पश्चिम बंगाल में West Bengal SIR controversy अब खुलकर सियासी टकराव का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चुनाव आयोग पर जमकर बरसीं। बंगाल में चल रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचीं, लेकिन बातचीत अधूरी छोड़कर बैठक से बाहर निकल गईं।
बैठक से बाहर आते ही ममता बनर्जी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर सीधे तौर पर अहंकारी और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
“सात बार सांसद रही, ऐसा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा”
ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा,
“मैं सात बार सांसद रही हूं, लेकिन मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसा चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। इतना एरोगेंट CEC मैंने पहले कभी नहीं देखा।”
उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक तीन महीने पहले पश्चिम बंगाल में SIR की क्या जरूरत थी?
ममता का आरोप है कि SIR के नाम पर जेन्युइन वोटर्स के नाम काटे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है।
काले कपड़ों में EC दफ्तर पहुंचीं TMC नेता
इस बैठक को लेकर एक और राजनीतिक संदेश भी दिया गया। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का पूरा प्रतिनिधिमंडल काले कपड़े पहनकर चुनाव आयोग पहुंचा। इसे TMC का “लोकतंत्र बचाओ” और “विरोध प्रदर्शन” का प्रतीक माना जा रहा है।
बैठक बीच में छोड़ने के फैसले पर ममता ने कहा कि उनका और उनकी पार्टी का सम्मान नहीं किया गया, इसलिए बातचीत जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था।
“हमारा अपमान किया गया, इसलिए किया बहिष्कार”
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा,
“उन्होंने हमारी बेइज्जती की, हमें ज़लील किया। यह चुनाव आयोग बहुत एरोगेंट है। हम न्याय मांगने आए थे, लेकिन हमें अन्याय मिला।”
उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने आयोग को पांच चिट्ठियां सौंपीं, लेकिन एक का भी जवाब नहीं दिया गया।
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि CEC मीडिया के सामने झूठी ब्रीफिंग दे रहे हैं।
“चुनाव आयोग सरकार चुनना चाहता है?”
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा,
“क्या चुनाव आयोग चुनाव से पहले सरकार चुनना चाहता है?”
उन्होंने कहा कि BJP के पास सत्ता की ताकत है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के पास जनता की ताकत।
इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया।
SIR में मौतों का आरोप, आयोग को ठहराया जिम्मेदार
मुख्यमंत्री ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों की मौत हुई है, उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि बंगाल में 8100 माइक्रो ऑब्जर्वर क्यों नियुक्त किए गए, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं किया गया।
यह बयान इस बात का संकेत है कि West Bengal SIR controversy अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय और संवैधानिक संकट के रूप में पेश किया जा रहा है।
“चुनाव का बहिष्कार नहीं, मजबूती से लड़ेंगे”
हालांकि ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव का बहिष्कार नहीं करेगी।
उन्होंने कहा,
“हम चुनाव से भागने वाले नहीं हैं। हम पूरी मजबूती से लड़ेंगे।”
यह बयान विपक्ष को यह संदेश देता है कि TMC चुनावी मैदान में डटी रहेगी, लेकिन SIR को लेकर अपना विरोध और तेज करेगी।
चुनाव आयोग का जवाब: कानून के तहत काम होगा
ममता बनर्जी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने भी आधिकारिक बयान जारी किया।
आयोग के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में AITC प्रतिनिधिमंडल ने SIR से जुड़े मुद्दे उठाए, जिन पर CEC ने कानून के दायरे में जवाब दिया।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि—
- SIR पूरी तरह कानून के अनुसार किया जा रहा है
- कोई भी व्यक्ति अगर कानून अपने हाथ में लेता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी
West Bengal SIR controversy TMC नेताओं पर धमकी और हिंसा के आरोप
चुनाव आयोग ने अपने बयान में TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए।
आयोग के मुताबिक—
- TMC विधायक खुलेआम CEC और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं
- कई जगह ERO (SDO/BDO) कार्यालयों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं
- SIR में लगे अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
BLO के भुगतान पर भी EC की सख्ती
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को समय पर मानदेय दिया जाना चाहिए।
आयोग के अनुसार, प्रति BLO तय 18,000 रुपये में से अब तक सिर्फ 7,000 रुपये ही दिए गए हैं, जो गंभीर लापरवाही है।
राजनीतिक संकेत और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि West Bengal SIR controversy आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
एक तरफ चुनाव आयोग कानून और प्रक्रिया की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी इसे लोकतंत्र और वोटर अधिकारों पर हमला बता रही हैं।
यह टकराव न सिर्फ बंगाल की राजनीति, बल्कि देश की चुनावी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
SIR को लेकर ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच टकराव West Bengal SIR controversy अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां एक ओर आयोग निष्पक्षता और कानून की दुहाई दे रहा है, वहीं ममता बनर्जी इसे जनता के अधिकारों की लड़ाई बता रही हैं।
आने वाले समय में यह विवाद चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनना तय माना जा रहा है।
