उत्तराखंड सहकारी समितियांPhoto: @uttrakhandcooperative

देहरादून: उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र (उत्तराखंड सहकारी समितियां) को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़े फैसलों की रूपरेखा तैयार कर ली है। राज्य में सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी बनाने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

यह बैठक सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत की अध्यक्षता में उनके शासकीय आवास पर हुई, जिसमें सहकारिता विभाग से जुड़े कई अहम मुद्दों और योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।


643 बहुउद्देश्यीय पैक्स (PACS) समितियों के गठन पर फोकस

बैठक के दौरान बताया गया कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 643 बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें से अब तक 621 PACS का गठन पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष समितियों के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद ने जानकारी दी कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए PACS की भूमिका बेहद अहम है। इन समितियों के जरिए किसानों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को वित्तीय और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।


अनाज भंडारण योजना से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

राज्य सरकार सहकारी क्षेत्र में अनाज भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। भंडारण योजना के तहत हरिद्वार जिले की चार PACS में 1000 मैट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जाने की योजना है। इसके लिए भूमि का चयन कर डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है।

इसके अलावा, राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में 95 विकास केंद्रों की खाली भूमि पर 50 से 500 मैट्रिक टन क्षमता के कुल 95 गोदाम बनाए जाने की कार्यवाही चल रही है। इससे किसानों को फसल भंडारण की बेहतर सुविधा मिलेगी और उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।


जिला सहकारी बैंकों में 177 पदों पर होगी भर्ती

बैठक में सहकारी बैंकों में मानव संसाधन की कमी पर भी गंभीर चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि जिला सहकारी बैंकों में वर्ग-एक, वर्ग-दो और वर्ग-तीन के कुल 177 पद खाली हैं। इन पदों पर IBPS के माध्यम से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सरकार का मानना है कि बैंकों में पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती से सहकारी बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और आम लोगों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।


350 प्रोफेशनल सचिवों की नियुक्ति का फैसला

सहकारिता व्यवस्था को पेशेवर बनाने के उद्देश्य से सरकार कैडर नियमावली में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत 350 प्रोफेशनल सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। यह सचिव आधुनिक प्रबंधन, लेखा प्रणाली और डिजिटल कार्यप्रणाली में दक्ष होंगे, जिससे सहकारी समितियों की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।


सहकारी कानूनों में संशोधन की तैयारी

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सहकारी समिति अधिनियम-2003 और नियमावली-2004 में समय की जरूरत के अनुसार संशोधन किया जाएगा। इसके लिए एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी सिफारिशों और सुझावों का संकलन कर शासन को अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है।

इन संशोधनों का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही तय करना और सदस्यों के हितों की रक्षा करना है।


डिजिटलीकरण से बदलेगी सहकारिता की तस्वीर

निबंधक सहकारिता मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण, मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण और शासन स्तर पर सुधारात्मक कदमों से सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिल रही है। ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शी प्रक्रियाओं से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और जनता का भरोसा मजबूत होगा।


गुजरात में प्रस्तावित सहकारिता सम्मेलन की तैयारियां तेज

बैठक में फरवरी माह में गुजरात में प्रस्तावित राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सम्मेलन से जुड़े सभी कार्य बिंदुओं पर समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी की जाएं।

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन उत्तराखंड की सहकारिता नीति, नवाचार और उपलब्धियों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर है।


तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों में भागीदारी

बैठक में तीन बहु-राज्य सहकारी समितियों के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। इनमें एनसीओएल नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट समिति और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के साथ समझौते की प्रक्रिया शामिल है। इससे राज्य के किसानों और सहकारी संस्थाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।


आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर मजबूत कदम

कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार के ये फैसले उत्तराखंड सहकारी समितियां को आर्थिक, संरचनात्मक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। PACS का विस्तार, भंडारण क्षमता में वृद्धि, प्रोफेशनल स्टाफ की नियुक्ति और कानूनों में सुधार से सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य के किसान, ग्रामीण क्षेत्र और सहकारी संस्थाएं सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी।

By Bhaskar

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