Uttarakhand National Highway Projects

Uttarakhand National Highway Projects

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

उत्तराखंड में सड़क अवसंरचना को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक अहम और निर्णायक बैठक सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित की गई। नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड ने राज्य से जुड़ी Uttarakhand National Highway Projects को मजबूती से रखा और उनके शीघ्र क्रियान्वयन की पैरवी की।

बैठक का फोकस स्पष्ट था—उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख सड़क नेटवर्क तैयार करना।


ऋषिकेश बाईपास से गैरसैंण तक: प्रमुख परियोजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में कई रणनीतिक और दीर्घकालिक महत्व की सड़क परियोजनाओं को प्रमुखता से उठाया। इनमें सबसे अहम रहा—

दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।

इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है,

जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।

सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है।

भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।

पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।

🔹 ऋषिकेश बाईपास (NH-07)

  • लंबाई: 12.67 किमी
  • अनुमानित लागत: ₹1,161.27 करोड़
  • तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक चार-लेन बाईपास
  • 4.876 किमी एलिवेटेड रोड (हाथी कॉरिडोर)
  • चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल
  • श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये का आरओबी

यह परियोजना नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगी।


🔹 अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग (NH-309B)

  • लंबाई: 76 किमी
  • लागत: ₹988 करोड़
  • दो-लेन चौड़ीकरण प्रस्ताव
    यह मार्ग कुमाऊं क्षेत्र की आंतरिक कनेक्टिविटी को मजबूती देगा।

🔹 ज्योलिकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग (NH-109)

  • लंबाई: 235 किमी
  • दो-लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव
    यह परियोजना गढ़वाल और कुमाऊं के बीच सीधा और सुरक्षित संपर्क सुनिश्चित करेगी।

🔹 अल्मोड़ा–बागेश्वर–काण्डा–उडियारी बैंड मार्ग (NH-309A)

  • लंबाई: 84.04 किमी
  • लागत: ₹1,001.99 करोड़
  • पैकेज-02 (काण्डा–बागेश्वर) के लिए वन भूमि हस्तांतरण को केंद्र की मंजूरी

चारधाम महामार्ग: आस्था, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का संगम

मुख्यमंत्री ने बताया कि चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए ₹12,769 करोड़ की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके अंतर्गत उत्तराखंड Uttarakhand National Highway Projects में—

  • कुल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क: 3,723 किमी
  • NHAI द्वारा डिज़ाइन/क्रियान्वित: 597 किमी
  • पूर्ण परियोजनाएं: 336 किमी से अधिक
  • निर्माणाधीन: लगभग 193 किमी
  • अनुमानित लागत: ₹15,890 करोड़ से अधिक

इन परियोजनाओं से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और काठगोदाम जैसे धार्मिक व औद्योगिक केंद्र सीधे जुड़ रहे हैं।

Uttarakhand National Highway Projects

एक्सप्रेसवे और बाईपास से शहरी यातायात को राहत

  • दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर:
    • 30 किमी छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे
    • 18 किमी एलिवेटेड सेक्शन और सुरंग
    • लागत ₹1,995 करोड़+
  • देहरादून बाईपास: 12 किमी | ₹716 करोड़
  • हरिद्वार बाईपास: 15 किमी | ₹1,603 करोड़

इनसे शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव में भारी कमी आएगी।


Uttarakhand National Highway Projects पर्यावरण और विकास में संतुलन

राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में—

  • एलिवेटेड रोड
  • वाइल्डलाइफ अंडरपास
  • न्यूनतम भूमि उपयोग

जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।


सिलक्यारा सुरंग: 90% सिविल कार्य पूरा

  • सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का सिविल कार्य लगभग 90% पूर्ण
  • मार्च 2027 तक परियोजना पूर्ण करने का लक्ष्य
    यह परियोजना आपदा प्रबंधन और पर्वतीय कनेक्टिविटी के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय मंत्री गडकरी का स्पष्ट संदेश

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि—

“मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर समुचित कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश हैं कि परियोजनाएं गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरी हों।”


निष्कर्ष

यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि उत्तराखंड की सड़कें (Uttarakhand National Highway Projects) अब केवल मार्ग नहीं, बल्कि विकास की रीढ़ बन रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से पहाड़ी राज्य को आधुनिक, सुरक्षित और तेज़ कनेक्टिविटी की दिशा में निर्णायक बढ़त मिल रही है।

By Bhaskar

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