देहरादून | देहरादून नशा मुक्ति अभियान: जनपद में नशे के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया देहरादून नशा मुक्ति अभियान अब ज़मीनी स्तर पर असर दिखाने लगा है। रायवाला स्थित ओल्ड एज होम परिसर में संचालित जनपद के प्रथम राजकीय नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से अब तक 7 से अधिक व्यक्तियों को सफलतापूर्वक नशामुक्त कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है।
इसी क्रम में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में एन्कॉर्ड (NCORD) जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की रोकथाम, मांग-आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना, नशामुक्ति सेवाओं को सुदृढ़ करना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संसाधनों को प्रभावी बनाना रहा।
नशा मुक्ति केंद्र से मिल रहे सकारात्मक परिणाम
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि रायवाला स्थित राजकीय नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में पूर्ण क्षमता पर संचालित हो रहा है। यहां नशे की लत से ग्रसित व्यक्तियों का वैज्ञानिक पद्धति से उपचार, नियमित काउंसलिंग और पुनर्वास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि इस केंद्र से अब तक 7 से अधिक लोगों को नशे की लत से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर किया गया है। यह उपलब्धि जिले के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसे भविष्य में अन्य जनपदों में भी अपनाया जा सकता है।
एम्स ऋषिकेश से एमओयू, गंभीर मामलों को मिलेगा बेहतर इलाज
नशे से पीड़ित गंभीर मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एम्स ऋषिकेश से एमओयू किया गया है। इसके अंतर्गत एम्स में 7 दिन के लिए 10 बेड इंटेंसिव थेरेपी हेतु आरक्षित किए गए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि नशे के गंभीर मामलों में समय की कमी इलाज में बाधा न बने।
एंटी ड्रग हेल्पलाइन और फॉलो-अप काउंसलिंग
जनसहभागिता को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एंटी ड्रग हेल्पलाइन नंबर 9625777399 शुरू किया गया है। इस हेल्पलाइन पर आम नागरिक नशे से संबंधित सूचना, सहायता और परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्र से उपचार के बाद बाहर निकलने वाले व्यक्तियों की निरंतर फॉलो-अप काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे दोबारा नशे की गिरफ्त में न आएं और समाज में स्थायी रूप से पुनर्वासित हो सकें।
फर्जी और मानकविहीन नशा मुक्ति केंद्रों पर सख्ती
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना पंजीकरण और मानकों के विपरीत संचालित नशा मुक्ति केंद्रों पर छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कागजों में चल रहे फर्जी केंद्र न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि नशे से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे केंद्रों का पंजीकरण रद्द कर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
स्कूल-कॉलेजों में एंटी ड्रग कमेटियां सक्रिय
नशे की रोकथाम को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए जनपद के सभी स्कूलों और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की भागीदारी वाली एंटी ड्रग कमेटियों का गठन किया गया है।
ये कमेटियां उप जिलाधिकारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ नियमित समन्वय में काम कर रही हैं। शिक्षण संस्थानों में रेंडम ड्रग सैंपलिंग अभियान भी संचालित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद मिल रही है।
नर्सरी से ही नशे के खिलाफ जागरूकता
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि स्कूलों में नियमित काउंसलिंग कार्यक्रम संचालित हों। विशेष रूप से नर्सरी और छोटी कक्षाओं के बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए।
उनका कहना था कि यदि बचपन से ही सही संस्कार और जानकारी दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी को नशे से पूरी तरह दूर रखा जा सकता है।
सीसीटीवी, ड्रग टेस्टिंग और निगरानी तंत्र मजबूत
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जनपद के सभी शैक्षणिक संस्थानों, होटल, कैफे, पीजी, अतिथि गृह और मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।
इसके अलावा, यातायात चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट, ओवर-स्पीड और ट्रिपल राइडिंग की जांच के साथ-साथ ड्रग टेस्टिंग अभियान भी चलाया जा रहा है।
मानस हेल्पलाइन 1933 के प्रचार पर जोर
जिलाधिकारी ने केन्द्रीयकृत मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया। समाज कल्याण अधिकारी को सार्वजनिक स्थलों और मुख्य शिक्षा अधिकारी को सभी स्कूलों में इस हेल्पलाइन का प्रचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सप्लाई चेन तोड़ने की रणनीति
डीएम ने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और औषधि नियंत्रक सहित सभी प्रवर्तन एजेंसियों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पिछले 10 वर्षों के डेटा का विश्लेषण कर ड्रग नेटवर्क और लिंकिजेस की पहचान करते हुए सख्त कार्रवाई करने को कहा।
कुल मिलाकर, देहरादून नशा मुक्ति अभियान अब केवल एक प्रशासनिक प्रयास नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक मजबूत मॉडल बनता जा रहा है। नशा मुक्ति केंद्रों की सफलता, फर्जी संस्थानों पर सख्ती और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई रणनीति यह संकेत देती है कि जिला प्रशासन नशामुक्त जनपद के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
