नई दिल्ली। देश की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था अब एक नए और हाईटेक दौर में प्रवेश कर चुकी है। दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी की आंखों पर दिख रहा काला चश्मा महज फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि आतंकियों और अपराधियों के लिए बड़ा खतरा है। आम भाषा में कहें तो यह चश्मा चलते-फिरते अपराधियों और आतंकियों की पहचान करने वाला ‘डिजिटल हथियार’ है। दिल्ली पुलिस को मिला स्मार्ट चश्मा पहली बार मिला है, जो अत्याधुनिक फेस रिकॉग्निशन तकनीक से लैस है।
इस चश्मे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि कोई वांछित अपराधी या आतंकी इसे पहने पुलिसकर्मी के सामने से गुजरता है, तो यह चश्मा उसकी पहचान कर तुरंत अलर्ट जारी कर देता है। इसके बाद पुलिसकर्मी बिना देरी किए संदिग्ध को हिरासत में ले सकते हैं। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक के इस नए हथियार से और मजबूत माना जा रहा है।
गणतंत्र दिवस से पहले मिला हाईटेक तोहफा
दिल्ली पुलिस को यह स्मार्ट चश्मा गणतंत्र दिवस की सुरक्षा तैयारियों से ठीक पहले मिला है। बुधवार को दिल्ली की सड़कों पर कई पुलिस अधिकारी इन चश्मों को पहनकर इसका ट्रायल करते नजर आए। यह पहला मौका है जब इतनी उन्नत तकनीक को सीधे फील्ड ड्यूटी में उतारा गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 26 जनवरी के मौके पर आतंकी खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पहले से कहीं ज्यादा सतर्क हैं। इसी कड़ी में सुरक्षा व्यवस्था में कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिनमें यह स्मार्ट चश्मा सबसे अहम माना जा रहा है।
26 जनवरी के समारोह में पहली बार दिखेंगे स्मार्ट चश्मे
इस साल 26 जनवरी के समारोह में पहली बार दिल्ली पुलिस को मिला स्मार्ट चश्मा पहने नजर आएंगे। ये चश्मे फेस रिकॉग्निशन कैमरे से लैस हैं और हर चश्मा एक मोबाइल फोन से कनेक्ट रहता है। जैसे ही कोई संदिग्ध व्यक्ति पुलिसकर्मी के सामने आता है, चश्मा उसके चेहरे को स्कैन कर डेटाबेस से मिलान करता है।
यदि चेहरा किसी वांछित अपराधी या आतंकी से मेल खाता है, तो मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत लाल रंग का फ्रेम दिखाई देता है और अलर्ट जारी हो जाता है। इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
65 हजार अपराधियों और आतंकियों का डेटा फीड
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इन स्मार्ट चश्मों से जुड़े मोबाइल फोन में करीब 65 हजार अपराधियों और आतंकियों का डेटा पहले से फीड किया गया है। इस डेटा में गंभीर अपराधों में शामिल बदमाशों, फरार आरोपियों और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी सूची में शामिल संदिग्धों की जानकारी मौजूद है।
जैसे ही कोई ऐसा व्यक्ति चश्मे की रेंज में आता है, तकनीक कुछ ही सेकंड में उसकी पहचान कर लेती है। इससे पुलिस को मौके पर ही त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलती है और अपराधियों के भागने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
कर्तव्य पथ और आसपास के इलाकों में तैनाती
26 जनवरी के दिन यह स्मार्ट चश्मा विशेष रूप से कर्तव्य पथ और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में तैनात पुलिसकर्मियों को दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान लाखों लोग कर्तव्य पथ और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद रहते हैं। ऐसे में भीड़ के बीच संदिग्धों की पहचान करना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है।
स्मार्ट चश्मा इस चुनौती को काफी हद तक आसान बना सकता है। बिना किसी को रोके या तलाशी लिए, सिर्फ चेहरे की पहचान के जरिए पुलिस संदिग्ध तक पहुंच सकती है।
एक साल में तैयार हुआ स्वदेशी स्मार्ट चश्मा
दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह स्मार्ट चश्मा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसे एक निजी कंपनी के साथ मिलकर करीब एक साल की मेहनत के बाद विकसित किया गया है। पुलिस का दावा है कि यह तकनीक भारतीय परिस्थितियों और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है।
इस बार दर्जनों पुलिसकर्मी 26 जनवरी के समारोह में ये स्मार्ट चश्मे पहनकर तैनात रहेंगे। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों, वीआईपी कार्यक्रमों और संवेदनशील मौकों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्मार्ट चश्मा स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब पुलिस को केवल सूचना तंत्र या मैनुअल पहचान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। तकनीक के सहारे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी कहीं ज्यादा तेज और सटीक हो सकेगी।
इससे न सिर्फ पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत होगा। खासतौर पर ऐसे अपराधी, जो लंबे समय से पुलिस की नजर से बचते रहे हैं, उनके लिए यह तकनीक किसी डरावने सपने से कम नहीं होगी।
अपराधियों के लिए बढ़ेगी मुश्किल
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह स्मार्ट चश्मा उन अपराधियों को पकड़ने में बेहद कारगर साबित हो सकता है, जो भीड़ का फायदा उठाकर पुलिस से बच निकलते हैं। चेहरे की पहचान के जरिए अब पुलिस की नजर से बचना आसान नहीं होगा।
आने वाले समय में यदि इस तकनीक को और ज्यादा उन्नत किया गया और बड़े स्तर पर लागू किया गया, तो राजधानी ही नहीं, देशभर की पुलिसिंग व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
तकनीक और सुरक्षा का नया अध्याय
कुल मिलाकर, दिल्ली पुलिस को मिला स्मार्ट चश्मा तकनीक और सुरक्षा के मेल का नया उदाहरण है। 26 जनवरी के मौके पर जब देश अपनी लोकतांत्रिक शक्ति और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करेगा, उसी समय दिल्ली पुलिस की यह हाईटेक पहल भी सबका ध्यान आकर्षित करेगी।
यह कहना गलत नहीं होगा कि अब अपराधियों और आतंकियों के लिए राजधानी दिल्ली में छिपना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।
