देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून में LPG गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि गैस की कालाबाजारी में संलिप्त पाए जाने वाले एजेंसी स्वामियों को सीधे जेल भेजा जाएगा।
इस फैसले के बाद जिले में गैस एजेंसियों और कालाबाजारी में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने न केवल निगरानी बढ़ा दी है, बल्कि वितरण प्रणाली को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
जिलाधिकारी का सख्त रुख, हर गतिविधि पर नजर
कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की सभी गैस एजेंसियों पर अधिकारियों को तैनात किया जाए, जो एजेंसी की हर गतिविधि—स्टॉक, वितरण और बुकिंग—पर नजर रखेंगे।
इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के 30 अधिकारियों को अलग-अलग एजेंसियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे।
कालाबाजारी में संलिप्त एजेंसी मालिकों पर सीधा मुकदमा
जिलाधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिए कि छापेमारी के दौरान पकड़े गए अवैध गैस सिलेंडरों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि वे किस एजेंसी से जुड़े हैं।
यदि किसी एजेंसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके मालिक को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए और सीधे जेल भेजा जाए।
यह आदेश प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है, जिससे स्पष्ट है कि देहरादून में LPG गैस सिलेंडर कालाबाजारी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब केवल होम डिलीवरी से मिलेगा गैस सिलेंडर
प्रशासन ने गैस वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी एजेंसी या गोदाम से सीधे उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया जाएगा।
सभी उपभोक्ताओं को देहरादून में LPG गैस सिलेंडर केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही मिलेगा और इसके लिए OTP आधारित सिस्टम अनिवार्य किया गया है।
इस व्यवस्था से एजेंसियों पर लगने वाली भीड़ में कमी आई है और कानून-व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

बैकलॉग और मैन्युअल एंट्री पर सख्ती
बैठक में यह सामने आया कि तकनीकी समस्या के कारण कुछ दिनों तक गैस बुकिंग सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी रही, जिसके चलते मैन्युअल वितरण किया गया।
करीब 25 हजार से अधिक एंट्रियां अभी भी सॉफ्टवेयर में अपडेट नहीं हैं। इस पर जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि सभी एजेंसियां आज ही इन एंट्रियों को अपडेट करें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
इसके अलावा 25 दिन (शहरी क्षेत्र) और 45 दिन (ग्रामीण क्षेत्र) की एडवांस बुकिंग का अलग-अलग विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी जिला पूर्ति अधिकारी को दिए गए हैं।
कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन
जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
अब तक देहरादून में LPG गैस सिलेंडर कालाबाजारी के खिलाफ 5 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 3 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इसके अलावा:
- 150 घरेलू गैस सिलेंडर
- 139 व्यवसायिक सिलेंडर
- 7 छोटे सिलेंडर
जब्त किए गए हैं।
इन कार्रवाइयों के बाद गैस कालाबाजारी में शामिल लोगों के बीच भय का माहौल बन गया है।
QRT टीम की निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था
जिले की 70 गैस एजेंसियों के लिए QRT टीम का गठन किया गया है, जो नियमित निरीक्षण कर रही है।
टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे एजेंसियों के स्टॉक, वितरण और बैकलॉग का निरीक्षण कर निर्धारित प्रारूप में प्रतिदिन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही एजेंसियों पर उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक जानकारी जैसे बुकिंग नंबर, जागरूकता संदेश और फ्लेक्सी बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा विभिन्न उप जिलाधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, नगर निगम और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
देहरादून में LPG गैस सिलेंडर की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन का यह सख्त रुख आम उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
एजेंसी मालिकों के खिलाफ सीधे जेल की कार्रवाई और होम डिलीवरी को अनिवार्य बनाने जैसे फैसलों से गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन की यह सख्ती कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे पूरी तरह कालाबाजारी पर रोक लग पाती है या नहीं।
