उत्तराखंड कानून व्यवस्था और गणेश गोदियाल के बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर में हुई तीन महिलाओं की हत्या तथा पौड़ी जिले के कोटद्वार प्रकरण का हवाला देते हुए सरकार को कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल करार दिया।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सरकार कठघरे में
अपने क्षेत्रीय भ्रमण से लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में एक सप्ताह के भीतर महिलाओं के खिलाफ तीन जघन्य हत्याएं होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था के धराशायी होने का प्रमाण हैं। गोदियाल के अनुसार, राज्य सरकार का अपराधियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
कानून व्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण खत्म: गोदियाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और सरकार केवल मूकदर्शक बनी हुई है। गोदियाल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में जनता की सुरक्षा नहीं, बल्कि सत्ता में बने रहने के राजनीतिक हथकंडे शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे प्रदेश के विकास और कानून व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय जमीनों को खुर्द-बुर्द करने, नदियों में अवैध खनन के लिए गड्ढे बनाने और शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने में व्यस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक शराब की दुकान के बदले चार नई दुकानें खोली जा रही हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना और अधिक कमजोर हो रहा है।
राजनीतिक विरोधियों को दबाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार राजनीतिक विरोधियों को समाप्त करने की योजनाओं में लगी हुई है। गोदियाल के अनुसार, सरकार के पास प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और बेरोजगारों के लिए कोई ठोस विजन नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार का पूरा फोकस सत्ता संरक्षण पर हो, तो कानून व्यवस्था और जनहित की अनदेखी होना स्वाभाविक है।
कोटद्वार विवाद का जिक्र, सांप्रदायिक सौहार्द पर चिंता
गणेश गोदियाल ने पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र में कपड़े की दुकान से ‘बाबा’ शब्द हटाए जाने को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कोटद्वार के दो युवाओं ने इंसानियत और सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अराजक तत्वों को कोटद्वार भेजकर उत्तराखंड का भला किया जा सकता है।
जनता का विश्वास खो चुकी है सरकार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि मौजूदा राज्य सरकार जनता का विश्वास पूरी तरह खो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब समझ चुकी है कि यह सरकार सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। गोदियाल के मुताबिक, जब जनता का भरोसा खत्म हो जाए, तो सरकार का नैतिक अधिकार भी समाप्त हो जाता है।
नए चुनाव की मांग
गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि सरकार में जरा-सी भी नैतिकता बची है, तो पूरी कैबिनेट को इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि प्रदेश में नए सिरे से चुनाव कराए जा सकें। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस जनता के इस भरोसे पर खरा उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
उत्तराखंड कानून व्यवस्था और गणेश गोदियाल के बयान के इस तीखे हमले के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है। वहीं, आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और जनता के बीच अपना भरोसा कैसे बहाल करती है।

