधा था।

अब जब असम में चुनाव नजदीक हैं, तो यह टकराव और तेज होता नजर आ रहा है।


क्या कहता है राजनीतिक समीकरण?

असम में भाजपा पिछले कुछ वर्षों से मजबूत स्थिति में रही है। हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने विकास और प्रशासनिक सुधारों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया है।

वहीं कांग्रेस, राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। राहुल गांधी के दौरे और उनके आक्रामक तेवर इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में जनता के सामने विकास बनाम आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा प्रमुख रहेगा।


Assam Elections 2026 के मद्देनजर असम की राजनीति में गर्मी लगातार बढ़ रही है। हिमंत बिस्व सरमा और राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग ने चुनावी माहौल को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

अब देखना यह होगा कि जनता इन आरोप-प्रत्यारोपों को किस नजर से देखती है और चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं। फिलहाल, असम की सियासत में बयानबाजी का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

By Bhaskar

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