Indore water contaminationPhoto Credit: ANI

Indore water contamination

इंदौर | मध्य प्रदेश

देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल कर चुके इंदौर में इस समय हालात बेहद चिंताजनक हैं। Indore के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल (Indore water contamination) के कारण अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत, 272 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने और 2800 से अधिक लोगों के बीमार पड़ने की पुष्टि हो चुकी है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि मृतकों की संख्या 14 तक पहुंच चुकी है, हालांकि सरकार ने अभी आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।

यह पूरा मामला सामने आने के बाद देशभर में इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


10 दिनों से फैल रही बीमारी, इलाके में दहशत

भगीरथपुरा क्षेत्र में बीते 10 दिनों से उल्टी-दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार के मामलों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई। सैकड़ों लोग सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचे, जबकि कई मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।

डॉक्टरों के अनुसार, यह जलजनित बीमारी (Water-borne disease) है, जिसका सीधा संबंध दूषित पानी की आपूर्ति से है।


पानी के सैंपल में बैक्टीरिया की पुष्टि

इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने बताया कि 26 पानी के सैंपल में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन पाया गया है।
महत्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार रिपोर्ट को Indore Municipal Corporation (IMC) को सौंप दिया गया है।

कुल 70 से अधिक सैंपल विभिन्न स्थानों से लिए गए थे, जिनमें से कई में गंभीर स्तर का प्रदूषण पाया गया।


सीवर लाइन से मिला पानी, मुख्य पाइपलाइन में लीकेज

जांच में सामने आया कि जिस मुख्य पाइपलाइन से इलाके में पेयजल सप्लाई होती है, वह एक सार्वजनिक शौचालय (Public Toilet) के नीचे से गुजरती है।
पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया, जिससे हजारों लोग बीमार पड़ गए।

इसके अलावा, कई डिस्ट्रिब्यूशन लाइनों के टूटे होने की भी पुष्टि हुई है।


NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, रिपोर्ट तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए National Human Rights Commission (NHRC) ने सुओ मोटो संज्ञान लिया है।
आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

NHRC ने अपने नोटिस में कहा कि:

“स्थानीय निवासी कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।”


तीन अधिकारियों पर कार्रवाई, दो निलंबित, एक बर्खास्त

इस बड़े प्रशासनिक फेलियर के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए:

  • दो अधिकारियों को निलंबित
  • एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त

कर दिया है।
सरकार का कहना है कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।


डिप्टी सीएम बोले – स्थिति पर नजर, CM खुद अस्पताल पहुंचे

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Rajendra Shukla ने कहा कि सरकार हालात पर पूरी नजर रखे हुए है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री Mohan Yadav स्वयं अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं, मरीजों और उनके परिजनों से मिल रहे हैं तथा डॉक्टरों से उपचार व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा:

“सरकार प्रभावित लोगों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराएगी। पानी दूषित होने के कारणों की गहन जांच की जा रही है।”


नगर निगम की त्वरित कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद इंदौर नगर निगम ने:

  • पूरी पाइपलाइन की सफाई
  • लीकेज की मरम्मत
  • क्लोरीन टैबलेट का वितरण
  • लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह

जारी की है।

अधिकारियों के मुताबिक, अब ओपीडी में मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आ रही है।


‘भारत का सबसे स्वच्छ शहर’ होने पर सवाल

गौरतलब है कि इंदौर ने स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठ वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनने का रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें उसने नवी मुंबई और सूरत जैसे शहरों को भी पीछे छोड़ा।

लेकिन इस Indore water contamination crisis ने इस उपलब्धि की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


निष्कर्ष

इंदौर जैसी स्मार्ट और स्वच्छ मानी जाने वाली सिटी में पेयजल संकट का इतना भयावह रूप लेना, शहरी प्रशासन की तैयारियों पर बड़ा सवाल है।
अब सबकी निगाहें NHRC की रिपोर्ट, सरकार की अगली कार्रवाई और दोषियों पर होने वाले कड़े कदमों पर टिकी हैं।

By Bhaskar

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