उच्च-स्तरीय समिति में कौन-कौन शामिल?
इन नियुक्तियों पर फैसला लेने वाली यह समिति केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व है।
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अध्यक्ष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
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सदस्य (विपक्ष): लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी।
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सदस्य (कैबिनेट): प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (आमतौर पर गृह मंत्री)।
यह समिति ही अंतिम रूप से उन नामों का चयन करती है, जिनकी सिफारिश राष्ट्रपति को नियुक्ति के लिए की जाती है।
CIC में रिक्त पदों की चिंताजनक स्थिति
पिछले कुछ समय से केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में पदों का खाली रहना एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। वर्तमान में, मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त है, जो आयोग का प्रमुख होता है। इसके अलावा, आठ सूचना आयुक्तों के पद भी खाली हैं।
कुल 11 स्वीकृत पदों में से, लगभग 9 पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर आरटीआई आवेदनों के निपटारे पर पड़ रहा है।
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आरटीआई मामलों का बोझ: रिक्तियों के कारण, आरटीआई आवेदनों के निपटारे में देरी हो रही है। आयोग के पास लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे आम नागरिक को समय पर सूचना मिलना कठिन हो रहा है।
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पारदर्शिता पर सवाल: विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वपूर्ण पदों का खाली रहना आरटीआई कानून की मूल भावना और देश में पारदर्शिता की प्रक्रिया को कमजोर करता है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई प्रक्रिया
यह नियुक्तियों की प्रक्रिया उस वक्त तेज़ हुई जब उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर संज्ञान लिया। सरकार ने 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति 10 दिसंबर को इन पदों के लिए नामों का चयन करने और सिफारिश करने के लिए बैठक कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने रिक्तियों को जल्द भरने की आवश्यकता पर जोर दिया था, ताकि सूचना आयोग सुचारू रूप से कार्य कर सके। न्यायालय के दबाव को इस तेज हुई प्रक्रिया का मुख्य कारण माना जा रहा है।
मुख्य सूचना आयुक्त की भूमिका और महत्व
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एक सर्वोच्च अपीलीय निकाय है। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त इसकी रीढ़ होते हैं।
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अपील का अंतिम मंच: यदि कोई नागरिक सरकारी विभागों से अपनी आरटीआई का संतोषजनक जवाब नहीं पाता है, तो वह अंतिम अपील CIC के समक्ष ही दायर कर सकता है।
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शासकीय पारदर्शिता की निगरानी: CIC सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का काम करता है। यह संस्था सरकारी कामकाज की जांच और आवश्यक होने पर विभागों पर जुर्माना लगाने की शक्ति भी रखती है।
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लोकतंत्र की मजबूती: आरटीआई, भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण उपकरण है, और CIC उस उपकरण का संरक्षक है।
चयन प्रक्रिया और संभावित नाम
CIC और सूचना आयुक्तों के पदों पर नियुक्तियाँ आमतौर पर सिविल सेवाओं (IAS, IPS), कानून, पत्रकारिता, विज्ञान या सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों के अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से की जाती हैं।
समिति द्वारा चुने जाने वाले नामों पर आम सहमति बनाना एक चुनौती हो सकती है, खासकर जब समिति में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के नेता दोनों शामिल हों। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार हो सकता है जब पीएम मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस संवेदनशील विषय पर एक साथ बैठेंगे।
आगे क्या? आम नागरिक की अपेक्षाएं
बुधवार की बैठक के बाद, समिति द्वारा चुने गए नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी जाएगी। आम जनता और आरटीआई कार्यकर्ता जल्द से जल्द यह उम्मीद कर रहे हैं कि:
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योग्य और निष्पक्ष लोगों का चयन: यह सुनिश्चित हो कि चुने गए लोग आरटीआई कानून की भावना को समझते हों और पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करें।
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जल्द से जल्द कार्यभार संभालना: नियुक्तियों की घोषणा के बाद उन्हें तुरंत कार्यभार संभालना चाहिए ताकि लंबित मामलों का निपटारा शुरू हो सके।
CIC में मुख्य सूचना आयुक्त समेत नौ पदों के भरे जाने से आरटीआई की व्यवस्था में नई जान आएगी, जिससे देश में सूचना का अधिकार और भी मजबूत हो सकेगा। देश की नज़रें इस महत्वपूर्ण चयन समिति की बैठक के निष्कर्षों पर टिकी हैं।

