मुंबई, 8 दिसंबर: वैश्विक संकेतों की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार दबाव में रहा। कारोबार की शुरुआत से ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुलकर नीचे फिसल गए। निवेशकों में सतर्कता स्पष्ट दिखी, क्योंकि विदेशी पूंजी के बहिर्गमन और अमेरिका के आर्थिक संकेतकों से जुड़ी अनिश्चितता घरेलू बाजार की धारणा पर भारी पड़ती दिखाई दी।
बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 316.52 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 85,395.85 अंक पर आ गया। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला व्यापक सूचकांक निफ्टी 106.70 अंक यानी 0.41 प्रतिशत कमजोर होकर 26,079.75 अंक पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती मिनटों में बाजार में बिकवाली की तीव्रता लगभग सभी सेक्टर्स में देखी गई।
FPI की लगातार बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली घरेलू बाजार के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है। नवंबर और दिसंबर के शुरुआती सप्ताहों में एफपीआई की निकासी ने बाजार की सकारात्मक धारणा को कमजोर कर दिया है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठक को लेकर सतर्कता ने विदेशी निवेशकों को जोखिम से बचने की ओर प्रेरित किया है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धीमी होती वृद्धि और रोजगार के ताजा आंकड़ों ने फेड की ब्याज दर संबंधी नीति पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर उभरते बाजारों पर पड़ा है। इस वजह से विदेशी पूंजी भारत समेत एशियाई बाजारों से बाहर निकल रही है।
कौन से सेक्टर्स में दबाव?
शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, आईटी, ऊर्जा, धातु और वित्तीय सेवाओं से जुड़े अधिकांश शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। प्रमुख दिग्गज शेयरों में से—
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एचडीएफसी बैंक,
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इंफोसिस,
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रिलायंस इंडस्ट्रीज,
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टाटा स्टील,
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कोटक बैंक,
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टीसीएस
जैसे स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव स्पष्ट दिखाई दिया।
छोटे और मध्यम शेयरों (मिडकैप और स्मॉलकैप) में भी कमजोरी का रुख रहा, हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेशकों का रुझान स्थिर दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित दांव (safe bets) को तरजीह दे रहे हैं और बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं।
वैश्विक संकेत भी रहे कमजोर
एशियाई बाजारों में सोमवार को मिश्रित रुझान देखने को मिला। जापान का निक्केई हल्की गिरावट में रहा, जबकि हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी दबाव की स्थिति बनी रही। चीन में जारी कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने भी निवेशकों की धारणा पर असर डाला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई बाजारों की सुस्ती घरेलू निवेशकों की उम्मीदों को कमजोर कर रही है, क्योंकि भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक परिदृश्य का सीधा प्रभाव पड़ता है।
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 76–78 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना हुआ है, जो आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए चिंता का विषय है। कमजोर रुपये ने भी बाजार की स्थिरता पर दबाव बनाया है।
घरेलू कारक: निवेशक सतर्क रुख में
सप्ताह की शुरुआत में निवेशकों का मूड सावधानी भरा रहा, क्योंकि—
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फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति की घोषणा निकट है,
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दिसंबर के घरेलू महंगाई आंकड़े आने वाले हैं,
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औद्योगिक उत्पादन (IIP) के ताजा आंकड़े जल्द जारी होंगे।
इन सभी संकेतकों पर बाजार की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये घरेलू डेटा अगले एक से दो सप्ताह में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
बीते सत्र में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा था और निवेशकों की मनोस्थिति अभी भी स्थिर नहीं है। कई ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि जब तक एफपीआई का रुख सकारात्मक नहीं होता, तब तक बाजार में मजबूत रिकवरी की उम्मीद सीमित रहेगी।
बाजार विशेषज्ञों की राय
कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में बाजार उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, “FPI की बिकवाली, वैश्विक ब्याज दरों में अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती बाजारों के सामने प्रमुख जोखिम हैं।”
मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, निफ्टी के 26,000 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है, लेकिन यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में इसमें और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर फोकस बढ़ सकता है, क्योंकि ये वैश्विक संकेतों पर ज्यादा प्रतिक्रिया देते हैं। वहीं डिफेंस, रेलवे और कैपिटल गुड्स सेक्टर में घरेलू ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है, जिससे इन क्षेत्रों में गिरावट सीमित रह सकती है।
अगले कुछ दिनों का रुख कैसा रहेगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशक फिलहाल किसी भी बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं और दाम गिरने पर ही खरीदारी का रुझान दिखा रहे हैं। यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं या अमेरिकी फेड के रुख में नरमी दिखाई देती है, तो भारतीय बाजारों में भी तेजी लौट सकती है।
हालांकि, यदि FPI की बिकवाली तेज होती है, तो सेंसेक्स और निफ्टी 1–2 प्रतिशत तक और नीचे आ सकते हैं। बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका के चलते निवेशकों को विशेषज्ञ सावधानी बरतने और लार्ज कैप स्टॉक्स में ही टिके रहने की सलाह दे रहे हैं।

