देहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शनदेहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शन

देहरादून: देहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शन के तहत गुरुवार को राजधानी की सड़कों पर श्रमिक संगठनों का व्यापक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर सीटू, एटक, इंटक और अन्य संबद्ध संगठनों के साथ ‘बस्ती बचाओ आंदोलन’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने श्रम संहिताओं, किसानों से जुड़े मुद्दों और राज्य में बढ़ते अपराध के खिलाफ रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया।

रैली राजपुर रोड स्थित घंटाघर से शुरू होकर एश्ले हॉल होते हुए सचिवालय की ओर बढ़ी, लेकिन सचिवालय से पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

श्रम संहिताओं को लेकर तीखा विरोध

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं मजदूर हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि इन संहिताओं से श्रमिकों के अधिकार सीमित हो रहे हैं और यूनियन बनाने की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।

भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान संसद में पर्याप्त चर्चा के बिना श्रम कानूनों में व्यापक बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, लगभग 40 श्रम कानूनों को समाहित कर चार श्रम संहिताएं बनाई गईं, जो श्रमिक वर्ग के लिए प्रतिकूल साबित होंगी।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1886 में श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर संघर्ष किया था और कई लोगों ने शहादत दी थी। उसी संघर्ष की स्मृति में दुनिया भर में हर साल मई दिवस मनाया जाता है। उनका आरोप था कि नई श्रम संहिताओं से 8 घंटे के कार्यदिवस की अवधारणा कमजोर पड़ रही है और श्रमिकों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सचिवालय कूच पर पुलिस की रोक

देहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। जैसे ही रैली सचिवालय की ओर बढ़ी, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति सचिवालय की ओर कूच की इजाजत नहीं दी जा सकती।

रोक के बाद प्रदर्शनकारी वहीं सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले इस धरने के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और बाद में प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

किसानों और ट्रेड डील पर भी उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हालिया ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा और छोटे किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले व्यापक स्तर पर किसानों और कृषि विशेषज्ञों से परामर्श करे।

राज्य स्तर के मुद्दे भी बने केंद्र में

देहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शन केवल राष्ट्रीय नीतियों तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड में कथित अतिक्रमण हटाओ अभियानों के दौरान गरीबों के विस्थापन, बढ़ते अपराध और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया।

वक्ताओं ने कहा कि राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, भोजन माताओं, बैंक कर्मचारियों, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों, चाय बागान के संविदा श्रमिकों और बिजली क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को विभिन्न स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इन वर्गों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करने की मांग की।

व्यापक भागीदारी, संयुक्त संघर्ष का आह्वान

रैली में विभिन्न राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने इसे श्रमिकों, किसानों और गरीब तबकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त संघर्ष की शुरुआत बताया।

आयोजकों का कहना था कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की भी घोषणा की।

प्रशासन की सतर्कता, स्थिति रही नियंत्रित

जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

देहरादून ट्रेड यूनियन प्रदर्शन ने एक बार फिर श्रम संहिताओं और आर्थिक नीतियों को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को राज्य की राजधानी में मुखर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन मांगों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है और क्या संवाद की कोई प्रक्रिया शुरू होती है।


By Bhaskar

Bhaskaranand Founder, Editor & Content Strategist | Bugyal News भास्करानन्द एक पत्रकार, कंटेंट क्रिएटर और मीडिया प्रोफेशनल हैं, जो उत्तराखंड, राष्ट्रीय समाचार, जनसरोकार, संस्कृति, पर्यटन, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं। वे डिजिटल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भास्करानन्द ने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे बच्चों और युवाओं के लिए दो दर्जन से अधिक थिएटर कार्यशालाओं में थिएटर मेंटर के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा रचनात्मक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े रहे हैं। Bugyal News के संस्थापक एवं संपादक के रूप में उनका उद्देश्य उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को तेज़, सटीक और जनहितकारी रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। उनकी लेखनी में जमीनी मुद्दों, विकास, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और जनकल्याण से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिलता है। Contact 📧 Email: anandbhaskar462@gmail.com 🌐 Website: bugyalnews.com

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